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नवरात्री के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा , मां चंद्रघंटा का स्वरुप की पूजा ,माताचंद्रघंटा की पूजा विधि , माता चंद्रघंटा का मंत्र का जाप ,माता चंद्रघंटा का भोग ,नवरात्री के तीसरे दिन कौन सा रंग का वस्त्र पहने? माता चंद्रघंटा की प्रार्थना

 नवरात्री के तीसरे  दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा 

(Navratri ke dusare  din Maa Chandraghanta   ki pooja karen ) 

प्रिय पाठक,

नमस्कार।  

मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-



 मां चंद्रघंटा का स्वरुप की पूजा 

( Maa Chandraghanta ka swaroop )

शारदीय  नवरात्री के तीसरे दिन माता के नौ रूप में से एक रूप माता चंद्रघंटा  की पूजा की जाती है। माता के मस्तक पर घंटे के आकर का अर्ध चंद्र की आकृति होने के कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।  इस रूप में माँ सिंह पर सवार है और इस स्वरुप में माँ ने अपनी भुजाओं में गदा ,चक्र  , तलवार ,कमंडल ,कमल धनुष ,बाण और जप माला लिए हुए है। माँ चंद्रघंटा का ये स्वरुप भक्तो को साहसी और पराक्रमी बनता है। 

माता चंद्रघंटा की भक्ति से भक्तो के सभी दुःख दूर होते है और उनके सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण होते है।  


माता चंद्रघंटा की पूजा विधि 

(Mata Chandraghanta  ki pooja vidhi )

नवरात्री  के तीसरे दिन यानि 28 सितम्बर बुधवार  को माता  चंद्रघंटा  की पूजा का विधान है इस दिन आप स्नान से निवृत होकर माता को लाल  पुष्प , दीप ,धुप ,लाल सिन्दूर अर्पित करें माँ को भूरा रंग व् ग्रे कलर  का वस्त्र   पहनाये और माता को भोग अर्पित करें।  माता को भोग अर्पित करने के बाद माता के मंत्रो का जाप जरूर करें।  मंत्रो की संख्या कम से कम 11 व् 24 बार होना चाहिए। 

 माता  चंद्रघंटा की पूजा में लाल फूल का ही प्रयोग करें और भूरे रंग का वस्त्र  अर्पित करना चाहिए। 


माता चंद्रघंटा  का मंत्र  का जाप 

(Mata Chandraghanta ki Mantro ka jaap  )

माता चंद्रघंटा का ये मंत्र  आप 108 बार या कम से कम 11 बार जाप जरूर करें 

'ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटाये  नम: 

उसके बाद आप दुर्गा सप्तसती का या दुर्गा चालीसा या दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए।  पाठ पूरा होने के बाद मातारानी का आरती जरूर करें।  

माता चंद्रघंटा  का भोग 

(Mata Chandraghanta  ki Bhog   )

माता चंद्रघंटा  को क्या भोग लगाना चाहिए :- 

माता चंद्रघंटा को तृतीये  तिथि को दूध  का और दूध से बने चीजों का भोग लगाना चाहिए। 

माता रानी के आशीर्वाद स्वरुप व्यक्ति को सभी प्रकार की सुखों की  प्राप्ति होती है।  


नवरात्री के तीसरे   दिन कौन सा रंग का वस्त्र पहने? 

 navratri ke tesare din  kaun sa rang ka vastra phene 

नवरात्री के नौ दिन किसी न किसी रंग से जुड़ा है और मातारानी के नवरात्री के समय माता के प्रिय रंग के कपड़े पहनते है।  

तृतीया तिथि को  माता चंद्रघंटा को  पूजा के समय भूरा रंग की  वस्त्र अर्पित करें क्यूंकि  माता चंद्रघंटा   को  भूरा रंग व् ग्रे कलर  बहुत पसंद है और माँ को प्रशन्न करने के लिए आपको भी  भूरा  रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए।  


ये एक माता चंद्रघंटा  का स्त्रोत है तृतीये तिथि  को  पूजा के  समय  जरूर पढ़े। (Mata Chandraghanta   stotra ) 


श्री नव दुर्गा स्रोत्र 

( माता चंद्रघंटा  की प्रार्थना  )

जय माँ चंद्र घंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरा काम। 

चंद्र सामान तू शीतल दाती।  चंद्र तेज किरणों में समाती। 

क्रोध को शांत बनाने वाली। मिठे बोल सीखने वाली। 

मन की मालक मन भाती हों। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो। 

सुन्दर भाव को लेन वाली।  हर संकट में बजने वाली। 

हर बुधवार जो तुझे धयाये।  श्राद्ध सहित जो विनय सुनाये। 

मूर्ति चंद्र आकर बनाए।  सन्मुख घी की जोत जलाये 

शीश झुका कहे में की बाता।  पूर्ण आस करो जगतदातां। 

कांची पुर स्थान तुम्हारा।  कर्नाटिका में मान तुम्हारा। 

नाम तेरा रटूं महरानी।  'दास ' की रक्षा करो भवानी। 


(source :- चमन की श्री दुर्गा स्तुति ) 

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उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
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सबसे महत्वपूर्ण:-

1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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