1) कौन सा भाव भाग्य भाव कहलाता है ? 2) कब होगा हमारा भाग्योदय ? 3) कौन सा ग्रह हमारे भाग्योदय के लिए जिम्मेदार है ?4) कौन सा उपाय करें जिससे भाग्य का साथ प्राप्त हो?
प्रिय पाठक ,
नमस्कार।
आज मैं फिर से बहुत ही अच्छे विषय के बारे में चर्चा करूंगी। आज हम सब जानेगें कि
कुछ लोग जन्म ही अच्छे घर में लेते है " Born with Silver spoon " और हम कहते है कि पिछले जन्म में पुन्य किया होगा तभी तो बहुत पैसे वाले और समृद्ध घर में जन्म लिया है।
और हम सभी बहुत मेहनत करते है अपनी जीविका प्राप्त करने के लिए ताकि हमारा भी जीवन सुखमय हो।
कौन नहीं चाहता सुखी जीवन ? कौन नहीं चाहता उसके पास बंगला -गाड़ी और धन सम्पति हो जिससे जीवन की हर सुख और आराम खरीद सके?
बहुत लोग है दुनिया में जो कम मेहनत करते है और उसको सब कुछ हासिल कर लेते है और कुछ लोग जीवन प्रयंत सिर्फ आजीविका के लिए संघर्ष करते ही रहते है।
और मन में कशक रहती है इतना प्रयास के बाद भी भाग्य साथ क्यों नहीं देता ?
चलिए आज जानेंगे अपने भाग्य और भाग्योदय के उलझे सवालों को।
कौन सा भाव भाग्य भाव ( bhagya bhav) कहलाता है ?
कुंडली का नवम भाव ( 9th house) को भाग्य भाव कहते है। इस भाव में जो राशि होती है उसके स्वामी को भाग्येश ( 9th Lord) कहते है।
ग्रहों की उपस्तिथि , भाग्येश की उपस्थिति और ग्रहों की दृस्टि और युति बतलाती है कि आपका भाग्य आपका कितना साथ देगा ?
आपको सिर्फ नवम भाव को देखना है कि उस स्थान पर कौन सा ग्रह है और आप जान सकते है कि आपका भाग्योदय करने वाला ग्रह कौन सा है।
नवम भाव में ग्रह की उपस्थिति से भाग्योदय का वर्ष निकला जा सकता है।
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भाग्योदय कब होगा ( Bhagyauday kab hoga )?
- भाग्य भाव में बैठे ग्रह की महादशा और अन्तर्दशा में आपका भाग्योदय होगा।
- भागेश मतलब भाग्य भाव में जो राशि है उसके स्वामी की महादशा और अन्तर्दशा में आपका भाग्योदय होगा।
- कुंडली में यदि कोई राजयोग है (जैसे- पंच महापुरुष योग , गजकेसरी राजयोग , महालक्ष्मी राजयोग हो , बुधादित्य राजयोग ) उसके की महादशा और अन्तर्दशा में आपका भाग्योदय होगा।
- कुंडली के लग्नेश या मित्र ग्रह शुभत्व स्थिति में हो तो उनकी महादशा और अन्तर्दशा में आपका भाग्योदय होगा।
- नवम भाव का स्थिर कारक ग्रह गुरु बृहस्पति और सूर्य होते है इनकी शुभत्व स्थिति होने पर महादशा और अन्तर्दशा में आपका भाग्योदय होगा।
कब भाग्य का साथ प्राप्त होता है ( Kab Bhgya ka saath prapt hoga ):-
- कोई भी ग्रह हो यदि कुंडली का कारक ग्रह होकर यदि नवम में बैठा है बलवान है तो आप भाग्यसाली है।
- कोई भी ग्रह अपने उच्च राशि में हो या स्वराशि होकर नवम भाव में है तो आप भाग्यशाली है।
- कोई भी ग्रह अपने नवम भाव में अपनी राशि को देखता हो तो आप को आपके भाग्य का साथ मिलता है।
- कोई भी शुभ ग्रह ( गुरु , शुक्र ) की दृस्टि यदि आपके भाग्य भाव पर है तो आप भाग्यशाली है।
- कोई भी ग्रह यदि नवम भाव में राजयोग बना रहा हो तो आप भाग्यसाली हो।
- भाग्येश यदि केंद्र (1-4-7-10) या त्रिकोण (1-5-9) भाव हो।
- भाग्येश कोई राजयोग बना रहा हो।
- तृतीय भाव में जितना शुभ ग्रह हो बहुत अच्छा क्योकिं सप्तम दृस्टि भाग्य भाव पर होती है अतः आप भाग्यशाली है।
- भाग्य भाव में बैठे ग्रह हो या भाग्येश हो यदि शुभ -कर्तरी योग में हो तो आप भाग्यशाली। है
कब भाग्य (Bhagya ) का साथ प्राप्त नहीं होता है :-
- मारक ग्रह या नीच के ग्रह हो नवम भाव में तो भाग्य का साथ मिलने में मुश्किल होती है।
- पापी ग्रह हो जैसे शनि , राहु और केतु अपने नीच के हो या फिर शत्रु राशि में हो भाग्य का साथ मिलने में मुश्किल होती है।
- पापी ग्रहो की दृस्टि या मारक ग्रहों की दृस्टि या नीच के ग्रह की दृस्टि हो तो भाग्य का साथ मिलने में मुश्किल होती है।
- कोई भी ग्रह दुर्योग बना रहा हो जैसे विष योग, गुरु चांडाल योग , अंगारक योग, ग्रहण योग बने तो भाग्य का साथ मिलने में मुश्किल होती है।
- भाग्येश 6-8-12 भाव में आ जाये तो भाग्य का साथ मिलने में मुश्किल होती है।
भाग्य( Destiny ) को मजबूत करने के उपाय :-
सबसे पहले भाग्य भाव के कारक ग्रह गुरु और सूर्य है सबसे पहले हम उनको मजबूत करेंगें जैसे
- सूर्य को रोज जल चढ़ाना है और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
- आदित्य ह्रदय स्त्रोत्र का पाठ करें।
- बड़े और बूढ़े या पिता समान व्यक्ति का आदर करें।
- गुरु और मंदिर की सेवा करें।
- गाय के सेवा करने से आपके भाग्य में वृद्धि होती है।
