सोमवार व्रत का क्या महत्त्व है और ज्योतिषये मान्यता अनुसार क्यों करना चाहिए ? ( Somvaar ka vrat ka kya mahatv hai aur jyotishye manyata anusaar kyu kerna chahiye )
प्रिय पाठक ,
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
हमारे शास्त्रों में हर दिन का महत्व बतलाया गया है और हर किसी न किसी देवी देवता को समर्पित है और उनकी पूजा ध्यान की चर्चा की गई है । आज इस पोस्ट में मैं सोमवार के व्रत के बारे चर्चा करुँगी ।
इस पोस्ट में आप जांएगे :-
1)सोमवार का व्रत किस भगवान को समर्पित है ?( somvaar ka vrat kis bhagwaan ko samarpit hai ?)
2) सोमवार का व्रत क्यों करना को कहा जाता है ? ( Somvaar ko vrat kyu kerna chahiye ?)
3) ज्योतिषये मान्यता के अनुसार सोमवार का व्रत क्यों करना को कहा जाता है ? ( Jyotishye manyata anusaar somvaar ka vrat kyu kerna chahiye ?
4) सोमवार का व्रत कैसे करना चाहिए? ( Somvaar ka vrat kaise kerna chahiye ?)
5) इस दिन क्या खाना चाहिए ? Somvaar ke din kya khana chahiye ?)
6) सोमवार को क्या दान करना चाहिए? Somvaar ke din kya nahi khana chahiye?
7) सोमवार को व्रत करने से क्या लाभ मिलता है ?( Somvaar ke vrat kerne se kya laabh hota hai ?)
1)सोमवार का व्रत किस भगवान को समर्पित है ?
सोमवार भगवान भोलेनाथ शिव शंकर को समर्पित है । सोम -माने चन्द्रमा । चंदमा भगवान शिव की जटाओं
में विराजमान रहते है और ये मान जाता है कि इसी दिन चंद्रमा ने भोलेनाथ की पूजा की और अपने क्षय
रोगों से मुक्ति प्राप्त की थी अतः ये दिन चंद्रमा को भी समर्पित है ।
2) सोमवार का व्रत क्यों करने को कहा जाता है ?
सामन्यतः सोमवार कुमारी लड़कियां मन चाहे वर को व जीवन साथी पाने के लिए सोमवार का व्रत करती है
खास कर सावन में आने वाले सोमवार को । मान्यता है कि भोलेनाथ की पूजा से , व्रत से भोलेबाबा जैसे
- भोले और शांत जीवन साथी प्राप्त होते है ।
- विवाहित महिला अपने अखंड सौभाग्य के लिए सोमवार का व्रत रखती है और
- अविवाहित लड़के भी अपने पसंद के जीवन साथी प्राप्त के लिए खास सावन के सोमवार का व्रत रखते है।
3) ज्योतिष सोमवार का व्रत क्यों करना को कहते है ?
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है किसी भी जातक का यदि
- कुंडकी में चंद्रमा खराब है या पीड़ित है तो उनको चंद्रमा को शांत करने के लिए या अच्छा करने के लिए भोलेनाथ की पूजा का विधान बतलाया जाता है।
- चन्द्रमा यदि केमद्रुम दुर्योग बना रहा है तो भी आप सोमवार को चन्द्रमा के वास्तु का दान करते है तो आपको उस दोष से मुक्ति मिलेगी
- किसी जातक की कुंडली में खराब चंद्रमा की महादशा चल रही हो तो उनको सोमवार का व्रत करने की सालह दी जाती है ।
- शिव भगवान की पूजा करने से मन शांत होता है , एकाग्रता बढ़ती है और चंद्रमा जिन -जिन चीजों का कारक जैसे चंद्र माता का कारक है तो आपके माँ के साथ आपका सम्बंद अच्छे होते है ।
- शनि साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव से छुटकारा मिलता है क्युकिं शनि का चंद्र राशि का गोचर होने पर ही जातक को शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है और यदि आपके कुंडली में चन्द्रमा पीड़ित है तो साढ़ेसाती का प्रभाव अधिक होता है।
- किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार को व्रत करने का संकल्प करना चाहिए ।
- संकल्प में आप कितने सोमवार करेंगे जैसे 5,7,11,16,21 । 16 सोमवार व्रत को सबसे अच्छा माना गया है ।
- संकल्प में अपनी मनोकामना जरूर बोल ले ये नही की एक सोमवार को एक मनोकामना और दूसरे सोमवार को दूसरी मनोकामना मांग रहे है।
******एक ही मनोकामना को पूरा करने के लिए व्रत का संकल्प ले
- उस दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सफेद वस्त्र धारण करें महिला रंगीन वस्त्र पहने ।
- पूजा स्थल पर भगवान शिव के फ़ोटो रखें और छोटा सा शिव से शिवलिंग रखें ।
- भोलेनाथ को सफेद चंदन, सफेद फूल सफेद मिठाई , ऋतु फल अर्पित करें और शिवलिंग पर जल अर्पित करें ।
- 108 बार ॐ नमः शिवाय कम से कम 11 बार जाप करें और दूध मिलाकर जल अर्पित करें करने से चंद्रमा मजबूत होता है ।
5) सोमवार को व्रत करने के दिन क्या खान चाहिए?
सोमवार के व्रत के दिन सामन्यतः
- फल और जूस सेवन करें और
- खाने में दूध, दही, मखाना,सिंघाड़ा, मूंगफली, साबूदाना का खीर , कट्टु के आटे की पूरी और आलू की सब्ज़ी का सकते है ।
परंतु उत्तर भारत में व्रत के दिन सभी लोग एक ही समय सिर्फ फल , दूध मिठाई का सेवन करते है ।
खाने में नमक का सेवन न करें और प्याज़ और लहसुन का त्याग करना चाहिए ।
जैसा कि पहले ही बताया गया है कि सोमवार चंद्रमा को समर्पित है और कुंडली मे चंद्रमा को अच्छा करने के लिए चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान किया जाता है जैसे दूध ,दही , चावल , खीर , मिश्री ,सफेद फूल
और नारियल।
सोमवार का व्रत करने से भक्तो को :-
· एकाग्रता बढ़ती है।
· मन मजबूत होने से आत्मबल बढ़ता है ।
· रोग-शोक से मुक्ति मिलती है ।
· कभी भी पराजय नही होती है ।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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