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मेष राशि में सूर्य का गोचर 14 अप्रैल से 15 मई तक होगा :-राशियों पर ( मेष से मीन राशियों पर ) इसका प्रभाव - शुभ व् अशुभ ?

मेष राशि में सूर्य का गोचर  14 अप्रैल  से 15 मई  तक होगा :-राशियों पर ( मेष से मीन राशियों पर ) इसका प्रभाव - शुभ व् अशुभ ? 

प्रिय पाठक 

नमस्कार। 



 मैं आचार्या  सांत्वना  दत्ता आज फिर से छोटे -छोटे  उपायों द्वारा जानकारी व् समस्या के समाधान  की चर्चा करुँगी  । आज चर्चा करुँगी :-


1) संक्रांति क्या है ? (Sankranti Kya Hai) 

2) मेष संक्रांति होती क्या है ?  Mesh  Shankranti hoti  kya hai 

3 ) मेष  संक्रांति के  दिन पूजा करने की विधि क्या है ? Mesh Sankranti ke din pooja kaise ki jati hai 

4  ) सूर्य देव का मेष राशि मे गोचर से भिन्न भिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा  -शुभ व् अशुभ ? Surya dev ka mesh rashi me gochar se rashi pr prabhav - shub  v ashub 

                                                                      

संक्रांति क्या है ?

सूर्य का एक राशि से दूसरे राशि मे भ्रमण को संक्रांति कहते है और साल में 12 संक्रांति आती है जब सूर्य देव मेष राशि से मीन राशि में भ्रमण करते है ।

मेष संक्रांति क्या है ?

सूर्य देव का मीन राशि से  मेष राशि मे जाने को ही मेष संक्रांति कहते है और इस साल 14 अप्रैल  से  15 मई सुबह 8  बजे के बाद  को सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करेंगे जिसको मेष संक्रांति कहेंगे। 
मेष राशि  सूर्य की उच्च राशि है।  


मेष  संक्रांति के  दिन पूजा करने की विधि

मेष संक्रांति को सूर्य देव की पूजा और उपासना करने की विशेष महत्व है 
उस दिन सूर्य देव की पूजा , दान से आप अपने कुंडली मे यदि सूर्य का अशुभ प्रभाव है तो उसको कम कर सकते है।  अपने जीवन मे मान -समान-प्रतिष्ठा को  प्राप्त कर सकते है। काम मे आ रहे रुकावट को दूर कर सकते है ।
  • सूर्य संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की प्रथा है परंतु यदि ये संभव न हो तो घर मे स्नान करने के जल में गंगा जल डाल कर स्नान करें ।
  • सूर्य देव को अर्द्ध दे । जल में आप रोली , चावल और लाल पुष्प डाले और जल डालने के लिए तांबे का लोटा का प्रयोग करें ।
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11 बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
सूर्य देव का मेष  राशि( अपने उच्च ) में  गोचर से  भिन्न भिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा  -शुभ व् अशुभ ?


मेष  राशि का अदिपत्य  मंगल देव  के पास है । और सूर्य और मंगल  एक दूसरे के मित्र ग्रह है । 
शास्त्रों के अनुसार यदि सार्वजिक ग्रहो का फल यदि करना हो या जानना हो तो वो चंद्र राशि से की जाती है अतः सूर्य का गोचर आप अपनी चन्द्र राशि से ही देखें ।  उनके लिए भी लाभप्रद है जिसका  नाम चंद्र राशि के अनुसार है।  

नोट :- लाभ आपको तभी प्राप्त होगा जब सूर्य आपके जन्म कुंडली में 6वें , 8वें और 12वें में न हो और 7 नंबर राशि यानि तुला राशि में न हो तो सूर्य देव का मेष  राशि में गोचर का उत्तम प्रभाव व् फल प्राप्त होगा। 


मेष राशि :-
मेष राशि के जातक की कुंडली मे सूर्य पंचम भाव का स्वामी होकर लग्न  भाव में होंगे। 
  • आपका मान -सम्मान बढ़ेगा।  आप ऊर्जावान महसूस करेंगे 
  • आप में थोड़ा अहंकार व् आक्रमकता आ सकता है अतः वाद -विवाद से बचें चाहें वो कार्यक्षेत्र हो या घर परिवार।  
  • पिता से संबंध अच्छे रहेंगे। 
  • व्यापार और नौकरी दोनों में ही अच्छे लाभ के योग है। 
  • दैनिक रोजकार में बढ़ोतरी की संभावना है।  
      अगर आपकी की कुंडली में सूर्य 6 -8 -12 भाव में हो या 7 नंबर की राशि में हो (सूर्य की नीच राशि में ) तो आपको ये उपाय करने होंगे अन्यथा आपको उपाय करने की जरुरत नहीं है। 

