GOOGLE ANALYTICS TAG

क्या आपकी कुंडली में राजयोग ( Rajyog ) है ?? 1- 12 तक के भाव में गजकेसरी योग ( Gajkesari Raj Yog ) का फल ।


प्रिय पाठक ,

नमस्कार। 

आज मैं फिर से बहुत ही अच्छे विषय के बारे में बात करूंगी।  आज गजकेसरी राजयोग  (Gajkesari Rajyog  ) की बात करुँगी।  

                                  




गजकेसरी राजयोग होता क्या है  ?


गजकेसरी राजयोग  (Gajkesari Rajyog):- गज माने हाथी और केसरी माने सिंह।  हाथी :- बलशाली होता है और सिंह फुर्तीला ,सजग,साहसी  होता है।  

जिस भी व्यक्ति के कुंडली गजकेसरी राजयोग  होता  है वो व्यक्ति सही समय पर, अपनी सूझ-बुझ से , अपने  बौद्धिक बल से जीवन  में बढ़ता जाता है। 

गजकेसरी राजयोग  बहुत ही शुभ  योग माना  जाता है ये योग देव गुरु बृहस्पति और चन्द्रमा के युति से बनता है।  

नोट: -कोई भी योग अपने महादशा -अन्तर्दशा -और प्रत्यंतर दशा में ही अपना प्रभाव दिखता है या देता है।  


क्या आपकी कुंडली में गजकेसरी योग है ?

Kya aap ki kundali me Gajkesari yog hai ? 

यदि आपके कुंडली में  गजकेसरी राजयोग बन रहा है तो आप :-

  • आप भाग्यशाली लोगो में से एक है।  
  • आपका जीवन स्तर काफी अच्छा और उच्च है। 
  • आप स्वाभाव से दयालु और विनम्र  है आप दुसरो की प्रति सहानभूति रखते  है। 
  • आपकी धार्मिक प्रवृति है आपका धर्म के प्रति झुकाव होता है और लोग आपका अनुसरण करते है। 
  • आपके पास धन -संपदा की कोई कमी नहीं होती है। 
  • सभी प्रकार के भौतिकसुखों  की प्राप्ति होती है। 
  • यदि आप सरकारी सेवा में है तो निश्चय ही आप उच्च पद पर आसीन है।  

सबसे पहले अपनी ऑनलाइन कुंडली बना ले।  ऑनलाइन कुंडली बनाने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें 

ऑनलाइन कुंडली बनती कैसे है? आपकी चंद्र राशि क्या है बस 1 मिनट में जानें। राशि कितने और कौन कौन से है ? 9 ग्रहों को क्या- क्या राशि दी गयी है ?

गजकेसरी राजयोग का निर्माण कैसे होता है ?

Gajkasari Rajyog ka nirman kaise hota hai ? 

जन्म कुंडली में गुरु और चन्द्रमा की युति से गजकेसरी राजयोग  निर्माण ( Formation of Gajkesari Rajyog) होता है और   ये योग  केंद्र और त्रिकोण भाव में निर्मित हो तो अत्यंत ही शुभकारी योग बनता है जातक व् व्यक्ति प्रतिष्ठावान , समृद्धशाली और उच्च पद पर  आसीन होता है।  

जन्म कुंडली में केंद्र और त्रिकोण  भाव को जानने के लिए आप लिंक पर क्लिक करें। 

जन्म कुंडली में केंद्र और त्रिकोण भाव 

गजकेसरी योग अत्यंत शुभ योग होता है आपको क्या लगता है कि ये योग आसानी से कुंडली में बनाते है ऐसा नहीं है यहाँ तक कि गुरु और चंद्र एक साथ आपकी जन्म कुंडली में हो तो भी ये योग सही और सम्पूर्ण  से नहीं बनता है।

सामनायतः ऐसा होता है कि आप की जन्म कुंडली में गुरु + चन्द्रमा की एक साथ युति किसी भी भाव में हो तो ये कह दिया जाता है कि आपके कुंडली में गजकेसरी नामक राजयोग है और आप अपने बहुत अच्छे समय का इंतजार करते रह जाते है और निराश हो जाते है।  आइये  जानते है कि 

क्या -क्या कारण है जब गजकेसरी राजयोग का निर्माण होता है ?

kya kya kaaran hai jab Gajkesari hog ka nirman nahi hota hai ? 

