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नवरात्री के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा ,मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप की पूजा ,माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि ,माता ब्रह्मचारिणी का मंत्र का जाप , माता ब्रह्मचारिणी का भोग , नवरात्री के दूसरे दिन कौन सा रंग का वस्त्र पहने? माता ब्रह्मचारणी की प्रार्थना

 नवरात्री के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा 

(Navratri ke dusare  din Mata Brahmcharani  ki pooja karen ) 

प्रिय पाठक,

नमस्कार।  

मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-




 मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप की पूजा 

( Maa Brahmcharani ka swaroop ki pooja  )

शारदीय  नवरात्री के दूसरे  दिन माता के नौ रूप में से एक रूप माता ब्रह्मचारिणी  की पूजा की जाती है।  ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारणी का अर्थ है आचरण करने वाली। 

माता भगवती ने भगवन शिव को पति के रूप में पाने की लिए कठिन तपस्या की है और ब्रह्मचर्य का पालन किया था। 

इस तपस्या के कारण ही माँ के इस रूप का नाम ब्रह्मचारिणी कहा गया।  माँ अपने  दाहिने हाथ में अष्टदल की जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल धारण की हुए है। माँ का ये स्वरुप त्याग , तपस्या और सयंम का प्रतिक है। 

माता के इस स्वरुप की पूजा से व्यक्ति में तप -तपस्या ,सयंम और सदाचार में वृद्धि प्राप्त करता है और व्यक्ति अपने जीवन में  कठिन से कठिन स्थिति में पथ भ्रष्ट नहीं होता है। 

माता ब्रह्मचारिणी  की पूजा विधि 

(Mata Brahmcharini  ki pooja vidhi )

नवरात्री  के दूसरे दिन यानि 27 सितम्बर मंगलवार को माता  ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है इस दिन आप स्नान से निवृत होकर माता को पुष्प , दीप ,धुप ,लाल सिन्दूर अर्पित करें माँ को हरे रंग की चुनरी और वस्त्र पहनाये और  और माता को भोग अर्पित करें।  माता को भोग अर्पित करने के बाद माता के मंत्रो का जाप जरूर करें।  मंत्रो की संख्या कम से कम 11 व् 24 बार होना चाहिए। 

 माता  ब्रह्मचारिणी की पूजा में गुड़हल या कमल के फूल का ही प्रयोग करें और हरे रंग का वस्त्र  अर्पित करना चाहिए। 


माता ब्रह्मचारिणी  का मंत्र  का जाप 

(Mata Brahmcharini  ki Mantro ka jaap  )

माता ब्रह्मचारिणी  का ये मंत्र  आप 108 बार या कम से कम 11 बार जाप जरूर करें 

'ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम: 

और 

या देवी सर्वभू‍तेषु ,माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नम:॥

उसके बाद आप दुर्गा सप्तसती का या दुर्गा चालीसा या दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए।  पाठ पूरा होने के बाद मातारानी का आरती जरूर करें।  

माता ब्रह्मचारिणी  का भोग 

(Mata Brahmcharini  ki Bhog   )

माता ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाना चाहिए :- 

माता ब्रह्मचारिणी को द्वितीय तिथि को दूध , मिश्री व् शक्कर और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। 

माता रानी के आशीर्वाद स्वरुप व्यक्ति को दीर्घ आयु ,आरोग्यता  और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।  


नवरात्री के दूसरे  दिन कौन सा रंग का वस्त्र पहने? 

 navratri ke dusare  kaun sa rang ka vastra phene 

नवरात्री के नौ दिन किसी न किसी रंग से जुड़ा है और मातारानी के नवरात्री के समय माता के प्रिय रंग के कपड़े पहनते है।  

द्वतीये तिथि -  माता ब्रह्मचारिणी   को हरा रंग बहुत पसंद है अतः इस दिन माँ की पूजा के समय हरे   रंग की चुनरी और वस्त्र अर्पित करें और माँ को प्रशन्न करने के लिए आपको भी  हरा रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए।  


ये एक माता ब्रह्मचारिणी का स्त्रोत है द्वतीये तिथि  की पूजा के  समय  जरूर पढ़े।  (mata shailputri stotra ) 

श्री नव दुर्गा स्रोत्र 

( माता ब्रह्मचारणी की प्रार्थना  )

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम 

दास तेरे चरणों का पुजारी।  रखना लाज मेरी महतारी। 

(source :- चमन की श्री दुर्गा स्तुति ) 


इस पोस्ट को भी जरूर पढ़े :-



नवरात्री के 9 दिनों के लिए कौन सा रंग के कपड़े पहने -जो माता को प्रिय है।

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
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1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
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4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
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