1. गजानन (Gajanan)
अर्थ: 'गज' का अर्थ होता है हाथी और 'आनन' का मतलब मुख।
महत्व: हाथीमुख वाले भगवान, जो बुद्धि और बल दोनों के प्रतीक हैं।
2. विघ्नहर्ता (Vighnaharta)
अर्थ: विघ्न = बाधा, हर्ता = नाश करने वाला।
महत्व: जीवन की हर रुकावट को दूर करने वाले।
3. लंबोदर (Lambodar)
अर्थ: लंबा (बड़ा) उदर (पेट)।
महत्व: उनका बड़ा पेट धैर्य और सभी अनुभवों को आत्मसात करने की क्षमता दर्शाता है।
4. एकदंत (Ekadanta)
अर्थ: एक दांत वाला।
महत्व: बलिदान और तपस्या का प्रतीक; एकदंत स्वरूप में उन्होंने अपनी एक दंत स्वयं तोड़ी थी वेदों की रक्षा हेतु।
वक्रतुंड (Vakratunda)
अर्थ: टेढ़े सूंड वाले।
महत्व: यह नाम सिखाता है कि हर टेढ़े रास्ते को भी बुद्धि से सीधा किया जा सकता है।
धूम्रवर्ण (Dhoomravarna)
अर्थ: धुएँ के समान रंग वाले।
महत्व: जीवन की अनिश्चितताओं और भ्रम से पार पाने वाले।
7. सिद्धिविनायक (Siddhivinayak)
अर्थ: सिद्धि (सफलता) प्रदान करने वाले।
महत्व: हर शुभ कार्य की शुरुआत में इनका नाम लेने से कार्य सफल होता है।
मोदकप्रिय (Modakpriya)
अर्थ: जिन्हें मोदक (मीठा पकवान) अत्यंत प्रिय है।
महत्व: यह नाम उनके आनंद, प्रेम और प्रसन्नता के स्वरूप को दर्शाता है।
9. गणनायक (Gananayak)
अर्थ: गणों (देवताओं/सेनाओं) के नायक।
महत्व: नेतृत्व, अनुशासन और मार्गदर्शन का प्रतीक।
10. बालचंद्र (Balachandra)
अर्थ: जिनके मस्तक पर चंद्र है।
महत्व: शीतलता, संतुलन और सुंदरता का प्रतीक।
भगवान गणेश को मोडक और लड्डू सबसे अधिक प्रिय हैं। माना जाता है कि जो भी भक्त उन्हें प्रेमपूर्वक उनका पसंदीदा भोग अर्पित करता है, उसकी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं।
गणपति जी के प्रिय भोग
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मोडक (Modak)
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गणेश जी का सबसे प्रिय भोग। खासकर उकडीचे मोदक (चावल के आटे से बने गुड़ और नारियल की भराई वाले मोदक)।
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यह बुद्धि और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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लड्डू (Laddu)
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बेसन, बूंदी और तिल के लड्डू उन्हें विशेष प्रिय हैं।
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लड्डू धन और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला माना जाता है।
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दूर्वा घास (Durva Grass)
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भले ही यह खाने योग्य नहीं है, परंतु गणपति को दूर्वा अर्पित करना अति शुभ और प्रिय है।
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नारियल (Coconut)
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नारियल को गणपति जी के आगे फोड़कर भोग अर्पित किया जाता है।
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यह शुद्धता और समर्पण का प्रतीक है।
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केले (Banana)
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केला सरलता और संतोष का प्रतीक है। गणपति जी को केले का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है।
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पेर (Guava) और अन्य फल
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मौसमी फल विशेष रूप से पेर, सेव (सेब), अंगूर, संतरे आदि भी प्रिय हैं।
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पान के पत्ते (Betel Leaves) और सुपारी
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पूजा में पान के पत्ते और सुपारी भी भोग स्वरूप अर्पित किए जाते हैं।
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खीर (Kheer)
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चावल और दूध से बनी खीर भी गणपति को प्रसन्न करती है।
धन्यवाद
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2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
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