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गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 पर घर में गणपति की पूजा कैसे करें? गणेश चतुर्थी पर क्या करें और क्या न करें?

 

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 पर घर में गणपति की पूजा कैसे करें?

Ganesh Chaturthi 2025


प्रिय पाठक ,
नमस्कार ।
आज मैं  अच्छी जानकारी साझा करुँगी आज आप सब को बताऊंगी कि  बाप्पा की पूजा जो कल है अपने घर में हम खुद कैसे कर सकते है ।
गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का प्रमुख उत्सव है जिसे पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विघ्नहर्ता, मंगलकारी और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 का महत्व

  • गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता कहा जाता है, अर्थात् वे अपने भक्तों के सभी कष्ट और अवरोध दूर करते हैं।

  • यह दिन भगवान गणेश के पृथ्वी पर अवतरण का दिन माना जाता है।

  • गणेश जी को “प्रथम पूज्य” माना गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से होती है।

  • इस पर्व पर घर में गणपति की स्थापना करने से सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

घर में गणपति Ganesh Chaturthi 2025 की स्थापना और पूजा विधि

1. पूजन का शुभ समय

  • गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न (दोपहर) में गणपति जी की स्थापना करना सबसे उत्तम है।

  • यदि संभव न हो तो प्रातःकाल भी पूजा की जा सकती है।

2. पूजा की तैयारी

  • घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूजाघर को साफ-सुथरा करें।

  • एक पाटे या चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।

  • उस पर गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें।

  • पास में जल से भरा हुआ कलश, नारियल और आम के पत्ते रखें।

3. पूजा सामग्री

  • रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत (चावल)

  • दूर्वा (तीन पत्तियों वाली हरी घास)

  • लाल फूल (विशेषकर गेंदा)

  • मोदक, लड्डू, गुड़ और फल

  • नारियल, पान, सुपारी, कपूर

  • धूप-दीप, अगरबत्ती

4. पूजन विधि Ganesh Chaturthi 2025

  1. संकल्प – सबसे पहले हाथ में जल और पुष्प लेकर संकल्प लें।
    “मैं अमुक नाम इस गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश जी की पूजा अर्चना करता/करती हूँ, कृपया हमारे जीवन से सभी विघ्न दूर करें।”

  2. आवाहन और स्थापना – दीपक जलाकर भगवान गणेश का आवाहन करें –
    “ॐ गणपतये नमः, आवाहयामि स्थापयामि।”

  3. अभिषेक – गणेश जी की मूर्ति पर जल, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएँ।

  4. वस्त्र और तिलक – लाल या पीले वस्त्र अर्पित करें और चंदन-रोली से तिलक करें।

  5. अर्पण – दूर्वा, लाल फूल, फल और मिठाई चढ़ाएँ। विशेषकर मोदक गणपति बप्पा का प्रिय भोग है।

  6. धूप-दीप और मंत्र जाप – दीपक और अगरबत्ती जलाएँ तथा मंत्रों का जाप करें –

    • “ॐ गं गणपतये नमः” (21 बार)

    • “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
      निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥”

  7. आरती – अंत में गणपति जी की आरती करें। “जय गणेश देवा” या “सुखकर्ता दुखहर्ता” आरती का गान करें।

  8. प्रसाद वितरण – मोदक और लड्डू का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।

4. गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2025 पर क्या करें और क्या न करें?

करें ✅

  • श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करें।

  • गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अवश्य चढ़ाएँ।

  • पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती और भजन करें।

  • 10 दिन तक गणपति जी की आराधना करें।

न करें ❌

  • गणेश जी को तुलसी पत्र न चढ़ाएँ।

  • पूजा स्थल को गंदा न रखें।

  • मूर्ति की उपेक्षा न करें, प्रतिदिन दीपक और धूप दिखाएँ।

  • विसर्जन से पहले मूर्ति को अकेला न छोड़ें।

5. पूजा का महत्व

  • जीवन से विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं।

  • घर में शांति और समृद्धि आती है।

  • कार्यक्षेत्र और पढ़ाई में सफलता मिलती है।

  • परिवार में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। 

निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं और सुख, सौभाग्य तथा धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि भक्ति, उत्साह और आनंद का पर्व है।

जय गणेश देवा आरती 🌺

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

सूर्य चंद्रमा पूजें, नारद ऋषि गावे ।
नारद ऋषि गावे, नारद ऋषि गावे ॥
संतन की सेवा, गणपति मन भावे ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥


 सुखकर्ता दुखहर्ता आरती 

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची ॥

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची ।
कंठी झळके माळ मुकताफळांची ॥ १ ॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा ॥ २ ॥

हिरकणी जडित मुकुट शिर सोहेला ।
सोन्याचा कंठहार गळामंडिला ॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥ ३ ॥

लंबोदर पितांबर फनीवरबंधना ।
सरळसोंड वक्रतुंड त्रिनयना ॥

दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे ॥ ४ ॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥

उम्मीद है आपके लिए ये जानकारी लाभप्रद रहेगा 

धन्यवाद
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1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।(  कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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