चलिए जानते है कि ग्रह और राशि की उपस्थिति नवम भाव में हो तो क्या प्रभाव होगा :-
नवम भाव -सूर्य देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में सूर्य ग्रह या सिंह राशि हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 22 वर्ष में होता है। नवम भाव का स्थिर कारक ग्रह सूर्य देव भी है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- सूर्य देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :- मेष लग्न ,वृषभ लग्न , सिंह लग्न,वृश्चिक लग्न, धनु लग्न)
- सूर्य देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब सूर्य 7 नंबर (तुला राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- सूर्य देव को ग्रहण नहीं लगना चाहिए ( राहु और केतु के साथ नहीं होना चाहिए )
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- सूर्य देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो।(भाग्य भाव में सिंह (5) नंबर की राशि हो तो सूर्य भाग्येश होंगें )
यदि सूर्य देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि सूर्य देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- सूर्य को जल अर्पित करें और गायत्री मंत्र का जाप करें
- पिता व् पिता सामान व्यक्ति का आशीर्वाद लीजिये।
- सूर्य देव से जुडी वस्तुओं का दान रविवार को जरूर कीजिये जैसे गेहूं , ताम्बा ,लाल फूल और फल आदि।
यदि सूर्य शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मेष लग्न ,वृषभ लग्न , सिंह लग्न,वृश्चिक लग्न, धनु लग्न हो
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप सूर्य रत्न माणिक धारण कर सकते है। उससे सूर्य देव को बल प्राप्त
होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - चंदमा देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में चंदमा ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 24 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- चंदमा देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :- मेष लग्न ,कर्क लग्न , तुला लग्न ,वृश्चिक लग्न, मीन लग्न)
- चंदमा देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब चंदमा 8 नंबर (वृश्चिक राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- चंदमा देव को ग्रहण नहीं लगना चाहिए ( राहु और केतु के साथ नहीं होना चाहिए )
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- चन्द्र देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो। ( भाग्य भाव में कर्क (4 नंबर ) की राशि हो तो चंद्र देव भागेश होंगें)
यदि चंदमा देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि चंद्र देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- शिव भगवन की भक्ति और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से उत्तम लाभ प्राप्त होगा।
- माता व् माता सामान स्त्री का आशीर्वाद लीजिये।
- चंदमा देव से जुडी वस्तुओं का दान सोमवार को जरूर कीजिये जैसे दूध , दही , चावल, सफ़ेद कपड़ा आदि।
यदि चंदमा शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मेष लग्न ,कर्क लग्न , तुला लग्न ,वृश्चिक लग्न, मीन लग्न हो
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप चंदमा रत्न मोती धारण कर सकते है। उससे चंदमा देव को बल प्राप्त
होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - मंगल देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में मंगल ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 28 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- मंगल देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :- मेष लग्न ,कर्क लग्न , सिंह लग्न ,वृश्चिक लग्न, धनु लग्न ,मकर लग्न ,कुम्भ लग्न ,मीन लग्न)
- मंगल देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब मंगल 4 नंबर (कर्क राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- मंगल देव अंगारक योग नहीं बनना चाहिए ( राहु और केतु के साथ नहीं होना चाहिए )
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- मंगल देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो। ( भाग्य भाव में मेष राशि (1 )और वृश्चिक (8 )राशि हो तो मंगल देव भाग्येश होंगे)
यदि मंगल देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि मंगल देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- हनुमान जी की भक्ति करनी है और हर मंगलवार को हनुमान चालीसा और बजरंग वाण का पाठ करना है।
