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गणेश चतुर्थी का महत्त्व - क्यों करना चाहिए बाप्पा की पूजा। गणेश चतुर्थी करने से ज्योतिष लाभ क्या मिलता है?

 गणेश चतुर्थी का महत्त्व - क्यों करना चाहिए बाप्पा की पूजा। 

प्रिय पाठक ,

नमस्कार। 

आज फिर से अच्छे विषय के बारे में चर्चा करेंगे।  आज में चर्चा करुँगी गणेश चतुर्थी व्रत की। इस दिन गणपति बाप्पा की पूजा आरधना और व्रत की जाती है। 

 गणेश चतुर्थी:- संकष्टी चतुर्थी
 

गणेश  चतुर्थी (Ganesh Chaturthi ) महीने में 2 बार आती है शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी( Vinayak Chaturthi ) कहते है और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी ( Sankashti  chaturthi ) कहते है।  

17 जून आज कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी है मान्यता है की ये व्रत सूर्योदय से शुरू  और शाम चंद्र दर्शन होने के बाद ही समाप्त होता है।  आज चंद्रोदय 10 . 30 मिनट पर होगा।  

संकष्टी  चतुर्थी का महत्त्व  क्या है ? 

  • विघ्न हरता है संकटों से मुक्ति दिलाते है अतः इनका पूजन और व्रत से व्यक्ति के विघ्न , कष्टों और संकटों  मिटते है ।  
  • सभी प्रकार की मनोकामना और इच्छा पूर्ति के लिए ये व्रत किया जाता है।  
  • इस व्रत को करने से सभी प्रकार के दुःख दूर होते  है। 
  • व्यक्ति को जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।  
  • जातक को भौतिक सुख जैसे घर ,गाड़ी , धन-दौलत की प्राप्ति होती है।

संकष्टी चतुर्थी का पूजा- पाठ  करने के नियम और विधान :-

  • इस दिन व्रत कर सकते है तो अति उत्तम होता है।  
  • प्रथम स्नान आदि से निवृत होकर आप अपने पूजा घर को साफ़ -सुथरा कर लीजिये। 
  • गणपति के छोटे से मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराये और वस्त्र पहनाये। 
  • फिर मंदिर में घी का दीया  , धुप और अगरबत्ती प्रज्वलित करें।  
  • बाप्पा को सिन्दूर लगाए।  
  • गणपति बाप्पा को पुष्प और धुर्वा घास अर्पित करें। 
  • भोग में बाप्पा के पसंद के  लड्डू या मोदक चढ़ाये।  
  • गणपति बाप्पा के मंत्रो का जाप कीजिये , गणेश चालीसा का पाठ करें। 
  • अंत में आरती जरूर करें। 

नोट :- गणपति को तुलसी दल नहीं चढ़ता है और न ही आप तुलसी ग्रहण करें। 

ये व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है अतः चन्द्रमा को देख कर  चन्द्रमा को अर्ध दे।  एक लोटे में जल में दूध , शक्कर, सफ़ेद फूल और अक्षत मिलाकर चन्द्रमा का अर्ध देना चाहिए।  कम से कम जल में दूध जरूर मिला लीजिये।   

 गणेश वंदना :

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।  निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येषु सर्वदा।  

गजानन भूत गणादि सेवितं , कपिल जम्बू फल चारु भक्षणं।  उमासुतं शोक विनाश कारकं ,नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम।  

संकष्टी चतुर्थी के दिन किस से मंत्र का जाप करना चाहिए ?

संकष्टी चतुर्थी के दिन 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप आप 108 बार आप कर सकते है । 

 या फिर आप गणपति के गायत्री मंत्रो का उच्चारण कर सकते है :-

 एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।

गणेश  चतुर्थी व्रत  कथा :-

 गणेश चतुर्थी को लेकर एक पौराणिक कथा है कि  एक बार सभी देवता अपने किसी विपदा से घिरे थे  और सहायता मांगने के लिए शिव भगवान् के पास पहुंचे।  

इस समय भगवान् शिव जी के साथ- साथ गणपति और कार्तिके भी वहाँ पर उपस्थ्ति थे। 

 शिव जी ने देवता के इस विपदा का समाधान के लिए दोनों भाइयों को पूछा कि  कौन देवताओ की समस्या का समाधान कर सकता है तो दोनों ही भाई तैयार हो गए और दोनों में ये बहस छिड़ गयी कि कौन सबसे सक्षम है ? 

