प्रिय पाठक
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
ग्रहों की राशि (Garh Ki Rashi) , उच्च राशि(Ucch Rashi ) व् नीच राशि (Neech Rashi ) , मित्र राशि , सम राशि और शत्रु राशि (Satru Rashi )और रत्न ( Ratan)
1) ग्रह और राशि
2) ग्रह और उच्च राशि
3) ग्रह और नीच राशि
4) ग्रह और उनके मित्र , सम , शत्रु राशि
5) ग्रह और रत्न
1)ग्रह और राशि :-
कोई भी ग्रह अपनी राशि में हो तो अच्छे फल ही देते है।
| ग्रह | राशि |
1 | सूर्य | सिंह राशि |
2 | चंद्रमा | कर्क राशि |
3 | मंगल | मेष राशि और वृश्चिक राशि |
4 | बुध | मिथुन राशि और कन्या राशि |
5 | गुरु | धनु राशि और मीन राशि |
6 | शुक्र | वृषभ राशि और तुला राशि |
7 | शनि | मकर और कुंभ राशि |
8 | राहु | - |
9 | केतु | - |
2) ग्रह और उच्च राशि:-( Garh aur Ucch Rashi )
हर ग्रह की एक उच्च राशि होती है यदि ग्रह अपने उच्च राशि में हो तो बहुत अच्छा फल प्रधान करती है।
| ग्रह | उच्च राशि |
1 | सूर्य | मेष राशि |
2 | चंद्रमा | वृषभ राशि |
3 | मंगल | मकर राशि |
4 | बुध | कन्या राशि |
5 | गुरु | कर्क राशि |
6 | शुक्र | मीन राशि |
7 | शनि | तुला राशि |
8 | राहु | वृषभ राशि , मिथुन राशि |
9 | केतु | वृश्चिक राशि, धनु राशि - |
3) ग्रह और नीच राशि:-
कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो तो वो बाध्य है ख़राब फल देने के लिया।
कुंडली का करक ग्रह होने पर भी यदि कोई ग्रह नीच का हो तो भी अच्छे फल देते नजर नहीं आएंगे।
| ग्रह | नीच राशि |
1 | सूर्य | तुला |
2 | चंद्रमा | वृश्चिक |
3 | मंगल | कर्क |
4 | बुध | मीन राशि |
5 | गुरु | मकर |
6 | शुक्र | कन्या |
7 | शनि | मेष राशि |
8 | राहु | वृश्चिक राशि, धनु राशि |
9 | केतु | वृषभ राशि , मिथुन राशि |
4) ग्रह और उनके मित्र , सम , शत्रु राशि :-
ग्रहों की मित्र और शत्रु ग्रह के बारे में जानना जरुरी है। ग्रह अपने मित्र राशि में हो या मित्र राशि के साथ हो तो शुभ फल देते है। इसके विपरीत यदि ग्रह अपने शत्रु राशि में हो या फिर शत्रु राशि के साथ हो तो शुभता में कमी आती है और सम ग्रह व् राशि में यदि कोई ग्रह हो तो कुंडली के प्लेसमेंट पर उसकी शुभता निर्भर करती है।
ग्रह | मित्र | सम ग्रह | शत्रु |
सूर्य | चन्द्रमा , बृहस्पति , मंगल | बुध | शुक्र , शनि |
चन्द्रमा | सूर्य , बृहस्पति | मंगल, बुध, शुक्र , शनि | कोई नहीं |
मंगल | सूर्य , चन्द्रमा , बृहस्पति | शुक्र , शनि | बुध |
बुध | सूर्य , शुक्र ,बुध | मंगल , बृहस्पति , शनि | चन्द्रमा |
गुरु | सूर्य , चंद्र , मंगल | शनि | बुध , शुक्र
|
शुक्र | बुध , शुक्र , शनि | मंगल , बृहस्पति | सूर्य , चन्द्रमा
|
शनि | बुध , शुक्र | बृहस्पति | सूर्य ,चन्द्रमा, मंगल
|
5) ग्रह और रत्न:-
ज्योतिष शास्त्र में रत्नो का अत्यधिक महत्त्व है। ग्रहों को बल देने के लिए रत्न पहनें के सलाह दी जाती है परन्तु रत्न हमेशा उन ग्रहों का पहने जो आपके कुंडली के कारक ग्रह हो और वो कुंडली में अच्छे भाव में उपस्थित हो।
मारक ग्रह , नीच के ग्रह और 6 ,8 ,12 भाव में बैठ ग्रह का रत्न कभी धारण नहीं करना चाहिए।
| ग्रह | रत्न |
1 | सूर्य | माणिक्य |
2 | चंद्रमा | मोती |
3 | मंगल | मूंगा |
4 | बुध | पन्ना |
5 | गुरु | पुखराज |
6 | शुक्र | हीरा |
7 | शनि | नीलम |
8 | राहु | गोमेद |
9 | केतु | लहसुनिया |
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
****आपलोग अपने किसी भी समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com
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