होलाष्टक 10 मार्च गुरूवार को तड़के 2 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और होलिका दहन के दिन समाप्त हो जायेगा।
प्रिय पाठक,
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
- होलाष्टक क्या है ?
- क्यों होलाष्टक को अशुभ माना जाता है ?
- होलाष्टक में क्या काम करना वर्जित है ?
- होलाष्टक को ज्योतिषये दृष्टि से अशुभ क्यों माना जाता है ?
1) होलाष्टक क्या है ?
होली से ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक प्रारंभ होता है । शुक्ल पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तिथि तक होलाष्टक काल माना गया है यानी होलिका के दिन होलाष्टक समाप्त होता है । इस बार होलिका दहन 17 मार्च को मनायी जाएगी और अतः
होलाष्टक 10 मार्च गुरूवार को तड़के 2 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और होलिका दहन के दिन समाप्त हो जायेगा।
2) क्यों होलाष्टक को अशुभ माना जाता है ?
पहली पौराणिक कथा के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद थे और पुत्र प्रह्लाद विष्णु भगवान के भक्त थे और राजा हिरणाकश्यप को लगता था कि उनके जैसा ताकत किसी के पास नही है वो ही भगवान है और उन्होंने प्रह्लाद को अपनी भक्ति करने को कही परंतु प्रह्लाद नहीं माने अतः उन्होंने अपने बहन होलिका को (जिनको ये वरदान था कि उनको आग नही जला सकती) प्रह्लाद को अपने गोद में लेकर चिता पर बैठने कहा और चिता को आग लगा दी गयी और होलिका 8 दिनों तक उस चिता में बैठी रही , पुत्र प्रह्लाद का बाल भी बांका नही हुआ और होलिका दहन के दिन होलिका जल गई और पुत्र प्रह्लाद जीवित रहें।
चूंकि ये पूरी प्रक्रिया शुक्ल पक्ष से 8 दिनों तक होलिका दहन तक चलती है अतः ये 8 दिन अशुभ माना जाता है और इस वक्त कोई भी शुभ काम नही करना चाहिए ।
चूंकि ये पूरी प्रक्रिया शुक्ल पक्ष से 8 दिनों तक होलिका दहन तक चलती है अतः ये 8 दिन अशुभ माना जाता है और इस वक्त कोई भी शुभ काम नही करना चाहिए ।
और दूसरी एक पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर का वध शिव पुत्र कार्तिके के हाथ ही होना था परंतु माता पार्वती के आत्मदाह के कारण भोलेनाथ तपस्या में लीन हो गए । उनकी तपस्या को भंग करने के लिए सभी देवता कामदेव और देवी रति को ये काम सौपा । कामदेव और देवी रति के कारण भोलेबाबा की तपस्या तो भंग हो गयी परंतु उनकी क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए और उस दिन फाल्गुन मास की अष्टमी थी । इस दिन से ही कामदेव और देवी रति के लिए सभी देवी - देवता भोलेबाबा से क्षमा प्रार्थना करने लगे और इस क्रम में 8 दिन बीत गए और 8 वे दिन भगवान शिव ने कामदेव को जीवित किया और उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि थी अतः ये 8 दिन शुभ नही माना जाता हैं।
होलाष्टक को ज्योतिषये दृष्टि से अशुभ क्यों माना जाता है ?
होलाष्टक को ज्योतिषये दृष्टि से अशुभ माना जाता है माना जाता है कि होलाष्टक काल मे ग्रहों की स्थिति अच्छी नही होती है हर दिन कोई न कोई ग्रह उग्र होते है जैसे चन्द्रमा अष्टमी के दिन, सूर्य देव नवमी को, दशमी तिथि को शनि देव , एकादशी को शुक्र देव , द्वादशी तिथि को देव गुरु बृहस्पति , त्रयोदसी को बुध देव , चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु अपने उग्र स्तिथि व अनुकूल नही होते है अतः इस वक्त कोई भी शुभ का करना वर्जित है ।
होलाष्टक में क्या काम करना वर्जित है ?
- होलाष्टक के समय कोई भी मांगलिक कार्य नही कर सकते है । विवाह , मुंडन , नामांकरण , गर्भधरण, विद्या आंरभ संस्कार , गृह प्रवेश आदि के कार्य नही करने चाहिए ।
- इतना ही नहीं कोई भी नया कार्य , निवेश , व्यापर आरंभ न करें ।
- नए वस्त्र , घर , वाहन ,गहने एवं फर्नीचर को ख़रीदने से परहेज करें।
- होलाष्टक के समय कोई कोर्ट -केस , मुकदमा दायर न करें।
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
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5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
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