प्रिय पाठक,
नमस्कार।आज इस पोस्ट में जानेगेंं की बृहस्पतिवार को आपको क्या काम नहीं करनी चाहिए ।
जैसा हम सभी जानते है कि बृहस्पति वार विष्णु भगवान को समर्पित है और साथ साथ माता लक्ष्मी की पूजा का विधान बतलाया गया है ।
सबसे पहले ये बृहस्पतिवार का ज्योतिष महत्व के बारे में बात करेंगें । देव गुरु बृहस्पति हमारे कुंडली में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते है ।
देव गुरु बृहस्पति हमारे जीवन में क्या महत्त्व है ?
देवगुरु बृहस्पति हमारे जीवन में :-
- ज्ञान के कारक है ।
- धन के कारक है ।
- एक महिला के जीवन में पति और एक मां के लिए पुत्र का कारक है ।
- गुरु हमारे जीवन में आय के स्त्रोत के कारक है और साथ साथ हमारे भाग्य के कारक है ।
बृहस्पति वार को क्या नहीं करना चाहिए ये जानते है ?
1. बृहस्पति वार के दिन घर की साफ सफाई नहीं करनी चाहिए । साफ सफाई का मतलब जाला निकालना, सर्फ से धोना , पंखा साफ करना आदि करते है जो नहीं करना चाहिए ।आप साधारण झाड़ू पोछा कर सकते है ।
2. आपको बाल और नाखून नहीं कटना है । समनयतः मंगलवार , गुरुवार और शनिवार को नाखून और बाल नहीं कटना चाहिए ।
3. किसी को शाम के समय पैसे न दे । कोशिश करें के बृहस्पतिवार को पैसे के लेन देन से बचे ।
4. कपड़े धोबी के यहां पर धोने नही देना चाहिए ।
5. महिला हो या पुरुष सिर को साबुन और शैंपू से धोने से बचना चाहिए ।
बृहस्पतिवार की पूजा करने की सलाह क्यों दी जाती है ?
- जब भी गुरु किसी की कुंडली में कमजोर होता है तो गुरुवार को विष्णु भगवान की पूजा और अर्चना करने की सलाह दी जाती है ।
- जिस भी बालिका का विवाह में विलम्ब हो रहा हो उसको बृहस्पतिवार का व्रत और पूजन की सलाह दी जाती है ।
- बृहस्पतिवार का व्रत और पूजन करने की सलाह दी जाती है उन जातक को जिसके जीवन में धन , वैभव और सुख समृद्धि की कमी हो ।
बृहस्पतिवार का व्रत और पूजन कैसे करें ?
1. सुबह स्नान आदि से निवृत स्वक्ष वस्त्र धारण करें ।
2. बृहस्पतिवार के दिन व्रत करने का संकप ले । आप 11-21-51 वार करने का संकल्प ले सकते है ।
3. चौंकी पर पिला कपड़ा बिछाकर विष्णु भगवान के चित्र को स्थापित करें ।
4. घी का दिया प्रज्वलित करें ।
5. कलश स्थापित करना है और कल में जल के साथ साथ चना , गुड़ और मुनक्का थोड़ा सा डालें।
6. कलश को पिला चंदन लगाएं और सिंदूर लगाए ।
7. पिला फूल कलश में डाले । विष्णु भगवान के चित्र पर अर्पित करें ।
8. विष्णु भगवान को पिला फल , फूल और पिला चंदन से पूजन करें ।
9. बृहस्पतिवार व्रत कथा पढ़े और आरती करें ।
10. फिर कलश का जल , गुड़, चना ,फूल और पिला चंदन और दिया लेकर केले के वृक्ष के पास जाना है । आपको कलश का जल पेड़ पर डालना है ।
11. पेड़ पर पिला चंदन लगाएं । फूल चढ़ाए और फिर दिया दिखाए ।
12. फिर उनको नमन करते हुए अपनी मनोकामना दोहराना चाहिए और उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए ।
13. व्रत करने वाले एक समय भोजन करें और पिला भोजन करें ।
नोट:-
जो जातक व्रत नहीं कर सकते कम से कम पूजा जरूर करें ।
सारे काम करें जैसे कथा करें ,भोग लगाए , दिया जलाए , केले का पूजन करें , आरती करें ।
सारे काम करें जैसे कथा करें ,भोग लगाए , दिया जलाए , केले का पूजन करें , आरती करें ।
शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दिया जलाये और दोनों के मंत्र उच्चारण कीजिये और फिर माता लक्ष्मी की आरती जरूर करें।
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

0 टिप्पणियाँ