प्रिय पाठक,
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
इस पोस्ट में बात करेंगे पंच महापुरुष योगों के बारे में:-
- कारक ग्रह और सम ग्रह होकर ही पंचमहापुरुष योग का निर्माण करते है
- केंद्र के अंदर स्वराशि व उच्च के ग्रह पंचमहापुरुष योग का निर्माण करते है ।
- डिग्री भी चेक करना है।
- मारक ग्रह कभी पंच महापुरुष योग का निर्माण नही करते है।
- सूर्य -चंद्रमा- राहु -केतु कभी भी पंच महापुरुष योग का निर्माण नही करते है ।
1) रुचक महापुरुष योग :- (Ruchak Mahapurush Yog )
- इस योग से व्यक्ति साहसी , बलशाली मतलब शरीर से मजबूत , ऊर्जावान और पराक्रमी होते है।
- जिन जातक के कुंडली में ये योग बनता है वो अपने बल और बुद्धि का उपयोग कर अपने जीवन में सब कुछ हासिल कर लेते है।
- रुचक महपुरुष वाले लोग पुलिस या सेना में बड़े ओहदों पर आसीन होते है और इन्हे भूमि -भवन का सुख प्राप्त होता है।
2) भद्र महापुरुष योग :- ( Bhadr Mahapurush Yog )
जातक की कुंडली में बुध देव कारक होकर जब स्वराशि यानि मिथुन व् कन्या राशि में और उच्च के यानि कन्या राशि में केंद्र में हो तो भद्रा महापुरुष योग का निर्माण करते है।
- जिस भी कुंडली में ये योग होता है वो अपने कर्म दक्षता से जीवन में अच्छे मुकाम हासिल करते है।
- जातक बोलने में माहिर, अच्छा वक्त , लेखक , विनम्र होता है।
- बुद्धि तीब्र और तार्किक शक्ति अच्छी होती है और व्यवसाय में निपुण होता है।
3) हंस महापुरुष योग :- ( Hans Mahapurush Yog )
पांच महापुरुष योग में से एक योग हंस महापुरुष योग बृहस्पति ग्रह की योगदान से बनता है। जब गुरु ग्रह स्वरशि यानि धनु या मीन में हो और गुरु अपने उच्च राशि यानि कर्क में होकर केंद्र में हो तो हंस महापुरुष योग का निर्माण करते है।
- जातक ज्ञानवान, बुद्धिमान और धार्मिक प्रवृति का होता है।
- और समाज में इनको मान -सामान प्राप्त होता है।
- उनका लोग अनुसरण करते है।
- वो एक बेहतर मैनेजर और शिक्षक होते है।
4) मालव्य महापुरुष योग ( Malavya Mahapurush Yog )
मालव्य महापुरुष योग का निर्माण शुक्र देव के उच्च राशि यानि मीन राशि और अपनी राशि यानि वृषभ और तुला राशि में हो कर यदि केंद्र स्थान में हो तो मालव्य महापुरुष योग का निर्माण होता है।
- जातक देखने में आकर्षक और सुन्दर होता है।
- जातक को जीवन में सुख समृद्धि , वैभव पूर्ण जीवन की प्राप्ति होती है।
- और व्यक्ति ग्लैमर वर्ल्ड जैसे फ़िल्म , मिडिया ,डांस, गाने आदि में सफल होते है।
5) शश महापुरुष योग (Shash Mahapurush Yog )
शश महापुरुष योग शनि देव के स्वराशि यानि मकर व् कुम्भ राशि में होने पर या उच्च के होने से यानि तुला राशि में होने पर शश महापुरुष योग का निर्माण होता है ये योग केंद्र में यानि पहले भाव , चतुर्थ भाव , सप्तम भाव और दशम भाव में होने से बनता है।
- शनि के शश महापुरुष योग से जातक न्याय प्रिय होता है।
- सत्य का साथ देते हुए नजर आएंगे।
- शनि नौकरी का करक ग्रह माना गया है अतः जातक जीवन में नौकरी करेंगे और अपने जीवन में तरक्की करेंगे। कर्म भाव में यदि ये योग बने तो जातक उच्च सरकारी पद को भी प्राप्त कर लेता है।
5) चलिए एक उद्धरण से समझते है :- मेष लग्न की कुंडली लेते है।
Example for Panch Mahapurush yog - ruchak Mahapurush Yog
- मंगल मेष लगन की कुंडली में लग्नेश है और लगन में बैठे है और रुचक महापुरुष योग का निर्माण कर रहे है तो व्यक्ति की पर्सनालिटी बोल्ड होगी। जातक साहसी, आकर्षक ,पराक्रमी और ऊर्जावान होगा।
- मंगल की चतुर्थ दृष्टि चतुर्थ भाव पर होने जातक के जीवन में सुख पर्याप्त मात्रा में होगी जैसे घर, जमीन, वाहन आदि।
- मंगल की सप्तम दृष्टि सप्तम भाव पर होने से जातक का दांपत्य सुख अच्छा रहेगा और पाटनर्शिप अच्छी रहेगी और एक से अधिक आय के स्त्रोत हो सकते है।
- मंगल की अष्टम दृष्टि अष्टम भाव पर होने से अष्टम भाव से प्राप्त फल जैसे टेंशन , डिप्रेशन, कार्यो में रुकाबट को अपने सहस और ऊर्जा के दम पर ख़त्म करते हुए नजर आएंगे। ससुराल में मान-सम्मान मिलेगा।
- सामनायतः कोई भी राज योग का फल उनके महादशा -अन्तर्दशा में ही मिलता है।
- डिग्री जरूर चेक करना है यदि मंगल की डिग्री 1-2-3 या फिर 27-28-29 के हो तो पंच महापुरुष राज योग का फल नहीं मिलेगा।
- मंगल सूर्य से अस्त नहीं होना चाहिए यदि अस्त हुए तो भी ये राजयोग नहीं बनेगा।
- ग्रह कुंडली का कारक ग्रह और सम ग्रह होना चाहिए।
यहाँ शुक्र स्वराशि का होकर भी मालव्य महापुरष योग का निर्माण नहीं करेंगे क्यूंकि शुक्र ग्रह मेष लगन की कुंडली के लिए मारक व् अकारक ग्रह है।
आप इस पोस्ट को भी जरूर पढ़े ताकि आप समझ सके कि कौन सा ग्रह आपके जन्म कुंडली के लिए करक है या नहीं
1 से 12 तक के लग्न में कारक ,अकारक ,सम और भाग्योदय ग्रह
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com


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