गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 पर घर में गणपति की पूजा कैसे करें?
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गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 का महत्व
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गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता कहा जाता है, अर्थात् वे अपने भक्तों के सभी कष्ट और अवरोध दूर करते हैं।
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यह दिन भगवान गणेश के पृथ्वी पर अवतरण का दिन माना जाता है।
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गणेश जी को “प्रथम पूज्य” माना गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से होती है।
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इस पर्व पर घर में गणपति की स्थापना करने से सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
घर में गणपति Ganesh Chaturthi 2025 की स्थापना और पूजा विधि
1. पूजन का शुभ समय
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गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न (दोपहर) में गणपति जी की स्थापना करना सबसे उत्तम है।
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यदि संभव न हो तो प्रातःकाल भी पूजा की जा सकती है।
2. पूजा की तैयारी
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घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूजाघर को साफ-सुथरा करें।
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एक पाटे या चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
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उस पर गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें।
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पास में जल से भरा हुआ कलश, नारियल और आम के पत्ते रखें।
3. पूजा सामग्री
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रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत (चावल)
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दूर्वा (तीन पत्तियों वाली हरी घास)
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लाल फूल (विशेषकर गेंदा)
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मोदक, लड्डू, गुड़ और फल
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नारियल, पान, सुपारी, कपूर
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धूप-दीप, अगरबत्ती
4. पूजन विधि Ganesh Chaturthi 2025
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संकल्प – सबसे पहले हाथ में जल और पुष्प लेकर संकल्प लें।
“मैं अमुक नाम इस गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश जी की पूजा अर्चना करता/करती हूँ, कृपया हमारे जीवन से सभी विघ्न दूर करें।” -
आवाहन और स्थापना – दीपक जलाकर भगवान गणेश का आवाहन करें –
“ॐ गणपतये नमः, आवाहयामि स्थापयामि।” -
अभिषेक – गणेश जी की मूर्ति पर जल, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएँ।
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वस्त्र और तिलक – लाल या पीले वस्त्र अर्पित करें और चंदन-रोली से तिलक करें।
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अर्पण – दूर्वा, लाल फूल, फल और मिठाई चढ़ाएँ। विशेषकर मोदक गणपति बप्पा का प्रिय भोग है।
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धूप-दीप और मंत्र जाप – दीपक और अगरबत्ती जलाएँ तथा मंत्रों का जाप करें –
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“ॐ गं गणपतये नमः” (21 बार)
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“वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥”
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आरती – अंत में गणपति जी की आरती करें। “जय गणेश देवा” या “सुखकर्ता दुखहर्ता” आरती का गान करें।
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प्रसाद वितरण – मोदक और लड्डू का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।
4. गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 पर क्या करें और क्या न करें?
करें ✅
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श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करें।
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गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अवश्य चढ़ाएँ।
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पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती और भजन करें।
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10 दिन तक गणपति जी की आराधना करें।
न करें ❌
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गणेश जी को तुलसी पत्र न चढ़ाएँ।
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पूजा स्थल को गंदा न रखें।
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मूर्ति की उपेक्षा न करें, प्रतिदिन दीपक और धूप दिखाएँ।
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विसर्जन से पहले मूर्ति को अकेला न छोड़ें।
5. पूजा का महत्व
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जीवन से विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं।
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घर में शांति और समृद्धि आती है।
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कार्यक्षेत्र और पढ़ाई में सफलता मिलती है।
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परिवार में प्रेम और सौहार्द बना रहता है।
✨ निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं और सुख, सौभाग्य तथा धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि भक्ति, उत्साह और आनंद का पर्व है।
जय गणेश देवा आरती 🌺
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
सूर्य चंद्रमा पूजें, नारद ऋषि गावे ।
नारद ऋषि गावे, नारद ऋषि गावे ॥
संतन की सेवा, गणपति मन भावे ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
सुखकर्ता दुखहर्ता आरती
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची ॥
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची ।
कंठी झळके माळ मुकताफळांची ॥ १ ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥
रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा ॥ २ ॥
हिरकणी जडित मुकुट शिर सोहेला ।
सोन्याचा कंठहार गळामंडिला ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥ ३ ॥
लंबोदर पितांबर फनीवरबंधना ।
सरळसोंड वक्रतुंड त्रिनयना ॥
दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे ॥ ४ ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥
धन्यवाद
Happy Beginning...
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1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
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