1) गुरु पूर्णिमा कब है ? 2) गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है ? 3) पूर्णिमा तिथि का ज्योतिष महत्व क्या है ? 4) पूर्णिमा तिथि की पूजन विधि क्या है
प्रिय पाठक,
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास रविवार को 21 जुलाई को बड़े धूम धाम से मनाई जाएगी।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाए जाता है । पुराणों में व्याख्या है कि महर्षि वेदव्यास ने आज ही के दिन जन्म लिया था । ऋषि व्यास ने ही चारों वेदों और महाभारत जैसे महा ग्रंथो की रचना की थी ।
गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा का महत्व और उनको सम्मान देने की परंपरा है ।
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः ,गुरुर्देवो महेश्वरः
- गुरु से ही हमे ज्ञान प्राप्त होता है ।
- गुरु ही है जो हमें अच्छे और बुरे की पहचान करते है ।
- गुरु ही है जो हमे अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाते है ।
अतः गुरु पूर्णिमा के दिन में उनका आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए ।
सबसे पहला गुरु आपके जीवन का आपके माता और पिता है ।
दूसरे गुरु वो होते है जो हमें ज्ञान प्रधान करते है हमारे शिक्षक होते है जो हमारा मार्गदर्शन करते है ताकि हम सब अपने जीवन के कर्म को सुचारू रूप से करें और जीवन में सफलता को प्राप्त करें ।
तीसरे गुरु वो होते है जो हमे अध्यात्म की तरफ लेकर चलें ।
जो हमारे जीवन को मोक्ष की तरफ , संसार रूपी इस मोह जाल से निकलें में मदद करें । चन्द्रमा और गुरु दोनों को मजबूत कैसे करें।
आप किसी का भी आशीर्वाद और स्नेह ले सकते है । और कल के दिन आप उनको उपहार जरूर दे ।
- पूर्णिमा तिथि को उपवास व व्रत रखा जाता है ।
- शाम के समय चौकी पर पीले वस्त्र डाल कर विष्णु भगवान की प्रतिमा स्थापित करने।
- शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें ।
- विष्णु भगवान को पीले वस्त्र ,पिले फूल, पिले फल और पीली मिठाई का भोग लागिये ।
- पूर्णिमा के दिन भोग में चावल की खीर जरूर लागिये ।
- कई जगह भोग में पंजीरी (आटा को शुद्ध घी में भून कर उसमें चीनी डाल कर बनाया जाता है ) लगाया जाता है ।
- और कई जगह सूजी का हलवा भी भोग में लगाया जाता है ।
- पंचामृत तुलसी डाल कर भोग में जरूर लगाए ।( पांच तत्व व चीज से बनी जिसमे दूध, दही, शक्कर, घी और शहद से बनाया जाता है ।)
- भोग में तुलसी के पत्ते जरूर से चढ़ाये क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय होती है ।
- उसके बाद सत्यनारायण भगवान की कथा और आरती जरूर करनी चाहिए ।
- नारायण का भजन कीर्तन अति लाभदायक होता है ।
- और सभी कथा सुनने वाले भक्त जनों को प्रसाद वितरण करना चाहिए
- और उस दिन चंद्र देव के दर्शन जरूर करें । उनको दूध जल में डाल कर अर्ध दे ।
- जिस भी जातक की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो उनको पूर्णिमा की व्रत करने की सालह दी जाती है ।
- इस दिन चंद्रमा के चीजो के दान का विशेष महत्व है ।जिस भी जातक के कुंडली मे चंद्रमा पीड़ित होता है उनको चंद्रमा के चीज जैसे दूध , दही , चावल , चीनी , चांदी दान देने को कहा जाता है ।
- पूर्णिमा के दिन गरीबो को दान में अनाज , वस्त्र , खीर आदि देकर चंद्रमा को कुंडली में मजबूत किया जा सकता है ।
- पूर्णिमा का व्रत रखें।
- माता का आशीर्वाद लीजिये।
- शाम को चन्द्रमा को जल में दूध डालकर अर्ध दे।
- विष्णु भगवान् की पूजा आरधन करें।
- अपने गुरु , शिक्षक , बड़े -बुजर्ग का आशर्वाद लीजिये और सेवा करें।
- पीला फल , पीला कपडा और पीली मिठाई मंदिर में भोग लगाए।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिशे समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

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