ज्योतिष शास्त्र में 'गुरु चांडाल' योग को अत्यंत अशुभ योग मना गया है क्यों ?
प्रिय पाठक,
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
1) गुरु -चांडाल योग होता क्या है ? ( Guru- Chandaal Yog )
2) गुरु -चांडाल योग का प्रभाव क्या होता है ? ( Guru -Chandaal Yog Effect )
३) गुरु चांडाल योग का प्रभाव कब कम होता है ? Guru -Chandaal Yog cancellation )
४) गुरु -चांडाल योग यदि है तो क्या उपाय करें ? (Guru -Chandaal Yog Remedies )
गुरु -चांडाल योग होता क्या है ?
कुंडली मे गुरु +राहु एक साथ युति व बना कर किसी भी भाव में बैठ जाये तो गुरु-चांडाल योग का निर्माण होता है । देवगुरु बृहस्पति को गुरु माना जाता है और राहु चूकिं दानव है अतः उसको चांडाल माना गया है।- गुरु-चांडाल योग होने से जातक के कुंडली में शुभ योगों के प्रभाव को कम कर देता है ।
- गुरु धन ,विद्या व् ज्ञान , संतान , लड़की के लिए विवाह का कारक होता है अतः इनमे समस्या उत्पन्न होती है।
- पेट और लिवर में समस्या उत्पन्न करता है ।
- जातक धर्म- भ्रष्ट होता है और अपयश की प्राप्ति होती है ।
और जिस घर मे गुरु + राहु युति बनाकर बैठे है और जहाँ उनकी दृस्टि पड़े उस भाव पर इसका प्रभाव अत्यधिक होता है। मान लीजिए
जैसे आपके कुंडली मे गुरु और राहु दशम भाव में है तो
- वो आपके नौकरी व व्यवसाय को बाधा उत्पन्न करेगा
- उसकी पंचम दृष्टि धन भाव पर होगी तो धन संचित होने में कठिनाई होगी । कुदुम्ब परिवार में मनमुटाव की स्तिथि रहेगी ।
- सप्तम दृष्टि से चतुर्थ भाव को देखेगा तो माता जे सुख में कमी और गाड़ी-भवन-भूमि प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होगा।
- नवमं दृष्टि से 6वे भाव को देखेगा को आपके ऋण-रोग-शत्रु में बढ़ोतरी करेगा ।
गुरु यदि अपनी उच्च राशि में या स्वराशि का हो:-
गुरु और राहु दोनों अच्छे भाव या राशि मे हो :-
गुरु और राहु के साथ को और कोई और ग्रह हो तो भी प्रभाव कम हो जाता है :-
गुरु यदि आपके कुंडली के अति योग कारक ग्रह हो और स्वराशि हो और उनकी डिग्री राहु से अच्छी हो तो ये योग बनेगा आपको राहु को शांत करना होगा।
गुरु यदि सूर्य से अस्त हो तब ये योग नही बनेगा ।
सबसे पहले ये चेक करना है कौन सा ग्रह आपके लिए योगकारक है यदि गुरु अच्छे है तो राहु को शांत करने है और यदि गुरु ख़राब है तो गुरु को शांत करना है ।
- गुरु को शांत करने के लिए ॐ बृं बृहस्पतये नमः। सुबह के समय 108 बार रोज करें।
- राहु को शांत करने के लिए ॐ रां राहवे नमः का जाप शाम के समय 108 रोज करें।
- हमेशा बड़े बुजुर्गों का आदर करें
- सप्ताह में एक दिन मंदिर जरूर जाए ।
- रोज सुबह हल्दी की माला से 108 बार गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें ।
- पार्क में , मंदिर में , सड़को पर पीपल का पेड़ जरूर लगाएं ।
- मांस- मदिरा का त्याग करें ।
- आप यदि किसी गुरु से जुड़े है गुरु की सेवा करते है तो ये उत्तम उपाय है ।
नोट : यदि आपके ऊपर गुरु की या सदगुरु की कृपा हो तो भी गुरुचंडाल योग का प्रभाव कम हो जाता है ।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

0 टिप्पणियाँ