तब शिव भगवान् ने कहा कि  ठीक  है जो भी इस पृथवी का चक्कर लगा कर या परिक्रमा कर पहले आएगा वो समर्थवान और ज्यादा शक्तिशाली होगा।  

कार्तिके तुरंत अपने  वाहन मोर के साथ  पृथवी  के परिक्रमा  के लिए निकल गए और गणपति वहां पर ही बैठे रहे। 

फिर गणपति ने अपने वाहन मूषक पर बैठ कर शिवजी और पार्वती माँ के चारो और 7 बार  परिक्रम कर डाला।  

जब कार्तिके वापस आये तो उन्होंने देखा गणपति तो पहले ही पहुँच चुके है तो उनको बहुत आश्चर्य भी हुआ और सभी ने गणपति से पृथवी की परिक्रम न कर सिर्फ शिव भगवान् और माता पार्वती की परिक्रम के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि माता -पिता के चरणों में समस्त लोक है ,  इनके ही चरणों में सारा संसार है अतः मैंने इनकी ही परिक्रमा किया है। 

उनकी बात सुनकर शिवजी और पार्वती माँ प्रसन्न हुई और उनकी तीव्र बुद्धि और कौसल के कारण शिव जी ने गणपति बाप्पा को देवता के संकट दूर करने को कहा और आशीर्वाद दिया   जो भी भक्त तुम्हारा चतुर्थी के दिन तुम्हारा पूजन और भक्ति करेगा उसके सभी प्रकार के संकट दूर होंगें। व्यक्ति को सभी प्रकार के भौतिक सुखोंको की प्राप्ति होंगे।  सभी प्रकार से सुख - समृद्धि उनके जीवन में प्राप्त होगा। 

गणेश जी की आरती :- 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा , माता जी की पार्वती पिता महादेवा। 

एक दन्त दयावन्त चार भुजा धारी , माथे पर तिलक सोहे , मूसे की सवारी।  

पान चढ़े , फूल चढ़े ,  और चढ़े मेवा। लडुवन के भोग लगे , संत करे सेवा।  

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा , माता जी की पार्वती पिता महादेवा।

अन्धान  को आँख देते कोढ़िन को काया , बांझन को पुत्र देते , निर्धन को  माया। 

लडुवन  के भोग लागे ,संत करे सेवा। हार चढ़े , फूल चढ़े और चढ़े मेवा। 

दीनन के लाज रखो शम्भु सूत वारी।  कामना को पूरा करो जग बलिहारी 

सुर -श्याम शरण आये सफल कीजिये सेवा। 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा , माता जी की पार्वती पिता महादेवा।

संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या खाना चाहिए :-

संकष्टी चतुर्थी के दिन सूर्योदय से चंद्र उदय तक उपवास रखा जाता है उसके बाद भी आप यानि चन्द्रमा के दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण कर सकते है।  

  • आप भोजन में मिठाई और फल आदि ग्रहण कर सकते है। 
  • आप बिना नमक या सेंधा नमक का भोजन ग्रहण है खाने में साबूदाने की खिचड़ी , मूँगफली और आलू से बानी  चीजें खा सकते है। 

संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या नहीं खाना चाहिए :-

  • संकष्टी चतुर्थी के दिन आपको मांस - मदिरा का सेवन न करें। 
  • संकष्टी चतुर्थी के दिन आपको के प्याज -लहसून का प्रयोग न करें। 
  • संकष्टी चतुर्थी के दिन आपको गाजर , चुकंदर और कटहल न खाये।  

 गणेश चतुर्थी करने से ज्योतिष लाभ क्या मिलता  है?

गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रम को अर्ध देकर ही व्रत का खोला जाता है  और जल में दूध और अक्षत देकर जल  अर्पित किया जाता है।  

जिस भी जातक व् व्यक्ति का चन्द्रमा कुंडली में पीड़ित होता है या कमजोर होता  गणेश चतुर्थी का व्रत फलदायी होता है।  

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी  लगी होगी।  

धन्यबाद।  

The Happy Beginning

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