आज मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आप लोग से बहुत अच्छे विषय के बारे में चर्चा करुँगी :- कालसर्प दोष
कालसर्प दोष बता कर , डरा कर आज कल हजारो रुपये की ठगी कर रहे है । चलिये विस्तार से जानते है
आखिर ये है क्या ?
इस पोस्ट में आप जानेगें:-
1) काल सर्प दोष होता क्या है और ये बनता कैसे है ? ( KaalSarp Dosh hota Kya hai ? )
2) कालसर्प दोष ( KaalSarp Dosh ) के कैंसलशन( cancellation ) योग (yog ) क्या होता है ?
3) क्या क्या छोटे -छोटे उपाय है कालशर्प दोष से मुक्ति मिलती है ? Kaalsarp upay
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कालसर्प दोष के लक्षण क्या है ? कुंडली में काल सर्प दोष हो किन-किन परेशानियों का
सामना करना पड़ता है ?
1) कार्यो में रुकावट और बार- बार बाधा उत्पन्न होता है ।
2) जीवन में कई बार उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।
3) महत्वकांक्षी होने पर भी पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं होती है।
4) स्वास्थ्य की समस्या लगी रहती है ।
5) संतान कष्ट होता है या तो संतान प्राप्त नही होती या फिर संतान रोगी और दुर्बल होती है।
6) धनवान परिवार में जन्मे लेने पर भी अप्रत्याशित रूपसे आर्थिक हानि उठानी पड़ती है ।
*******कालसर्प दोष से डरने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है।
काल सर्प दोष को दूर करने के सरल उपाय :-
kaal sarp dosh ko dur kerne ke upay
यदि कालसर्प दोष बन गया है तो ही छोटे - छोटे उपाय कर दोष को कम या किया जा सकता है :-
1) प्रतिदिन शिव परिवार की पूजा करें ।
2) हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ शुभ फलदायक होता है।
3) महामृत्युंजय जाप लाभदायक होता है ।
4) घर में मोर पंख रखें।
5) सबा महीने तक जौ के दाने पंछी को खिलाएं
*** नागपंचमी के दिन कालसर्प दोष निवारण हेतु योग्य पंडितजी से शांति भी करवा सकते है या आप
खुद भी कर सकते है। आपको चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर नागपंचमी के दिन शिव मंदिर
में शिवलिंग पर चढ़ाये। ये एक उत्तम उपायों में से एक है।
काल सर्प दोष होता क्या है ? काल सर्प दोष बनता कैसे है ? राहु और केतु के बीच में जब सारे ग्रह आते है तब काल सर्प दोष का निर्माण होता है।
कुंडली में सारे ग्रह राहु और केतु के 180 डिग्री के एक्सिस के अंदर आ जाये तो कालसर्प दोष बनता है ।
1) मान लीजिए कि लग्न में ( यदि पहेल भाव में ) राहु देव है और सप्तम भाव में केतु देव है और इनके मध्य ( दूसरे
भाव, तीसरे भाव , चौथ भाव , पाचवें भाव , छटा भाव )में यदि सारे ग्रह हो जैसे सूर्य चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र
और शनि देव तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है ।
मैंने पहला उदाहरण में प्रथम भाव से - सप्तम भाव का दिया ये किसी भी तरह से बन सकता है।
2) दूसरा उदाहरण से समझते है यदि राहु देव - चतुर्थ भाव में हो और केतु देव दशम भाव । और इनके दोनों
तरफ यदि ऊपर की तरफ( मतलब तीसरे भाव , दूसरे भाव , पहले भाव , बारहवें भाव , एकादश भाव )
मे सारे ग्रह चले जय तो कालसर्प दोष के निर्माण होता है ।
कालसर्प दोष का कैंसलशन( cancellation yog )योग के बारे में
जानते है:-Kaal sarp dosh ke cancelattion yoga )
1) कोई भी एक ग्रह भी राहु और केतु के एक्सिस 180 डिग्री से बाहर निकल जाए तो कालसर्प दोष का निर्माण नहीं होगा ।
2) राहु और केतु यदि उच्च राशि के हो तो दोष नही होगा ।
3) राहु यदि अपने मित्र राशि में हो और उसका मित्र राशि स्वमी कुंडली में अच्छे भाव मे हो तो दोष नहीं लगता है ।
*****बहुत सारे योगायोग है जो कालसर्प दोष बनाने ही नहीं देते।
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