प्रिय पाठक ,
नमस्कार ।आज इस पाठ में श्रीकृष्ण और राधा रानी की ही बात करूंगी । आज में बात करूंगी कि राधा रानी और श्री कृष्ण पहली बार इस धरा पर एक दूसरे से कब मिले थे ????
श्रीधामा के श्राप के कारण राधारानी का पृथ्वी लोक ने जाने का समय आ गया ।
राधा रानी और श्रीकृष्ण के अश्रु की धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी क्योंकि दोनों को ये ज्ञात था कि पृथ्वी पर राधा रानी की स्मृति धूमिल हो जायेगी वो श्री कृष्ण को पूर्णतः भूल जाएंगी।
जब पृथ्वी पर अवतरित का समय हो रहा था तब राधा रानी ने श्री कृष्ण से कहा कि उनकी आंखे दुनिया को नही दिखेंगी जब तक वो श्री कृष्ण के दर्शन न कर ले । श्री कृष्ण ने आश्वासन दिया कि वो उनकी इच्छा जरूर पूरा करें ।
बरसाना में चारों तरफ खुशी का माहौल था क्योंकि बरसाना के मुखिया वृषभानु के घर संतति प्राप्ति का समय आ गया था ।
बच्ची का जन्म हुआ सभी खुश थे परंतु जैसे ही बरसाना के लोगों को ये ज्ञात हुआ की बच्ची अपने आंखें नहीं खोल रहीं हैं तो लोगों में निराशा छाने लगा ।
पिता वृषभानु का अपने पुत्री के तरफ प्रेम और स्नेह के कारण और नारायण पर अटूट विश्वास के कारण उन्होंने हर वो चिकित्सा और उपाय वैद्य से करवाए जो उनके समर्थ में था परंतु राधा रानी ने फिर भी आंखे नही खोली ।
अब हो बरसाना के लोगो को भी यकीन होने लगा की राधा रानी दृष्टिहीन ही रहेंगी ।
फिर जन्म हुआ श्री कृष्ण का । अपनी राधा रानी से किए वादा निभाने और जगत को प्रेम और जीवन जीने की भाषा सीखने श्री कृष्ण ने जन्म लिया ।
श्री कृष्ण के जन्म के बारे में सभी जानते है हम किस कठिन परिस्थिति में उनका जन्म हुआ और कैसे उनकी शक्ति और माया से वो उनके पिता वासुदेव उन्हें गोकुल नंद बाबा के घर पहुंचने में सक्षम हुए ।
जानते है हम सब कि योग माया के मार्गदर्शन से पिता वासुदेव ने श्री कृष्ण को यशोदा मां को सौप दिया और योग माया जो यशोदा मां की पुत्री के रूप में जन्म ली उनको लेकर कंस के कारागार में आ गए ।
जिस तरह से कंस ने अपनी बहन देवकी के बच्चों की हत्या की थी अपने वादे के मुताबिक फिर से जैसे ही कंस को बच्चे के जन्म होने का समाचार प्राप्त हुआ वो तुरंत ही कारागार में पहुंच गया और देवकी के बच्चे को जैसे ही मरने के लिए आगे बढ़ा वैसे ही योगमाया उसके हाथ से छुट कर उड़ गई और उन्होंने भविष्यवाणी की "कंस तुझे मारने वाला का जन्म हो चुका है ।"
कंस परेशान हो गया और अपने राज दरबार में ये घोषणा करवाया कि मथुरा के आस पास जो भी गांव में बच्चे ने जन्म लिया है उसका पता लगाए और उन सबको को मार दे ।
जैसे ही कंस को पता लगा कि गोकुल में नंद के घर बच्चे ने जन्म लिया है तुरंत कंस ने पूतना जो की एक राक्षसी थी उसको श्री कृष्ण को मारने को कहा और पूतना श्री कृष्ण को मारने के लिए गोकुल पहुंच गई ।
यहां गोकुल में कृष्ण जन्म के बाद महा उत्सव नंद बाबा के महल में मनाया जा रहा था और सभी तरफ खुशी ही खुशी छाई थी और चारो तरफ नृत्य और उत्सव का वातावरण था ।