- मंगल देव से जुडी वस्तुओं का दान मंगलवार के दिन को जरूर कीजिये जैसे लाल फल , लाल कपड़े , मसूर की दाल , लाल चन्दन आदि।
- अपने भाइयों सा अच्छा सम्बन्ध रखें।
यदि मंगल देव शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मे मेष लग्न ,कर्क लग्न , सिंह लग्न ,वृश्चिक लग्न, धनु लग्न ,मकर लग्न ,कुम्भ लग्न ,मीन लग्न हो
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप मंगल के रत्न मूंगा धारण कर सकते है। उससे मंगल देव को बल प्राप्त होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - बुध देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में बुध ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 32 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- बुध देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :- वृषभ लग्न , मिथुन लग्न , सिंह लग्न ,कन्या लग्न, तुला लग्न ,धनु लग्न ,मकर लग्न ,कुम्भ लग्न ,मीन लग्न)
- बुध देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब बुध 12 नंबर (मीन राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- बुध देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो। ( भाग्य भाव में मिथुन राशि (3 )और कन्या (6 )राशि हो तो बुध देव भाग्येश होंगे)
यदि बुध देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि बुध देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- गणेश जी की भक्ति करनी है और हर बुधवार को गणपति को दूर्वा और लडडू भोग लगाए
- बुध देव से जुडी वस्तुओं का दान बुधवार के दिन को जरूर कीजिये जैसे हरा फल , हरा कपड़े , हरे मूंग की दाल ,हरी चूड़ी आदि।
- अपने बहन - बुआ -बेटी से सम्बन्ध अच्छे रखे । उनका आदर करें।
- गाय को बुधवार के दिन हरा चारा जरूर खिलाये।
यदि बुध देव शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मे वृषभ लग्न ,सिंह लग्न ,कन्या लग्न, तुला लग्न ,धनु लग्न ,मकर लग्न ,कुम्भ लग्न ,मीन लग्न हो
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप बुध के रत्न पन्ना धारण कर सकते है। उससे बुध देव को बल प्राप्त होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - गुरु देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में गुरु ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 16 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- गुरु देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :-वृषभ लग्न ,मिथुन लग्न ,कर्क लग्न , सिंह लग्न , कन्या लग्न, वृश्चिक लग्न ,धनु लग्न ,कुम्भ लग्न ,मीन लग्न हो )
- गुरु देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब गुरु 10 नंबर (मकर राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- गुरु देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो। ( भाग्य भाव में धनु राशि (9 )और मीन (12 )राशि हो तो गुरु देव भाग्येश होंगे)
यदि गुरु देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि गुरु देव के नकारत्मक प्रभाव को कम हो सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- विष्णु भगवान् , साई बाबा और आप किसी भी गुरु को मानते है उनकी भक्ति और सेवा करनी है और हर गुरूवार मंदिर जरूर जाये और पिले फूल और मिठाई भोग स्वरुप चढ़ाये।
- गुरु देव से जुडी वस्तुओं का दान गुरूवार के दिन को जरूर कीजिये जैसे पिले फल , पीला कपड़े , चना की दाल ,पीतल के बर्तन आदि।
- अपने गुरु और बूढ़े व् बड़ी उम्र के लोगों से आशीर्वाद लेना चाहिए । उनका आदर करें।
- गाय को गुरूवार के दिन चना -गुड़ जरूर खिलाये।
यदि गुरु देव शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मे वृषभ लग्न ,मिथुन लग्न ,कर्क लग्न , सिंह लग्न , कन्या लग्न, वृश्चिक लग्न ,धनु लग्न ,कुम्भ लग्न ,मीन लग्न हो
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप गुरु के पुखराज धारण कर सकते है। उससे गुरु देव को बल प्राप्त होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - शुक्र देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में शुक्र ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 25 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- शुक्र देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :-वृषभ लग्न ,मिथुन लग्न ,कर्क लग्न , सिंह लग्न , कन्या लग्न, तुला लग्न , मकर लग्न ,कुम्भ लग्न हो )
