प्रिय पाठक ,
नमस्कार ।
आज फिर से ज्योतिष से जुड़े एक राजयोग के बारे में बात करूंगी ।
आज बात करूंगी विपरीत राज योग ( Viprit Raj Yog ) के बार में ।
क्या है ये योग और इसका ज्योतिष में महत्व बहुत है कारण है कि ये योग 6-8-12 भाव में बनता है ।
मतलब ज्योतिष में जिस घर को आप बहुत अच्छा नही बोलते है उस घर या भाव में ये राजयोग बनता है ।
जैसा पहले ही बताया जा चुका है कि कोई भी राजयोग कुछ शर्ते होती है ।
विपरीत राजयोग की शर्ते ( Condition For Viprit Raj Yog ) :-
विपरीत राजयोग तभी बनता है जब
- ग्रह के स्वामी भी 6-8-12 भाव के स्वामी हो ।
- और ग्रह खुद भी 6-8-12भाव में से किसी भी भाव में हो ।
- लगन और लग्नेश की स्थिति अच्छी होनी चाहिए । मतलब लग्न मजबूत होना चाहिए और
- लग्नेश की स्थिति कुंडली में अच्छी होनी चाहिए ।
*****कभी भी कोई भी राजयोग हो उसका फल आपको उसकी दशा और अंतर दशा में प्राप्त होता है ।
विपरीत राजयोग कितने प्रकार के होते है और कैसे फल प्रदान करता है ?
विपरीत राजयोग तीन तरह से फल प्रधान करते है :-
- कुंडली के कारक ग्रह हो और विपरीत राज योग बन रहा हो तो बहुत अच्छे फल प्राप्त होंगें ।
- कुंडली के अकारक ग्रह हो और विपरीत राजयोग बन रहा हो तो सामान्य फल देंगें ।
- कुंडली के नीच ग्रह में बैठ कर यदि राजयोग का निर्माण कर रहे है तो किसी भी प्रकार के अच्छे फल की उम्मीद न रखें।
उद्धरण से समझते है ( Example For Viprit Rajyog )
1 ) कुंडली के कारक ग्रह हो और विपरीत राज योग बन रहा हो तो बहुत अच्छे फल प्राप्त होंगें ।
नीचे सिंह लग्न की कुंडली है और सिंह लग्न के लिए गुरु कारक ग्रह है क्युकिं गुरु पंचम भाव के स्वामी है और 8 वे भाव में बैठे है।
लग्नेश भी द्वतीये भाव में है तो लग्नेश का प्लेस्मेंट भी अच्छा है।
यहाँ पर गुरु विपरीत राजयोग का निर्माण करेंगें क्योंकि गुरु की एक राशि 6-8-12 भाव में आ रही है। गुरु स्वराशि है और विपरीत राजयोग में भी अतः जब गुरु दशा और अंतर दशा में आयेगें तो अष्टम भाव से जुड़े उत्तम उत्तम फल देंगें।
अष्टम भाव से जुड़े फल क्या है ?
- आपके सारे परेशानी , बाधा और मानसिक चिंता को गुरु दूर करेंगें।
- आपकी रूचि किसी गुप्त विद्या या फिर किसी रिसर्च क्षेत्र में बढ़ेगीं।
- आपको गुप्त या आकस्मिक धन प्राप्त हो सकते है।
- आपके सम्बन्ध अपने ससुराल से अच्छे रहेंगें।
- आप यदि इन्सुररन्स , गुप्त विद्या जैसे ज्योतिष , देश सेवा जैसे CBI आदि से जुड़े है तो आपको लाभ होगा।
गुरु की पंचम दृस्टि 12 वे भाव पर और 7 वे दृस्टि धन भाव पर होगी अतः गुरु अच्छे फल आपको देते नजर आयेंगें।
2 ) कुंडली के अकारक ग्रह हो और विपरीत राजयोग बन रहा हो तो सामान्य फल देंगें ।
नीचे की कुंडली भी सिंह लगन के है परन्तु चन्द्रमा सिंह लगन के लिए अकारक है। चन्द्रमा सिंह लग्न के कुंडली में अकारक ग्रह है और बाध्य है ख़राब फल देने के लिए परन्तु यहाँ चन्द्रमा कि राशि 12 वे भाव में आ रही है अतः चन्द्रमा सामान्य फल अपनी दशा और अंतर दशा में देंगे।
- 12 भाव और 6 वा भाव ( क्योंकि चन्द्रमा अपने सप्तम दृस्टि 6 वे भाव पर डालेगा ) क्या है ?
- 12 भाव से फिज़ूल के खर्चे देखे जाते है।
- बीमारी के कारन हॉस्पिटल जाने के योग बनते है।
- रोग - ऋण और सत्रु का भाव है इन सब में वृद्धि करेंगे।
परन्तु यदि आपके कुंडली में चन्द्रमा विपरीत राजयोग में है तो आपको इन सारे समास्या से रहत मिलेगी चन्द्रमा के दशा और अंतर दशा में।
****** चन्द्रमा 6 -8 -12 कही भी बैठा होता तब भी विपरीत राजयोग बनाएगा।
नोट:- चन्द्रमा स्वराशि का है तो वो 12 वे भाव के ख़राब फल में कमी करेंगे।
3 ) कुंडली के नीच ग्रह में बैठ कर यदि राजयोग का निर्माण कर रहे है तो किसी भी प्रकार के अच्छे फल की उम्मीद न रखें।
नीचे की कुंडली में गुरु करक होकर नीच के हो गए है और विपरीत राजयोग में भी है परन्तु इसका फल आपको पूर्ण रूपेण नहीं प्राप्त होगा।
ये तय है कि यदि आपके जीवन में राजयोग बन रहा है तो आपका जीवन एक सामान्य लोगो से हमेशा अच्छा रहेगा।
या तो आप समृद्ध परिवार में जन्म लेंगें या फिर अपनी मेहनत पर सब प्राप्त कर लेंगें।
परन्तु ज्योतिष में इन बातो का धयान जरूर दे कि राजयोग सिर्फ ग्रहों की उपस्तिथि मात्रा से ही नहीं बन जाती। राजयोग कुंडली में है इसके लिए सभी शर्तो को जानना भी जरुरी है।
धन्यवाद
Happy Beginning...
Happy Beginning...
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।




0 टिप्पणियाँ