    उपाय:- 
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11 बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये। 

वृषभ राशि :- 

वृषभ राशि के लिए सूर्य चतुर्थ भाव का स्वामी होकर 12 वें भाव यानी में होंगे।  

  •  खर्चा बढ़ेगा।  आपको अपने धन को नियंत्रित करना है और आप अपने धन को इन्वेस्ट करें।  
  • विदेश से जुड़कर यदि या विदेश में काम कर रहे है तो लाभ प्राप्त होगा। 
  • अपने स्वास्थ का ध्यान दे।  खान -पान पर ध्यान दे। पाचन से सम्बंधित परेशानी हो सकती है। 
  • किसी भी प्रकार के ऋण लेने से बचें और अपने कार्य क्षेत्र में अपने विरोधी से बचें। 
उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • भोजन में गुड़ खाये।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
मिथुन राशि:-

मिथुन राशि के जातक के लिए सूर्य  पराक्रम भाव के स्वामी होकर एकादश  में होंगे । सूर्य अपने उच्च  राशि में है :-
  • आय के एक से अधिक स्त्रोत होंगे आपकी को इच्छा पूरी होगी अटका या रुका  काम पूरा होगा।  
  • सामाजिक दायरा बढ़ेगा और मित्रों का साथ प्राप्त होगा। 
  • यदि आप छोटी - मोटी व्यापारिक यात्रा रहेंगी परन्तु संघर्ष के बाद आपको सफलता मिलेंगे।  
    अगर आपकी की कुंडली में सूर्य 6 -8 -12 भाव में हो या 7 नंबर की राशि में हो (सूर्य की नीच राशि में ) तो आपको ये उपाय करने होंगे अन्यथा आपको उपाय करने की जरुरत नहीं है। 

उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11 बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • अपने माथे पर कुमकुम का तिलक लगाए।   
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
कर्क राशि:-

कर्क राशि के जातक के कुंडली मे सूर्य द्वतीये भाव के स्वामी होकर कर्म  भाव में होगें  :- 
  • आपका नौकरी  हो या व्यवसाय  आपको  तरक्की और उन्नति व् लाभ प्राप्त होगा। 
  • यदि आप किसी सरकारी काम से जुड़े तो लाभ प्राप्त होगा। 
  • अपने माता के स्वास्थ का ध्यान रखिये।  
  •  अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और अपने कुटुंब परिवार  संबंधों को संभालें। 
उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11 बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • रविवार को नमक न खाये। 
  • सूर्य देव  दान की वास्तु जैसे गेहूं , गुड़ , ताम्बा का दान रविवार को करें।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
सिंह राशि:-

सिंह राशि के जातक के लिए सूर्य लग्नेश होकर भाग्य भाव मे जाना  बहुत अच्छा कहा जायेगा ।
  • जातक को भाग्य का साथ प्राप्त होगा और मान -सम्मान की प्राप्ति होगी।  
  • आपके पिता के साथ अच्छे संबंध रहेगा।  धार्मिक अनुष्ठान करवा सकते है। 
  • छोटी -मोटी व्यापारिक यात्रा से लाभ प्राप्त होगा और मेहनत अनुरूप फल  होगी। 
    अगर आपकी की कुंडली में सूर्य 6 -8 -12 भाव में हो या 7 नंबर की राशि में हो (सूर्य की नीच राशि ) तो आपको ये उपाय करने होंगे अन्यथा आपको उपाय करने की जरुरत नहीं है। 

उपाय:- 
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • लाल रंग आपके लिए लाभकारी रहेगा। 

कन्या राशि:- 

कन्या राशि के जातक के लिए सूर्य 12वें भाव का स्वामी होकर अष्टम भाव में होंगे । जो अच्छा बिलकुल नहीं। 
  • फजूल का खर्चा बढेगा । अपने ख़र्चे पर नियंत्रण रखें। 
  • कार्यो में टेंशन , परेशानी और रुकावट रहेंगी।  
  • आपका ससुराल पक्ष से अच्छे सम्बन्ध रहेंगे किसी आयोजन में भी जा सकते है। 
  • अपने स्वास्थ का ध्यान रखें।  योग -आसान कीजिये।  खान -पान पर ध्यान दीजिये।  
उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • रविवार को नमक न खाये। 
  • सूर्य देव  दान की वास्तु जैसे गेहूं , गुड़ , ताम्बा का दान रविवार को करें।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
तुला राशि:-
तुला राशि के कुंडली मे सूर्य 11वें भाव का स्वामी होकर 7 वें भाव होंगे। 
  • आपने जीवन साथ को महत्त्व दे और उनका साथ दे।  
  • अहंकार की व् आक्रमकता की अधिकता रहेगी अतः यदि आप पार्टनरशिप में व्यवसाय कर रहे है तो बहुत ध्यान रखने की जरूरत है। 
  • अपने स्वास्थ का ध्यान रखें।  योग-आसान करें , वाकिंग करें।  फ़ास्ट फ़ूड खाने से बचें।  
उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • रविवार को नमक न खाये। 
  • सूर्य देव  दान की वास्तु जैसे गेहूं , गुड़ , ताम्बा का दान रविवार को करें।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
बृश्चिक राशि :-

