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गुरु देव किन- किन चीजों के कारक है? तत्व ,रंग,धातु,लिंग राशि तथा दिशा ,उच्च एवम नीच राशि, गुरु की मित्र ग्रह , नक्षत्रों से संबंध , गुरु देव का दान , गुरु के रत्न, गुरु ग्रह का अशुभ प्रभाव, गुरु ग्रह से जुड़े व्यवसाय , गुरु देव की महादशा .

देव गुरु बृहस्पतिके बारे में सम्पूर्ण जानकारी -हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण 

प्रिय पाठक,

नमस्कार।  



मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

आज इस पोस्ट में आप  गुरु ग्रह व् देव गुरु बृहस्पति ( Guru Garh ) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे  इस पोस्ट में :-

 1)  देव गुरु बृहस्पति  किनकिन चीजों के कारक है?  Guru Dev kin kin chijo  ka karak hai ?

2) तत्व ,रंग,धातु,लिंग (Tatv , Rang , Dhatu , Ling )

3)राशि तथा दिशा  ( Rashi aur Disha ) 

4)उच्च एवम नीच राशि  ( Ucch aur Neech Rashi ) 

5) गुरु ग्रह की मित्र ग्रह ( Guru  ke Mitra garh )

6) नक्षत्रों से संबंध  (Guru  garh kaNakshtra  se sambandh  

7)  गुरु  ग्रह  का दान (Guru Dev Ka dan )

8)  गुरु  ग्रह के  रत्न  ( Guru Ke Ratna ) 

9)   गुरु ग्रह का अशुभ प्रभाव ( GuruDev ke Ashubh Prabhav )

10)  गुरु ग्रह से जुड़े व्यवसाय (Guru se jude vyavshay )

11 )  गुरु ग्रह  की महादशा ( Guruki Mahadasha ) 


गुरु  ग्रह के :- तत्व ,रंग,धातु,लिंग 

तत्व :-  बृहस्पति का आकाश तत्व है 

लिंग :- गुरु ग्रह को पुरुष ग्रह  कहा गया है।  

रंग :- गुरु का रंग पीला होता है 

धातु :-गुरु का धातु पीतल और सोना दोनों को माना  गया है 

राशि तथा दिशा  

राशि :- गुरु की धनु और मीन राशि  है  

दिशा :- गुरु उत्तर दिशा के स्वामी है 

उच्च एवम नीच राशि  -

 गुरु कर्क राशि मे उच्च के और मकर राशि मे नीच के होते है 

नक्षत्रों से संबंध 

पुनर्वसु , विशाखापूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों का स्वामी है 

गुरु की मित्र ग्रह:- 

सूर्य ,  चन्द्रमा , मंगल , बृहस्पति। 

देव  गुरु बृहस्पति की महादशा :- 

गुरु देव की 16  वर्ष की महा दशा होरी है।  ये ग्रह 13 महीना  तक एक राशि में होता है।  गुरु ग्रह के नाम से गुरूवार  दिवस का नामकरण हुआ है। 

 देव गुरु बृहस्पति किनकिन चीजों के कारक है?

सौर मंडल का बृहत और ज्वलंत ग्रह गुरु होते है और इनका रंग पीला प्रतीत होते है 

विद्या , शुभ कार्य ,यज्ञ कर्म करने वाला  , धर्म का प्रतीक , ब्राह्मण का प्रतीकपुत्रसोना , पालकी का कारक है । गुरु सुख का कारक है 


गुरु ग्रह से जुड़े व्यवसाय :-

अच्छे शिक्षक , प्रोफेसर  अच्छे ज्योतिष्कार , वास्तुशास्त्रीप्रवचन कार , पंडित , आध्यतमिक गुरु बन सकते है। 

  • स्कूल चलना , कॉलेज चलन अवं कोचिंग क्लास का व्यवसाय केर सकते है। 
  • पूजा - पाठ का दुकान ,मंदिर में इस्तेमाल होने वाले सामान  , किताबो का छापना व् बचाना का काम गुरु     ग्रह के अंतर्गत आता है। 
  • मिठाई बचना व् बनाने का काम गुरु ग्रह  के अंतर्गत आता है। 
  • गौशाला , समाज सेवा का काम , NGO का काम गुरु ग्रह के अंतर्गत आता है। 

गुरु ग्रह का अशुभ प्रभाव :-

 जातक अविश्वासीशंकालुस्वार्थी और चालक और विवेक हीन  होता है 

स्वस्थ पर गुरु ग्रह  का प्रभाव :- 

शरीर :- शरीर में गुरु मस्तिष्कचर्बी से होने वाले विकार एवं मोटापे के शिकार ,  नाक , कफ का कारक है  यह रक्तदोषयकृत में दोष उत्पन्न करता है   

गुरु ग्रह का अवस्था प्रभाव -शुभ / अशुभ :

  • शुभ गुरु होने पर जातक - गुणवानविद्यावानपुत्रवान संतोषी एवं धार्मिक होता है  जातक नीतिज्ञ , क्षमावान और दानी होता है 
    जातक धनीलक्ष्मीवान , न्यायप्रियशिक्षाविवेकीचरित्रवानबुद्धिमान , स्वास्थ्य एवं आयु के गुण प्रधान   करता है।
  • अशुभ गुरु होना पर :- जातक विद्याहीन , मूर्खनिःसंतान एवं असंतुष्ट रहता है 


गुरु  ग्रह की शांति के उपाय:-

गुरु ग्रह की शांति के लिए प्रत्येक गुरुवार के दिन व्रत रखें।  नमक न खाये। 

गुरु  ग्रह  का दान :-

बृहस्पति  ग्रह के शांति के लिए जातक पीला वस्त्रसोना , हल्दी , घी , पीली दाल , पीला फल , पीली मिठाई , अश्व और किताब होते है 

नोट :- कुंडली के अच्छे ग्रह से जुड़े वस्तुओं का दान  करना चाहिए। 

गुरु के रत्न (Guru ke Ratna ) :- 

गुरु का रत्न पुखराज माना गया है और उसको तर्जनी अंगुली में पहना जाता है 

 

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
Happy Beginning...
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