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कुंडली में ग्रहों की दृस्टि का प्रभाव व् फल

हमारे कुंडली में  ग्रहों के दृस्टि का क्या महत्व है ?

प्रिय पाठक 

नमस्कार 



मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :- 

आज आप लोगो ग्रहों की दृष्टि के बारे में जानेंगे .  हमारे जीवन में ग्रहों के दृस्टि का भी  असर व् प्रभाव  होता  है।  इस पोस्ट में आप कुंडली में ग्रहों की दृस्टि के बारे में जानेगें। 

जैसा कि हम सब जानते है की  सात ग्रह (7) होते है और दो (2) ग्रह राहु और केतु , दोनो को छाया ग्रह कहते है ।
सूर्य ,चंद्रमा , बुध, शुक्र को सातवीं दृष्टि (पूर्ण दृस्टि ) होती है मतलब ये अपने से सामने सप्तम भाव को देखते है जो  180 डिग्री की दूरी में होते है ।


मंगल देव , गुरु देव ,शनि देव , राहु देव और केतु देव को सातवीं दृष्टि के अलावे और दो दृष्टियां होती है ।

सबसे पहले  ये जानना जरुरी है कि आपके कुंडली के  लिए ग्रह कारक है , अकारक  है या सम है। यदि कोई ग्रह आपके कुंडली  कारक है  या शुभ है तो उनकी दृस्टि भी शुभ रहेंगी।  

सबसे पहले  हम सूर्य देव , चंद्र देव , बुध  शुक्र देव की बात करेंगे। 


 सूर्य देव की दृस्टि ( Surya Dev Ki Drishti ):-

सूर्य देव की सातवीं दृस्टि  होती है  अपने से ठीक सामने वाले घर को देखते है।  सूर्य देव को ग्रहो में राजा माना गया है और उनको भी क्रूर ग्रह की संज्ञा प्राप्त है अतः उनकी दृस्टि अपने कारकत्व के अनुसार फल देते है। मतलब सूर्य देव यदि आपके कुंडली में अच्छे है यानि उच्च के , स्वराशि , मित्र राशि और कारक है तो हमेशा अच्छे फल देते नजर आयेगें।  परन्तु अपने स्वाभाव के अनुसार भी इनका फल होता है जैसे यदि ये प्रथम भाव में हो तो राजा जैसे गुण होंगें , व्यक्तित्व के धनी होंगे परन्तु स्वाभिमानी होते है और अहंकारी होते है । 

चंद्र देव की दृस्टि  ( Chandra Dev Ki Drishti ): -

उनकी दृस्टि शुभ होती है यदि चंद्र देव आपकी कुंडली में  कारक है,  मित्र राशि है ,अच्छे भाव में है और  उच्च के है तो अच्छे फल  देंगें। 

 चंद्र देव के साथ और  एक शर्त होती  है कि  शुक्ल पक्ष सप्तमी से कृष्णा पक्ष सप्तमी तक शुभ होता है परन्तु कृष्णा  पक्ष अष्टमी से शुक्ल पक्ष सप्तमी तक शुभ नहीं होते है इनको छीन चन्द्रमा कहा जाता है।


बुध देव की दृस्टि ( Budh  Dev Ki Drishti )

बुध देव की दृस्टि शुभ होती है परन्तु  बुध देव जिस ग्रह के साथ होते है वैसा ही  फल देते  है जैसे शुभ ग्रह  के साथ शुभ और पाप ग्रह के साथ अशुभ फल देते है।  परन्तु बुध देव  यदि अपने मित्र राशि में है , स्वराशि में है तो अच्छे फल देते है और उनकी दृष्टि भी अच्छी  होती है। 

शुक्र देव की दृस्टि  ( Sukra  Dev Ki Drishti ):- 

शुक्र देव को शुभ ग्रह माना जाता है और उनकी दृस्टि भी शुभ होती है।  शुक्र देव अपने मित्र राशि , उच्च राशि  (मीन की राशि ) , स्वराशि में अच्छे  फल देतें है और उनकी दृस्टि शुभ होती है।  

 


ग्रहो की दृस्टि - सूर्य देव ,चंद्र देव , बुध देव और शुक्र देव 


शनि देव  की दृस्टि( Shani   Dev Ki Drishti ):-


शनि देव को तीसरी, सातवीं और  दशमी  दृष्टि होती  है । शनि जहाँ बैठते है इस भाव  से जुड़े हमेशा अच्छा फल देते है और यदि शनि आपकी कुंडली के लिए कारक है , उच्च के है या स्वराशि के है तो हमेशा अच्छा फल देंगे यदि वो अच्छे  भाव में  हो।  

