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Numerology ( अंक ज्योतिष का महत्त्व )

 प्रिय  पाठक ,

नमस्कार। 



मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय  की जानकारी साझा करुँगी। 

इस पोस्ट में आप जांएगे :-

Numerology  ( अंक ज्योतिष का  महत्त्व )

आपलोग अंकशास्त्र(नुमेरोलॉजी)के बारे में जानेंगे  और छोटे छोटे बदलाव करके आप अपने जीवन में अच्छा परिवर्तन का अनुभव कर सकते है।  

 इस पोस्ट में आप जांएगे :-

 1) नुमेरोलॉजी ( अंक शास्त्र  व् ज्योतिष ) क्या है? (What is Numerology?) 

2) अंको का क्या महत्व है? ( Importance of Number ) 

3 ) अंको को कैसे  लिखा जाता है ? (How to write Numbers in Numerology ?) 

4) अंको के प्रकर :-  1) मूलांक - जन्म दिवस  (Date of Birth)

                              2) मासांक - जनम महीना (Birth Month)

                              3) वर्षांक - जनम - वर्ष (Birth Year)

                              4) भाग्यांक (Destiny Number)

    आप लोगो ने नुमेरोलॉजी और अंक ज्योतिष  के बारे में सुना होगा ,क्या है ये ?

 देखिये अंक शास्त्र (नुमेरोलॉजी)  एक ऐसा विषय है जिसको जानने और मानने मे किसी भी प्रकार का नुक्सान कभी भी नहीं होता

 बल्कि इसको जान कर और अपने जीवन में अपना कर,  आप आपने जीवन में बहुत तरक्की कर सकते और 

अपने जीवन के कठिन रास्ते को आसान बना सकते है।

  हाँ " नीम हकीम खतरे जान " नहीं बनना है।  मतलब आधा ज्ञान हमेशा ख़तरनाक होता है।  विषय को अच्छे से जानना है चूकि ये विध्या है इसलिए धीरे धीरे हम इस विद्या को सीखेंगे। और अपने जीवन में होने बाले परिवर्तन को अनुभव करेंगे। 

 अंकज्योतिष ( नुमेरोलॉजी ) के  शब्दिक अर्थ से ही  पता चल जाता है यहाँ पर अंको के द्वारा  अंक शास्त्र  का ज्ञान प्राप्त होता है। यहाँ अंक ज्योतिष का भविष्य कथन 1 से 9 तक की संख्या पर   आधारित होता है।   अतः अंको की सहायता से भविष्य के विषय में जाना जा सकता है। 

 अंको का महत्व को चंद उदाहरण से समझते है :

1 )  आप का जन्म  दिवस  : आप कौन से दिन पैदा हुए ?

2 ) आप कौन से महीने पैदा हुए?

3) आप कौन से साल पैदा हुए ?

4 ) आपके  अपनों का जन्म दिवस एवं आपके मित्रो का जन्म दिवस इत्यादि 


हमारे चारो तरफ हमारी दुनिया अंको से घिरी है : टाइम कितना हुआ , सप्ताह के साथ दिन , महीने के 30  व् 31  दिन , साल में 12  महीने सब तो अंको की सहायता से बतलाया जाता है। 

 इसका  अर्थ ये हुआ की अंको का हमारे जीवन में बहुत  महत्व है  

से लेकर 9 तक के अंक मूल अंक कहे जाते है उसके बाद आने वाला अंको की पुनरावृति होती है चलिए जानते है इनको कैसे लिखा जाता है : 

 

1

11=1+1=2

2

12=1+2=3

3

13=1+3=4

4

14=1+4=5

5

15=1+5=6

6

16=1+6=7

7

17=1+7=8

8

18=1+8=9

9

19=1+9=10(1+0=1)

10 =1+0=1

20=2+0=2

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 







इसके बाद यदि हम 19 लेते है तो वह 1 + 9 =10= 1 +0 =1 हो जायेगा अर्थात 9 के बाद अंको की पुनरावृति होने लगती है इसलिए 9 तक के अंक , अंक जयोतिष के आधार माने गए है।  

अंको के प्रकार 

अंक शास्त्र में 5 प्रकार के अंक माने गए है:

1 ) मूलांक = जन्म तिथि

मूलांक जातक का चित्र या परछाई होता है जो जन्म तिथि से ज्ञात होता है। जन्म  हो या कोई भी घटना अंग्रेजी की 1 से 31 तारीख तक माना गया है। चलिए कुछ उदहारण से समझते है : 

मान लीजिये 
1 ) 
जन्म तिथि 07 - 09 -1974 तो उसका मूलांक = 0 +7 = 7 होगा। जो की उसके जन्म के दिन के अंको का योग है। 

2) जन्म तिथि 14 -05-2014 है तो उसका मूलांक 1+4 =5 होगा। इकाई प्राप्त होने तक अंको को जोड़ना चाहिए। इस पद्धति से मूलांक निकला जाता है। नीचे दिए के टेबल से आप 1 से लेकर 31 तक मूलांक जान सकते है। 

1

11=1+1=2

21=2+1=3

2

12=1+2=3

22=2+2=4

3

13=1+3=4

23=2+3=5

4

14=1+4=5

24=2+4=6

5

15=1+5=6

25=2+5=7

6

16=1+6=7

26=2+6=8

7

17=1+7=8

27=2+7=9

8

18=1+8=9

28=2+8=10=1+0=1

9

19=1+9=10(1+0=1)

29-2+9=11=(1+1)=2

10 =1+0=1

20=2+0=2

30=3+0=3

31=3+1=4



2) मासांक :- किसी व्यक्ति का के जन्म के महीने को लिख कर मासांक ज्ञात  जाता है। 


 जन्म का माह 

 मासांक 

 जन्म का माह 

  मासांक 

 जनवरी 

1

 जुलाई 

7

 फरवरी 

2

 अगस्त 

8

 मार्च 

3

 सितम्बर 

9

 अप्रैल 

4

अक्टूबर 

10=1 +0 =1 

 मई 

5

 नवंबर 

11=1+1=2 

 जून 

6

 दिसंबर 

12=1+2=3 

 



जन्म के महीने का आंकलन 1 से 9 अंको के आधार पर  होता है। यहाँ पर भी पुनरावृति का नियम लागु होता हैअतः  9 महीने सितम्बर के बाद 10 महीने  अक्टूबर मसंक = 1 , 11 महीने नवंबर मसंक=2 और  12 महीने दिसंबर का मसंक =3 मने गए है। 

 3 ) वर्षांक :- 

 आपके जन्म का साल (वर्षांकको प्राप्त करने के लिए जन्म वर्ष के सभी अंको का योग करना पड़ता हैचलिए उदहारण से समझते है:-

 पहला उदहारण :- मान लीजिये किसी का जन्म वर्ष 1974 है तो यहाँ पर 

 1+9 +7 +4=21 = 2+1=3  होगा 

 दूसरा उदहारण :- मान लीजिये किसी का जन्म दिवस 2014 है तो उसका वर्षांक 

2+0+1+4= 7 होगा 


4 ) 
भाग्यांक :-

 इस अंक का सीधा संबंध व्यक्ति के भाग्य से होता है इसकी गणना जन्म दिनांक +जन्म माह + जन्म वर्ष के आधार पर की जाती है। 

 चलिए उदहारण से समझते है :-

 पहला उदहारण :- मान लीजिये किसी का जन्म  दिवस 07-09-1974 है  तो उसका भाग्यांक निकलते है :-

 

 जन्म दिनांक  

 07 

 जन्म माह 

 09 

 जन्म वर्ष 

 1+9+7+4=21=2+1 =3 

 तीनो का योग 

 7+9+3= 19

 अर्थात 

 1+9=1 

  तो इस व्यक्ति का भाग्यांक -1  होगा 

 

दूसरा  उदहारण :- मान लीजिये किसी का जन्म  दिवस 14 -05-2002  है  तो उसका भाग्यांक निकलते है :-


 जन्म दिनांक  

 14 =1+4=5 

 जन्म माह 

 05 =0+5 =5 

 जन्म वर्ष 

 2+0+0+2=4 

 तीनो का योग 

 5+5+4 = 14 

 अर्थात 

 1+4=5 

  तो इस व्यक्ति का भाग्यांक -5 होगा 

 उम्मीद है मेरे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगी होगी। 


धन्यवाद

Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है 

 सबसे महत्वपूर्ण:-


1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली में कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5)  कलर थेरपी, आचार- विचार, व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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