- शुक्र देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब शुक्र 6 नंबर (कन्या राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- शुक्र देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो। ( भाग्य भाव में वृषभ राशि (2 )और तुला (7 )राशि हो तो शुक्र देव भाग्येश होंगे)
यदि शुक्र देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि शुक्र देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- देवी माँ की भक्ति और सेवा करनी है आप वैभव लक्ष्मी का व्रत रखें है और शुक्रवार को मंदिर जरूर जाये और लाल फूल , लाल चुनरी , इत्र और सफ़ेद मिठाई या खीर भोग स्वरुप चढ़ाये।
- शुक्र देव से जुडी वस्तुओं का दान शुक्रवार के दिन को जरूर कीजिये जैसे ऋतु फल , सफ़ेद कपड़े , दूध , दही , चीनी आदि।
- बड़ी उम्र के स्त्री से आशीर्वाद लेना चाहिए । उनका आदर करें।
यदि शुक्र देव शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मे वृषभ लग्न ,मिथुन लग्न ,कर्क लग्न , सिंह लग्न , कन्या लग्न, तुला लग्न , मकर लग्न ,कुम्भ लग्न हो )
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप शुक्र के हीरा धारण कर सकते है। उससे शुक्र देव को बल प्राप्त होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - शनि देव
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में शनि ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 36 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- शनि देव कारक और सम ग्रह होना चाइये। ( लगन :-मेष लग्न ,वृषभ लग्न ,मिथुन लग्न , कन्या लग्न, तुला लग्न , वृश्चिक लग्न ,मकर लग्न ,कुम्भ लग्न हो )
- शनि देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब शनि 1 नंबर (मेष राशि ) में नहीं होना चाहिए।
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
- शनि देव भागेश होकर 6-8-12 भाव में न हो। ( भाग्य भाव में मकर राशि (10 )और कुंभ (11 )राशि हो तो शनि देव भाग्येश होंगे)
यदि शनि देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि शनि देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
- हनुमान जी और शनिदेव की भक्ति और सेवा करनी है आप शनिवार का व्रत रख सकते है और शनिवार को मंदिर जरूर जाये और शनि मदिर में तेल , काला तिल शनि भगवान् को जरूर चढ़ाये।
- शनि देव से जुडी वस्तुओं का दान शनिवार के दिन को जरूर कीजिये जैसे काला कपड़ा , काला तिल ,उरद दाल ,सरसों का तेल , लोहा का सामान आदि।
- गरीबों को भोजन करवा सकते है उनको तेल से चीजें खिला सकते है।
- अपने से नीचे काम करने वाले लोगों का आदर करें उनसे दुर्वयवहार न करें जैसे नौकर , ड्राइवर , सफाई कर्मचारी आदि।
यदि शनि देव शुभत्व स्थिति में हो और आपका लग्न मे मेष लग्न ,वृषभ लग्न ,मिथुन लग्न , कन्या लग्न, तुला लग्न , वृश्चिक लग्न ,मकर लग्न ,कुम्भ लग्न हो )
परन्तु डिग्री से कमजोर हो तो आप शनि के नीलम धारण कर सकते है। उससे शनि देव को बल प्राप्त होगा और भाग्य वृद्धि में सहायक होंगें।
नवम भाव - राहु /केतु महाराज
यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में नवम भाव में शनि ग्रह हो तो जातक भाग्यशाली होता है और जातक का भाग्योदय उनके 42 वर्ष में होता है।
कुछ शर्ते है जो आपको ध्यान रखना है :-
- राहु /केतु देव अपने मित्र राशि में होना चाइये। ( जैसे बुध देव की राशि ( कन्या राशि , तुला राशि , मकर राशि और कुम्भ राशि )
- राहु / केतु अपने उच्च राशि में उत्तम फल देते है।
- राहु /केतु देव नीच के नहीं होने चाहिए मतलब राहु देव :- वृश्चिक राशि और धनु में और केतु देव वृषभ राशि और मिथुन राशि में नहीं होना चाहिए।
- पापी ग्रह और मारक ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
यदि राहु /केतु देव पर सभी शर्ते लागु नहीं होती तो आप ये उपाय जरूर करें ताकि राहु /केतु देव के नकारत्मक प्रभाव को कम सके और आपको भाग्य का साथ प्राप्त हो।
भाग्य वृद्धि उपाय :-
राहु महाराज यदि नवम भाव में हो
- घर में सबसे सलाह लेकर कार्य करें।
- अपने भाई -बहन से अच्छे सम्बन्ध रखें। पिता का आदर करें और अच्छे संबंध रखें।
- कुत्ता पाले। गली के कुत्तों को रोटी खिलाये।
- लाल चीटियों को चीनी मिला हुआ आटा खिलाये।
- कबूतर को बाजरा खिलाये।
- गणेश पूजा की पूजा करें
- माथे पर केसर का तिलक लगाए।
- कुत्ता शुभ होता है।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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