शनि का गोचर मकर राशि में :-12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2023 तक
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव किस- किस राशि पर होगा और शनि के साढ़ेसाती और से बचने के उपाय जरूर करें।
प्रिय पाठक ,
नमस्कार।
आज आप शनि देव के गोचर से जुड़े बहुत सारे सवालो का जबाब जानेगें।
- शनि राशि परिवर्तन कब करेंगें ?
- शनि का साढ़ेसाती और ढैय्या होती क्या है ?
- जीवन काल में कितने बार शनि की साढ़ेसाती का सामना करना पड़ता है ?
- शनि एक राशि में कितने दिनों तक रहते है?
- शनि की साढ़ेसाती के कितने चरण होते है ?
- साढ़ेसाती से बचने का उपाय क्या है ?
शनि राशि परिवर्तन कब करेंगें ?
शनि देव कुंभ राशि से मकर राशि में 12 जुलाई को राशि परिवर्तन करेगें।
शनि देव जब भी आपके कुंडली के चंद्र राशि से गोचर में भ्रमण करेंगें तो सामान्यतः ये कहा जायेगा कि आप शनि साढ़ेसाती के प्रभाव में है।
शनि का साढ़ेसाती और ढैय्या होती क्या है ?
और गोचर में शनि जहां 4 चौथा और 8 आठवां घर पीछे शनि की ढैय्या लगती है जैसे अभी शनिदेव मकर राशि में आये है तो उनसे पीछे की चौथी राशि तुला और आठवीं राशि मिथुन पर ढैय्या रहेगा।
कौन सी राशि शनि देव के साढ़ेसाती के प्रभाव में होंगें ?
शनि की साढेशाती के प्रभाव में धनु राशि , मकर राशि और कुंभ राशि 12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2022 तक रहेगा।
कौन से राशि शनि देव के ढैय्या के प्रभाव होंगें ?
शनि के ढैय्या के प्रभाव में मिथुन और तुला राशि 12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2022 तक रहेगा।
जीवन काल में कितने बार शनि की साढ़ेसाती का सामना करना पड़ता है ?
जीवन में 3 तीन बार शनि साढेसाती सामना करना पड़ता है। शनि देव (1) एक राशि में ढ़ाई साल तक रहते है और 12 * 2. 5 = 30 साल लगता है और हम मान कर चलते है कि किसी भी व्यक्ति का अधिकतम उम्र 90 साल की है तो जातक को जीवन में तीन बार शनि साढ़ेसाती का सामना करना पड़ेगा।
शनि की साढ़ेसाती के कितना चरण होते है ?
शनि साढ़ेसाती के तीन चरण है क्युकिं शनि एक राशि में ढ़ाई साल रहता है जैसे धनु राशि , मकर राशि और कुम्भ राशि में ढाई ढाई साल रहेंगें अतः ढाई ढाई साल के रूप शनि के तीन चरणों है
1 ) पहला चरण को उदय चरण कहते है। इस चरण में मानसिक परेशानी होती है आप मानसिक रूप से प्रश्न और चिंतित रहेंगें।
2 ) दूसरा चरण को शिखर चरण कहते है। इस चरण में मानसिक , शारीरिक और आर्थिक तीनो रूप से परेशान रहेंगें।
3 ) तीसरा चरण को अस्त चरण कहते है। इस चरण में कष्ट कम होता है।
जैसा कि जानते है कि शनि साढ़ेसाती में आपके जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस राशि में होते है उस राशि में शनि गोचर में आते है तो कहते है कि आप शनि की साढ़ेसाती चल रही है।
मान लीजिये आपकी चंद्र राशि सिंह है तो जब भी शनि गोचर में कर्क , सिंह और कन्या भ्रमण करेंगें तो आप शनि साढ़ेसाती के प्रभाव में होंगें।
जैसा हम जानते है कि शनि और चन्द्रमा के साथ युति हो तो विष योग निर्माण होता है।
शनि + चन्द्रमा = विष योग।
चन्द्रमा क्या है आपका मन। और जब मन अशांत हो तो
1 ) आप कोई भी सही निर्णय नहीं ले पाएंगे।
2 ) हमेशा आपका दिमाग बहुत सोचने में व्यस्त रहेगा।
3 ) नकारात्मक सोच हमेशा रहेगा चाहे आप जो भी सोचे "वो नहीं ही होगा" , " ये काम नहीं होने " मैं नहीं कर सकता " आदि आदि।
4 ) आप डिप्रेशन का शिकार होंगें।
5 ) घर हो या नौकरी या बिजनेस सभी जगह आप चिंतित रहेंगे , निर्णय नहीं ले पाएंगे। तो आपका चिड़चिड़ा पन बढ़ता जायेगा और निर्णय गलत होंगे।
अतः जब भी आप शनि के साढ़ेसाती के प्रभाव में है तो आपको उपाय और दान जरूर करना चाहिए।
साढ़ेसाती से बचने का उपाय क्या है ?
शनि देव के उपाय :-
आपको शनिदेव वैदिक बीज मंत्र " ऊँ शं शनैश्चाराय नमः " का जाप करना चाहिए
हर शनिवार मंदिर जाये और बाहर बैठे भिखारी को सिक्के दान करें
शनि के सामान जैसे काला तिल , काला कपडा , तैल , सामान जैसे तवा का दान सकते है।
गरीबों और अपने नीचे काम करने वाले कर्मचारी जैसे घर में काम करने वाली बाई , जमादार और सफ़ाई कर्मचारी को धिक्कारे नहीं।
चन्द्रदेव के उपाय :-
- शिवलिंग पर जल चढ़ाये और " ॐ नमः शिवाय " का जाप कीजिये।
- दूध , दही और चावल का दान सोमवार पूर्णिमा के दिन करें।
- माता की सेवा और माता का आदर जरूर करें।
- सोमवार के दिन सफ़ेद वास्तु के इस्तेमाल से बचें जैसे सफ़ेद कपडे , सफ़ेद भोजन जैसे चावल के जगह पुलाव खाइये और सफ़ेद रंग का इस्तमाल न करें।
किस राशि पर शनि साढ़ेसाती का प्रभाव कैसा होगा ?
धनु राशि :-
- शनि देव अकारक ग्रह है दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी है।
- चंद्र देव भी अकारक है क्युकिं चंद्र देव अष्टम भाव के स्वामी है।
धनु राशि के जातक के लिए शनि और चन्द्रमा दोनों के उपाय करने ही होंगें।
मकर राशि :-
- मकर राशि के जातक के लिए शनि लग्नेश है और हमेशा अच्छे है ।
- चन्द्रमा अकारक है।
अतः आपको आप सिर्फ चंद्र देव का उपाय करें।
कुम्भ राशि :-
अतः कुम्भ लगन की कुंडली में आपको दोनों के उपाय करने होंगें।
शनि की ढैय्या का प्रभाव किस राशि पर क्या होगा ?
तुला राशि :-
- शनि तुला राशि में पंचमेश और चतुर्थेश है अतः शनि योग कारक है।
- चन्द्रमा सम ग्रह है।
अतः आप सिर्फ चन्द्रमा का उपाय करें।
मिथुन राशि :-
- मिथुन राशि में शनि भाग्येश अष्टम भाव अतः स्थान दोष शनि लगेगा।
- चन्द्रमा अकारक ग्रह है।
अतः आपको दोनों ही ग्रह के उपाय करने होंगें।
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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