वृश्चिक राशि वालो के कुंडली मे सूर्य देव कर्म भाव का मालिक होकर छठा भाव में। 

  • छात्रों के लिए उत्तम समय यदि वो प्रतियोगिता परीक्षा दे रहे है तो सफलता के योग। 
  • किसी भी प्रकार के रोग या  स्वास्थ की परेशानी थी तो आपको रहत मिलेगा। 
  • कार्य क्षेत्र में सफलता के योग है और आप यदि जॉब बदलना चाहते है तो प्रयास कर सकते है। 
  • शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे।  
    अगर आपकी की कुंडली में सूर्य 6 -8 -12 भाव में हो या 7 नंबर की राशि में हो (सूर्य की नीच राशि  ) तो आपको ये उपाय करने होंगे अन्यथा आपको उपाय करने की जरुरत नहीं है। 

उपाय:- 
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
धनु राशि :-

धनु राशि के जातक के कुंडली मे सूर्य भाग्येश होकर पंचम  भाव में  होंगे । त्रिकोण का  त्रिकोण का संबंध ।उत्तम योग ।
  • जातक को आकस्मिक धन लाभ का योग है । 
  • छात्रों को शिक्षा का लाभ मिलेगा और एकाग्रता अच्छी रहेंगी।
  • संतान पक्ष से अच्छे समाचार प्राप्त होगा । 
  • भाग्य का साथ मिलेगा । 
  • पिता से अच्छे संबंध रहेंगें और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
  • धार्मिक अनुष्ठान का योग बनेंगे। 
    अगर आपकी की कुंडली में सूर्य 6 -8 -12 भाव में हो या 7 नंबर की राशि में हो (सूर्य की नीच राशि  ) तो आपको ये उपाय करने होंगे अन्यथा आपको उपाय करने की जरुरत नहीं है। 

      उपाय : -
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • लाल रंग आपके लिए लाभकारी रहेगा। 
मकर राशि:- 

मकर राशि के जातक की कुंडली मे सूर्य अष्टम भाव का स्वामी होकर चतुर्थ भाव मे होना अच्छा नहीं  माना जाएगा ।
  • कार्यों में बाधा , टेंशन और परेशानी का योग रहेगा ।
  • अपने ससुराल का ध्यान रखना है । 
  • अभी किसी भी प्रकार से प्रोपेर्टी में निवेश न करें ।

उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • रविवार को नमक न खाये। 
  • सूर्य देव  दान की वास्तु जैसे गेहूं , गुड़ , ताम्बा का दान रविवार को करें।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
कुंभ राशि:-

कुंभ राशि के जातक की कुंडली मे सप्तमेश होकर पराक्रम  भाव में होने से

  • अपने जीवन साथी का ध्यान रखें।  वाद-विवाद से बचें अपने कार्य क्षेत्र में और अपने जीवन साथी से भी।
  • फिजूल का भाग दौड़ , व्यर्थ की यात्रा का योग होगा ।
  • किसी भी प्रकार के नए पार्टनरशिप से बचे ।
  • अपने छोटे-भाई बहन से अच्छा संबंध रखिये । 
उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • रविवार को नमक न खाये। 
  • सूर्य देव  दान की वास्तु जैसे गेहूं , गुड़ , ताम्बा का दान रविवार को करें।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
मीन राशि :-

मीन राशि वाले जातक के लिए  षष्ठम भाव का स्वामी होकर सूर्य द्वतीय भाव  में होने पर
  • कर्ज लेने आए बचें। शत्रु प्रभावी रहेंगें।
  • स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखे । 
  • अपने वाणी पर नियंत्रण रखें । कुटुंब परिवार से अपने अच्छा संबंध बनाए रखें।
उपाय :-
  • जल डालते समय आप 27 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते है या सूर्य देव के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप 108 बार या कम से कम 11बार  करना चाहिए । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर लाभ देता है ।
  • गाय को हरा चारा खिलाये ।
  • रविवार को नमक न खाये। 
  • सूर्य देव  दान की वास्तु जैसे गेहूं , गुड़ , ताम्बा का दान रविवार को करें।  
  • पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद ले और उनका आदर करें। 
आप सब गुरु का अपनी मीन राशि में गोचर भी जरूर पढ़े : 




उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद
Happy Beginning...
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