  • सबसे पहला कारण आपके कुंडली का कारक ग्रह होना चाहिए।  
  • देव गुरु बृहस्पति और चन्द्रमा अच्छे भाव में होने चाहिए  6 -8 -12   भाव में नहीं होना चाहिए। 
  • देवगुरु बृहस्पति  चन्द्रमा डिग्री अच्छी होनी चाहिए जैसे  ग्रहो  डिग्री 9 -10 -11 से 18 -19 -20   मध्य होनी चाहिए। 
  • दोनों ही ग्रह  सूर्य से अस्त नहीं होने चाहिए। 

कुंडली के कारक ग्रह को जानने के लिए  नीचे लिंक पर क्लिक करें। 

1 से 12 तक के लग्न में कारक ,अकारक ,सम और भाग्योदय ग्रह - ज्योतिष में क्यों जानना जरुरी है लग्न के अनुसार -कारक ग्रह , अकारक ग्रह और सम ग्रह

1- 12 तक  के भाव में गजकेसरी योग ( गुरु + चन्द्रमा )  का फल

1-12 tak ke bhav me Gajkesari Yog ( Guru +chandrama) ka phal 

1)  लग्न या प्रथम भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : -

  • व्यक्ति दयालु  और सौम्य स्वाभाव का होगा। लोगो के प्रति स्वाभाव और  नजरिया सहानभूतिपूर्ण  रहेगा। 
  •  धार्मिक प्रवृति होगी लोग उनका अनुसरण करेंगे ।  
  • व्यक्ति ज्ञानवान होगा और साथ ही साथ बुद्धिमान  भी होगा। 
  • व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त करता है।  व्यक्ति के जीवन में संतान का सुख उत्तम होता है। 
  • वैवाहिक जीवन सुखद रहता है।  
  • भाग्य का साथ उनको प्राप्त होता है।
2 )  द्वतीये भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : -

  • व्यक्ति को कुटुंब परिवार में मान सामान और प्रतिष्ठा  प्राप्त होगा। 
  • व्यक्ति की वाणी ओजपूर्ण होगी और धन  की कमी नहीं  होती है । 
  • जातक नौकरी हो या व्यवसाय दोनों ही क्षत्रों में तरक्की और उन्नति प्राप्त करेगा और उच्च पद हासिल करेगा। 
३) तृतीये भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : -
  • जातक ज्ञानवान होगा बुद्धिमान होगा और सोच समझकर कार्य करने वाला होगा।  
  • धार्मिक प्रवृति का होगा ,लोग उनका अनुसरण करेंगे।  
  • जातक अपने भाई-बहन के लिए भी सौभाग्यपूर्ण होगा।  
  • जातक की सामाजिक दायरा उच्च कोटि का होगा और समाज में उनको मान -सामान प्राप्त होगा। 
4 ) चौथा भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : -
  • जातक के पास भौतिक सुख की कमी नहीं होगी उनके पास उच्च कोटि का भूमि -भवन और वहां का सुख होगा। 
  • माता का स्नेह हमेशा प्राप्त होता है।  
  • आपको जनता का साथ प्राप्त होगा। 
  • ससुराल से अच्छे सम्बन्ध रहेंगे वहां उनको मान -सम्मान प्राप्त होगा। 
  • जातक कोई  गुप्त विद्या ( aucult science ), रिसर्च  में जा सकता है। 
  • जातक अपने कार्य क्षत्रे में मान -सम्मान प्राप्त करेगा और उच्च पद प्राप्त करेगा और सफलतापूर्ण व्यवसाय में उन्नति करेगा। 
  • जातक यदि विदेश से जुड़कर कार्य करेंगे तो  लाभ होंगे।
  • 12वं भाव मोक्ष का भी होता है अतः जातक को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति भी हो सकती है और जातक साधु संत हो सकता है ।
5) पंचम भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर:-
  • जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा। संतान उत्तम कोटि के होते है और संतान पक्ष से हमें खुश रहते है। संतान सुख उत्तम रहता है। 
  • जातक को आकस्मिक धन  लाभ की संभावना होती है ।
  • भाग्य का हमेशा उसको साथ प्राप्त होता है और वो भाग्यवान होते है । 
  • धर्म के प्रति उनकी आस्था होती है । 
  • धार्मिक यात्रा करते है  और अनुष्ठान करवाते है । 
  • आय का अच्छा स्त्रोत होता है आपकी आर्थिक स्थिति उत्तम होती है । 
  • आपका सामाजिक कार्य से जुड़े हो सकते है ।
6) छटाभाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर:-