इस बीच ही पूतना ने मौका देख कर श्री कृष्ण को पालने ( झूला ) से लेकर सबके आखों से बच कर महल से निकल गई उसका उद्देश उस छोटे से बालक को जहरीला स्तनपान करवा कर मारने की साजिश थी ।
इधर जैसे ही मां यशोदा और नंद बाबा को पता चला कि कृष्ण झूले में नहीं है चारो तरफ लोग परेशान होने लगे सभी कृष्ण को ढूंढने लगे तभी उनको किसी की जोर जोर से चिलाने की आवाज सुनाई दी सभी लोग उस आवाज की तरफ भागे ।
जो दृश्य था उससे सभी लोग चकित और भयभीत दोनों थे छोटे से कृष्ण राक्षसी पूतना का स्तन पान कर रहे है और वो पीड़ा से कराह रही है ।
तभी श्री कृष्ण ने अपने पैर से धरती को छुआ और सीधे बरसाना के किए पूतना सहित उड़ गए । इस दौरान पूतना निस्तेज हो चुकी थी उसके प्राण जा चुके थे ।
सीधे वो रक्षासी पूतना श्री कृष्ण सहित वृषभान के महल में आकर गिरी । विशाल काय रक्षसी के गिरने से वहां सभी लोग भयभीत हो गए परंतु जब वहां के लोगो का ध्यान छोटे से बालक पर पड़ा था सभी के भय दूर हो गए ।
और पूतना का शरीर अदृश हो गई ।
सब का ध्यान छोटे से बालक पर था श्री कृष्ण रोने लगें तो राधा रानी की मां को लगा कि बालक भूखा है अतः वो अपने गोद में ली और श्री कृष्ण को राधा रानी के साथ झूले में बगल में सुला कर चली गई ।
दोनो ही बाल स्वरूप में एक दूसरे के सामने थे । राधा रानी का वादा पूरा करने के लिए श्री कृष्ण उनके सामने थे । उन्होंने राधा रानी के आखों को अपने हाथ से छुआ और पहली बार राधा रानी ने अपने आखों को खोला और राधा रानी ने श्री कृष्ण को ही देखा ।
तब तक नंद बाबा को श्री कृष्ण की जानकारी प्राप्त हुई कि वो बरसाने में वृषभान के घर पर है । मां यशोदा और नंद बाबा श्री कृष्ण को लेने आ गए और कृष्ण को लेकर चलें गए ।
राधा रानी और कृष्ण दोनो पहली बार मिले थे सबको लगा कि राधा रानी के आंखे खोलना एक संयोग है ये औषधि का ही असर है ।
पर ये कोई नही जा सका कि राधा रानी से किए वादा को पूरा करने ये श्री कृष्ण ने ही रचा था । श्री कृष्ण ये जानते थे कि आज के बाद राधा रानी 100वर्षो तक कृष्ण को भूले रहेंगी ।
श्री कृष्ण जानते थे कि राधा रानी गौ लोक से जुड़ी सारी बाते भूल जायेगी ।
आज के बाद श्री कृष्ण कभी राधा रानी को भूले नहीं और राधा रानी को कभी भी श्री कृष्ण याद ही नहीं आए ।
इस तरह से दोनो मिले थे ।
इस अध्याय में आप लोगो ने देखा श्री कृष्ण की माया को !!!
- इतनी बड़ी राक्षसी को कैसा इतनी आसानी से मार दिया ।
- कैसे उड़ चले पूतना को लेकर ।
- बरसाना में किसी ने भी ये नही सोचा कि इतना छोटा बालक इस मृत पूतना के साथ कैसे और क्यों है ।
बहुत सवाल है परंतु जहां श्री कृष्ण है वो वहां प्रश्नों का कोई अर्थ ही नहीं है ।
उनकी न कोई माया ही समझ सकें है और न ही लीला को ।
तभी तो अद्भुत है नंदलाल अपने । सबके मन को ऐसा मोह लेते है कि बस सब उनको देखते ही रह जाते है । उनकी मनोरम काया सबके मन को हर लेती है ।
जब हमारे बस में कुछ है ही नहीं सब उनकी मर्जी से ही होता है तो क्यों न हम अपने को श्री कृष्ण में समर्पित कर दे।
चलिए उनके नाम लेते रहे और कहते रहे राधे कृष्ण , राधे कृष्ण, राधे कृष्ण।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

0 टिप्पणियाँ