प्रिय पाठक ,
नमस्कार ।आज मातारानी का इस पोस्ट में स्वागत करेंगें ।
22 मार्च से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2023 ) प्रारंभ होने जा रहा है और मातारानी फिर से हम भक्तों को आशीर्वाद देने आ रही है ।
नवरात्रि हमारे देश में धूम धाम से मनाई जाता है । सभी तरफ महोत्सव का माहौल होता है । नवरात्रि में माता के नौ स्वरूपों को पूजा होती है । सम्पूर्ण देश में बड़े बड़े पंडाल बनाए जाते है क्या शहर क्या गांव सभी जगह बहुत अच्छे से पंडाल को सजाया जाता है , मेला लगाया जाता है , घट स्थापना , पूजा , भोग और ढोल नगाड़े बजते है और मातारानी के जयकारा से वातावरण गूंज उठता है ।
और घरों में प्रथम दिन से ही घट स्थापना किया जाता है और पूरे नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूप की पूजा होती है ।
मां को नौ दिन नौ तरह के अलग अलग भोग लगाया जाते है और उनकी पूजा , भक्ति और आराधना की जाती है ।
चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रही है ?
चैत्र नवरात्री सामन्यतः मार्च - अप्रैल महीनों में मनायी जाती है इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू होकर 30 मार्च तक रहेगा।( Chaitra navratri 2023 )
नवरात्रि साल में वैसे तो चार बार होती है परन्तु चैत्र नवरात्री और शारदीय नवरात्रि महत्वपूर्ण होता है। नवरात्री के इन दिनों में माँ दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है और भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ दुर्गा की पूजा -आराधना -उपवास करते है और माता के कृपा प्राप्त करते है।
कलश स्थापना या घाट स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है ?
( Kalash sthapana ka subh muhurat aur Navratri ghatsthapana muhurat )
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त :- कलश की स्थापना चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा व् प्रथम तिथि को की जाती है। इस बार कलश स्थापना का शुभ समय 22 मार्च 2023 बुधवार को 6.29 सुबह से 7. 39 मिनट सुबह तक रहेंगे।
प्रतिपदा तिथि 21 मार्च 2023 को रात्रि 10 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 22 मार्च 2023 को सुबह 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगा परन्तु माता रानी की पूजा का प्रारंभ उदया तिथि 22 मार्च में ही होगी।
कलश स्थापना कैसे करें ?
(Navratri Kalash Sthapana kaise karen )
- कलश स्थापना के लिए सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आप अपने मंदिर को साफ -सुथरा कर माता की छोटी से चौकी पर लाल कपडा बिछाये और माता के फोटो को रखे।
- एक मिट्टी का पात्र में मिट्टी लेकर आप जौ को बौ दे और फिर एक कलश में जल ले।
- कलश तांबे , पीतल , सोना ,चांदी व् मिटटी का भी हो सकता है।
- कुमकुम में पानी थोड़ा मिलाकर उस कलश पर आप स्वस्तिक का चिन्ह बनाये और कलश पर कलावा बांधे।
- कलश में साबुत सुपारी , सिक्के और अक्षत डाले और फिर कलश पर अशोक व् आम के पत्ते रखें और एक नारियल को माता की चुनरी लपेट कर उस को भी कलावा से बंधे और कलश पर रखें ।
इन सारी प्रक्रिया के समय आप मातारानी के मंत्रो का जाप करें या कम से कम जय माता दी, जय माता दी करते जाइये।
आप ये वीडियो को यूट्यूब ( YouTube ) पर देख सकते है.
नौ दिन देवी माँ के नौ रूप (nau roop ) कौन कौन है ??
आइये जानते है किस दिन किस रूप की पूजा की जाता है :-
1) प्रतिपदा तिथि (22 मार्च ) - घट स्थपना -माँ शैलपुत्री की पूजा
2) द्वतीया तिथि (23 मार्च ) - मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
3) तृतीया तिथि (24 मार्च ) -मां चंद्रघंटा की पूजा
4) चतुर्थी तिथि (25 मार्च ) -मां कुष्मांडा की पूजा
5) पंचमी तिथि (26 मार्च ) - मां स्कंदमाता की पूजा
6) षष्ठी तिथि (27 मार्च ) - मां कात्यायनी की पूजा
7) सप्तमी तिथि ( 28 मार्च ) - मां कालरात्रि की पूजा
8) अष्टमी तिथि (29 मार्च ) -मां महागौरी की पूजा
9 ) नवमी तिथि (29 मार्च ) - मां सिद्धिदात्री की पूजा
10) दशमी तिथि ( 30 अक्टूबर)- नवरात्री का परायण
अखंड ज्योत या दिया का क्या महत्व है ?
मान्यता है यदि आप नवरात्रि में अखंड दीया प्रज्वलित करते है तो माता रानी की कृपा से आपके घर में सुख शांति और समृद्धि आएगी । आपको मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी ।
अखंड दीया जलाने के नियम क्या है ? ( Rules of Akhand Diya )
- जब भी आप ज्योत जलते है तो इस बात का ध्यान रखे कि पूरे नौ दिन दिया में ज्योत प्रज्वलित हो ।
- दीया बुझने न पाए ।
- दीया आप गाय के शुद्ध घी से प्रज्वलित करें । आप तेल का भी दीया लगा सकते है ।
- दीया को हमेशा मातारानी के चित्र के दाहिने तरफ लगाए और यदि तेल का दीया हैं तो बाएं तरफ लगाए ।
- मातारानी की स्थापना अपने घर के ईशान कोण यानी घर का उत्तर पूर्वी कोना में करना चाहिए और दीया ज्योत उस दिशा में ही होना चाहिए ।
नवरात्री व्रत का परायण / विधि व् विसर्जन विधि क्या है ?
(navratri vrat ka parayan vidhi v visarjan vidhi )
सामनायतः अष्टमी व् नवमी को व्रत परायण किया जाता है पूजा -पाठ , आरती ,हवन के बाद आप कन्या का पूजन करें।
नौ कन्याओ को देवी स्वरुप मानकर पूजन करें उनके पैर धोये , माथे पर हदी -कुमकुम लगाए ,हाथ में मौली बंधे यथा संभव भोजन करायें ।
भोजन में हलवा -पूरी-चना जरूर खिलाये और साथ ही साथ कन्या को दान -दक्षिणा में केले और पैसे जरूर देना चाहिए।
कन्या पूजन बाद माँ भगवती का धयान करें मातारानी से क्षमा -प्रार्थना करें।
और कलश को मातारानी का नाम लेते हुए उठा ले अपने माथे से लगाए कलश में डाले सिक्के और सुपारी को चुनरी में बांध कर अपने तिजोरी में रखे।
और कलश के जल को, आम व् अशोक के पल्लव से अपने घर में हर कमरे में छिड़के और अंत में तुलसी के गमले में जल डाल दे।
कलश में बंधे मौली आप अपने हाथ में बांध सकते है और अखंड दीपका को आपको जलते रहने देना है दीपक को पूरी नवमी प्रज्वलित रहने देना है।
भोग लगाने के बाद कुछ लोग दुर्गा सप्तसती का पाठ करते है। पाठ करने के बाद माता की आरती जरूर करें।
और अगर संभव हो तो रोज आप अग्यारी कर सकते है छोटी सी हवन विधि।
नवरात्री में राशि अनुसार क्या उपाय करें :- ( Remedies According to Zodiac during Navratri )
धन्यवाद
Happy Beginning...
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सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

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