हाँ यदि शनि नीच के हो  शत्रु  राशि तो शनि कभी भी अच्छे फल देते नजर नहीं आएंगे।  

पर कोई भी ग्रह अपने कारकत्व के  अनुसार काम करता है जैसे  कि शनि देरी (delay ) के  कारक है तो शनि की  दृस्टि यदि सप्तम भाव पर हो तो शादी में देरी की संभावना होती है और यदि  शनि की दृष्टि पंचम भाव पर हो तो संतान प्राप्ति में देरी होती है।  

नोट : -कुछ ज्योतिषो का मानना है की शनि की तीसरी दृस्टि शुभ नहीं होती है परन्तु यदि आपके कुंडली के लिये शनि कारक  है , उच्च के है ,स्वराशि के है तो वो खुद और उनकी दृस्टि शुभ ही होगी। 



शनि देव की  दृष्टि 


 देव गुरु बृहस्पति  की दृस्टि ( Dev Guru Brihaspati Ki Drishti  ) :-

 देव गुरु को सबसे शुभ ग्रह माना  गया है और उनकी दृस्टि अमृत सामान मानी गयी है। 
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देव गुरु बृहस्पति को पांचवी , सातवीं और नवीं दृष्टि है ।

राहु और केतु देव को भी देव गुरु बृहस्पति की तरह पंचम, सप्तम और नवम दृष्टि है  . 

कोई भी ग्रह यदि आपके कुंडली में अकारक है , शत्रु क्षेत्री है या नीच के है और यदि उनपर शुभ गुरु की दृस्टि पड़ जाया तो देव गुरु बृहस्पति ग्रहों के ख़राब फल देने की तीव्रता को कम करते है।  

नोट : -देव गुरु बृहस्पति जीव कारक ग्रह  माना गया है मतलब जीवन देने वाला ग्रह। 

राहु -केतु  की दृस्टि ( Rahu -Ketu Dev Ki Dristi ):-
राहु और केतु को  बृहस्पति की तरह पांचवी ,सातवीं और नवीं दृस्टि होती है। 

राहु -केतु जिस घर या भाव में बैठते है  उसके अनुसार काम करते है। राहु -केतु अपने मित्र राशि में हो या मित्र राशि के साथ  तो अच्छे फल देते और उनकी दृस्टि फल भी अच्छे होते है। 
 
नोट: राहु-केतु जिस मित्र राशि  में हो उस राशि का उपस्थिति भी कुंडली में अच्छे भाव में होनी चाहिए। 
परन्तु यदि ये शत्रु राशि एक साथ हो या शत्रु क्षेत्री हो तो उनकी दृस्टि अच्छी नहीं होती है।  

देव गुरु बृहस्पति , राहु-केतु की दृष्टि 



मंगल देव की दृस्टि :-Mangal  Dev Ki Drishti

मंगल देव को चौथी, सातवीं और आठवीं दृष्टि है ।

जैसा की हम सब जानते है की मंगल देव को क्रूर ग्रह माना जाता है तो यदि मंगल देव आपकी कुंडली में शुभ है, कारक है,   मित्र राशि है अच्छे भाव में है , उच्च के है तो अच्छे फल  देंगें परन्तु  उनकी  दृस्टि अपने कारकत्व के अनुसार भी फल देती है। 
मान लीजिये मंगल देव दृस्टि यदि दूसरे भाव पर है तो  आपको अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की सालह दी जाती है।  

मंगल देव की दृस्टि 



ग्रहों की दृष्टि ( Grahon Ki Dristi ) नीचे दिए गए  टेबल से समझे 

 ग्रह 

 दृष्टि व् दृष्टियाँ 


 सूर्य 

 सातवीं (7 )

 चंद्र 

 सातवीं (7 )

 मंगल 

 चौथी (4 ), सातवीं (7 ), आठवीं (8 )

 बुध     

 सातवीं (7 )

 गुरु , राहु ,-केतु 

 पांचवी (5 ) , सातवीं (7 ), नवमीं (9 )

 शुक्र 

 सातवीं (7 )

 शनि 

 तीसरी (3 ) ,सातवीं (7 ), दसवीं (10 ) 




उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद
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