छटा भाव में गजकेसरी योग का निर्माण नहीं होता है । 

7) सप्तम भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : -
  • जातक ज्ञानवान , समझदार होगा । लोग उनका अनुसरण करेंगे । 
  • दयालु प्रवृति का होगा और सब से स्नेह की भावना रखने वाला होगा । 
  • जातक का जीवन साथी भी समझदार और बुद्धिमान होगा ।
  • वैवाहिक सुख उत्तम रहेगा ।
  • जातक यदि विदेश से जुडकर कोई कार्य करें तो हमें लाभ प्राप्त करेंगे ।
  • जातक सोच समझ कर अपने धन का इस्तमाल करेगा ।
8) अष्टम भाव में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : -
अष्टम भाव में गजकेसरी योग का निर्माण नहीं होता है।  

9 ) नावं भाव  में गजकेसरी योग का निर्माण होने पर : 
  • जातक को भाग्य का साथ हमेशा मिलेगा और आप भाग्यशाली व्यक्ति की श्रेणी में आते है।  
  • आपमें  धार्मिक प्रवृति प्रचुर मात्रा में है आप की रूचि धार्मिक यात्रा करने और धार्मिक अनुष्ठान करने में होती है।  
  • आप एक अच्छे शिक्षक , प्रोफेसर होते है।  
  • आप दयालु , ज्ञानवान और बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति है।  
  • लोग आपका  अनुसरण करना और आपको सुनना पसंद करते है। 
  • आपके अपने छोटे भाई -बहन से अच्छे सम्बंद होते है और आप उनके लिए भी सौभाग्यशाली होते है।  

10 ) दशम भाव में गजकेसरी राजयोग का निर्माण होने पर : -

  • आप एक सफल व्यापारी होते है आपका व्यवसाय दिन दुगुनी तरक्की करता है।  
  • यदि आप नौकरी करते है तो आप हमेश उच्च पद पर होंगे या प्राप्त करेंगे। 
  • आपको आपके कार्य क्षत्रे में मान -सम्मान की प्राप्ति होगी।  
  • धन सम्पति से आप परिपूर्ण रहेंगें।  
  • आपकी वाणी ओजपूर्ण होगी। 
  • आपका आपके कुटुंब परिवार का साथ भी मिलेगा और मान -सम्मान भी मिलेगा। 
  • भौतिक सुखो की प्राप्ति होगी भूमि भवन -वाहन का सुख उत्तम कोटि का रहेगा। 
  • जनता का साथ प्राप्त होगा। 
  • और साथ ही साथ माता का भी उत्तम सुख प्राप्त होगा।  
11 ) एकादश भाव में गजकेसरी राजयोग का निर्माण होने पर : -

  • व्यक्ति के एक से अधिक आय के स्त्रोत होते है। 
  • व्यक्ति का सामाजिक दायरा बड़ा होता है अर्थात आप एक समाज सेवक होंगे आप एक सम्मानित और प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।  
  • अपके  भाई -बहन से  सम्बन्ध अच्छा  रहेगा आपके भाई -बहन आपका अनुसरण करेंगे।  
  • उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे और संतान सुख उत्तम रहता है।  
  • वैवाहिक जीवन उत्तम होता है। 
12  )बारवां  भाव में गजकेसरी राजयोग का निर्माण होने पर : -

बारवां  भाव में गजकेसरी राजयोग का निर्माण नहीं होता है।  

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है

My Email is santwanadutta1974@gmail.com






एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