आमलकी एकादशी :-(Amalaki Ekadashi )फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है।
13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 से शुरू होगी जो 14 मार्च 12 बजकर तक रहेगा चूकि उदया तिथि 14 तारीख को है अतः व्रत और पूजा 14 मार्च को ही होगी। सुख -समृद्धि के लिए रखें
आमलकी एकादशी का व्रत
प्रिय पाठक,
नमस्कार।
आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
१) आमलकी एकादशी कब है ?
२) आमलकी एकादशी का विशेष महत्त्व क्यों है ?
३) आमलकी एकादशी का पूजन कैसे करना चाहिए ?
४) व्यापार वृद्धि के किये आमलकी एकादशी का क्या खास उपाय ?
५ ) एकादशी का सामान्य नियम क्या है?
आमलकी एकादशी :- (Amalaki Ekadashi ) :-फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है।
13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 से शुरू होगी जो 14 मार्च 12 बजकर तक रहेगा।चूकि उदया तिथि 14 तारीख को है अतः व्रत और पूजा 14 मार्च को ही होगी।
आमलकी एकादशी नाम से ही प्रतीत होता है कि इस एकादशी में आंवले के पड़े की पूजा होती है मानयताओं के अनुसार आंवले के पड़े में भगवान् विष्णु का निवास होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन ब्रह्मा जी के आंसू भगवान् विष्णु के चरणों में गिरकर आंवले के पेड़ में बदल गए थे. तभी से इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा का महत्व है.
आमलकी एकादशी के दिन विष्णु भगवान् के अवतार परशुराम भगवान् की पूजा होती है आप उनकी तस्वीर आंवले के नीचे रखे या फिर विष्णु भगवान् की तस्वीर रखें ।
आंवले के पड़े के नीचे आसान बिछा कर भगवान् विष्णु के साथ आवंले के पड़े की भी पूजा की जानी चाहिए।
आंवले के पड़े के नीचे कलश स्थापित करें घी का दीया ,धुप ,,पुष्प, नैवेद्य व् भोग में आवंला का जरूर लगाए और विधि पूर्वक विष्णु भगवान् की पूजन करें कथा का श्रवण करें साथ ही साथ आरती भी करें। कथा और आरती के बिना पूजा पूर्ण व् संपन्न नहीं मानी जाती है।
जो व्यक्ति एकादशी का व्रत करते है उन्हें उस दिन आवंला का भोजन में प्रयोग जरूर करें।
मान्यता है कि आमलकी एकादशी बड़े पापों को नाश करने वाला होता है और इस दिन आंवला और भगवान् विष्णु की व्रत और पूजन करने यह दिन सब लोगो को मोक्ष देना वाला होता है तथा इसका फल 1000 गोदान के सामान फल को देना वाला होता है।
आमलकी एकादशी के दिन पूजा के समय करे ये उपाय :-
आमलकी एकादशी के दिन आवंला का पौधा लाये और रोज जल अर्पित करें और दीपक जलाये। जैसे-जैसे पौधा बढ़ता जायेगा आपके व्यापार में वृद्धि होगी।
फाल्गुन (phalgun) माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi)कहते है ।
इस दिन भगवान विष्णु जी का आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती हैऔर व्यक्ति सब सुख भोग कर
1) एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठे और स्नान आदि क्रिया से निवृत्त होकर तैयार हो जाये ।
2) पीले वस्त्र धारण करें और पीला चंदन अपने मस्तिष्क पर जरूर लगाएं ।
3) विष्णु भगवान के सामने पीला फूल, पीला फल , धूप और तुलसी अर्पित करें ।
4) शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करें ।
5) अगर संभव हो तो इस दिन व्रत जरूर करें और यदि पूर्ण व्रत न रख पाए तो एक समय उपवास कीजिये और
6) विष्णुसहस्रनाम का पाठ अति- उत्तम होता है और जितना हो सके नारायण के मंत्रो का जाप करें ।
7) आरती जरूर करें बिना आरती किये पूजा पूर्ण नही होती है ।
8) भोग में मेवा, पीला फल या ऋतु फल और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं ।
9) तुलसी के पत्ते भोग में जरूर होना चाहिए अन्यथा भोग पूर्ण नहीं होता है और मानते है कि तुलसी के बिना
10) एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है जो जातक व्रत नहीं करते है।
एकादशी व्रत के दिन व्रत करने वालो को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?
1)एकादशी के दिन भोजन पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिये ।
2)भोजन में आप फल ,मेवा, आलू, साबूदाना, शकरकंद सेंधा नमक,काली मिर्च ,अदरक और दूध से बनी भोजन का प्रयोग कर सकते है ।
धन्यवाद
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सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
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