प्रिय पाठक
नमस्कारमैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
परिक्रमा क्या है ?
हम सब ने देखा है कि मंदिर में पूजा और आराधना के बाद लोग परिक्रमा करते है। कभी सोचा है परिक्रमा क्यों करना चाहिए ? क्यों लोग परिक्रमा करते है ?
हम लोगो ने बचपन से देखा है कि भगवन जी के दर्शन करने के बाद कुछ लोग मंदिर की परिक्रमा करते है और हम भी उनको देख कर मंदिर के चारो और परिक्रमा करने लगते है।
हमें बताया गया है कि मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा होती और जब हम परिक्रमा करते है तो वो ऊर्चा हम महसूस करते है और मन को शांति प्राप्त होती है।
इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
1 ) देव मूर्ति की परिक्रमा व् मंदिर की परिक्रमा क्यों करते है ? dev murti parikrama
2) किन- किन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए परिक्रमा करते समय ? prikrama kaise karen
3 )किस देवता की, कितनी परिक्रमा करे ? kis devta ki kitni prikrama karen
4) क्या आप जानते है परिक्रम कितने प्रकार के होते है ? parikrama kitne prakar
आज इस पोस्ट आप जाने
देव मूर्ति की परिक्रमा व् मंदिर की परिक्रमा क्यों करते है ?
prikrama kerne ka kya arth hai ?
वो इसलिए होता है क्योंकि जिस स्थान या मंदिर में विधि-विधानानुसार प्राण प्रतिष्ठित देवी-देवता की मूर्ति स्थापित की जाती है उस स्थान पर शक्ति की दिव्य प्रभाव रहता है इसलिए प्रतिमा की आस- पास परिक्रमा करने से हमे उस तेज की सहज ही प्राप्ति व अनुभूति हो जाती है।
दैवीय प्रभाव हमेशा से उत्तर दिशा(north direction ) से दक्षिण दिशा (south direction )की ओर गतिमान होती है अतः दाहिने हाथ की ओर से घूमना ही प्रदक्षिणा का सही तरीका है।
हम अपने इष्ट देवी -देवता जब परिक्रमा करते है तो उनके दिव्य शक्तियों का प्रभाव हमारे ऊपर पड़ता है और हमारे विघ्नों, संकटों, विपत्तियों का नाश करने में समर्थ होता है इसलिए परंपरा है कि पूजा-पाठ और अभिषेक आदि करने के बाद देवी-देवता की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।
माना जाता है कि परिक्रमा जितना अधिक हम करते है उसका लाभ उतना ही प्राप्त होता है ।
****सामान्यतः पाँच व ग्यारह बार परिक्रमा करने का विधान है ।
परिक्रमा करते समय किन- किन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए?
परिक्रमा कैसे करें?
- जिस देवी-देवता की परिक्रमा की जा रही है, उसकी परिक्रमा के दौरान उनके मंत्रो का जाप मन में जरूर करें।
- एक बार परिक्रमा शुरू करने पर बीच मे नहीं रोकना चाहिए।परिक्रमा जहाँ से शुरू किया है वहाँ पर ही खत्म करें अन्यथा पुर्ण नही मानी जाएंगी।
- परिक्रमा हमेशा दाहिने हाथ से शुरू करनी चाहिए। prikrama will start with right hand side
- निंदा, बुराई, दुर्भावना, क्रोध, तनाव आदि विकार मन में परिक्रमा करने वक़्त न रखे ।नंगे पैर ही परिक्रमा की जाती है ।
- हंसते-हंसते, बातचीत करते-करते, खाते-पीते,धक्का-मुक्की करते हुए परिक्रमा न करें।
- परिक्रमा पूर्ण कर अंत में प्रतिमा को साष्टांग प्रणाम कर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रार्थना करें।
इस प्रकार देवी-देवताओं की परिक्रमा विधिवत करने से हमारी समस्याओं का समाधान और इच्छा पूर्ति होती है एवं पूर्ण लाभ की प्राप्ती होती है।
किस देवी -देवता की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए ?
kis devta ki kitni parikrama kerni chahiye
शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की अलग संख्या बतलाया गया है:-
1 ) महिला "वटवृक्ष" की परिक्रमा अपने सौभाग्य में वृद्धि के लिए करती है। वटवृक्ष की परिक्रमा 108 बार और कम से कम 11 बार करना चाहिए।
2 ) "शिवजी " की आधी परिक्रमा की जाती है क्योंकि शिव भगवान की अभिषेक की धार को लांघना वर्जित है अतः आधी परिक्रमा पुनः वापस उसी तरफ लौट कर पूरी की जाती है ।शिव जी की परिक्रमा करने से बुरे स्वप्न आना समाप्त हो जाता है ।
3) "देवी मां" की एक परिक्रमा की जानी चाहिए।मन में पूर्ण श्रद्धा से अपने इच्छाओं एवं संकल्प को पूरा करने की विनती करनी चाहिए ।
4) श्री "गणेश जी" और हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है।
5) भगवान "विष्णुजी" एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए।
6) "सूर्य मंदिर" की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए ।
7) शनि देव को प्रसन्न करने के लिए पीपल के वृक्ष की 'सात ' परिक्रमा करनी चाहिए।
8 ) तुलसी की परिक्रमा 'तीन ' बार करनी चाहिए।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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