प्रिय पाठक
नमस्कार
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
ग्रहों से जाने जातको का तत्त्व , लिंग , गुण ,स्वाद और कद ।
1) ग्रह और तत्व (Garh aur Tatv )
2) ग्रह और लिंग ( Garh aur Ling )
3) ग्रहों और गुण ( Garh aur Gunn)
4) ग्रह और स्वाद( Garh aur Swad)
5) ग्रह और कद( Garh aur kad)
ग्रह और तत्व
पूरा ब्रह्मांड पांच तत्व से बना होता है पृथ्वी, आकाश, वायु, जल और अग्नि।
ग्रहों को इन पांचों तत्व में बांटा गया है । और इन तत्व के आधार पर उनके स्वभाव और व्यवहार को बताया जाता है।
| ग्रह | स्वाद |
1 | सूर्य | अग्नि |
2 | चंद्रमा | जल |
3 | मंगल | अग्नि |
4 | बुध | पृथ्वी |
5 | गुरु | आकाश |
6 | शुक्र | जल |
7 | शनि | वायु |
8 | राहु | वायु |
9 | केतु | वायु |
वायु तत्व :-( Vayu tatv)
इनका स्वभाव वैसे शांत होता है परंतु वायु के कारण व्यवहार में कब क्षणिक बदलाब हो जाय पता नही चलता कब शांति तूफान में बदल जाए ।
पृथ्वी तत्व :- ( Prithvi Tatv )
पृथ्वी तत्व के जातक सबसे ज़्यादा सहनशीलता और सेवा भावना का अंश पाया जाता है ।
अग्नि तत्व :-( Agni Tatv)
इस तत्व के जातक सूर्य की ऊष्मा और अग्नि से परिपूर्ण होते है । ये लोग अपने चरित्र में प्रेरणात्मक, प्रकाशमान और स्पष्टता पाए जाते है ।
जल तत्व :-( jal Tatv )
जातक का स्वभाव शांत, मधुर , और जल की भांति मंद-मंद बहते हुए स्वर से होता है । इस प्रकृति के लोग स्वच्छ और निर्मल विचारो के स्वामी होते है ।
आकाश तत्व :-( Aakash Tatv )
सम्पूर्ण ब्रमांड को आकाश की संज्ञा दी गयी है । विशाल और वृहत सौरूप , विशाल हृदय, सत गुण आदि के स्वामी है।
ग्रह और लिंग
| ग्रह | लिंग |
1 | सूर्य | पुरूष |
2 | चंद्रमा | स्त्री |
3 | मंगल | पुरूष |
4 | बुध | नपुंसक |
5 | गुरु | पुरूष |
6 | शुक्र | स्त्री |
7 | शनि | पुरुष |
8 | राहु | पुरूष |
9 | केतु | पुरूष |
ग्रहों के लिंग के बारे में जानना इसलिए जरूरी है क्यूंकि जो ग्रह भाव मे उपस्थित रहते है उसके अनुसार फलादेश किया जाता है जैसे यदि सूर्य प्रथम भाव या लग्न में हो तो जातक में पुरुषों जे गुण विद्यमान होते है । व्यक्तित्व आकर्षक होगा और उनमें राजा सदृश्य गुण पाए जाएंगे।
और प्रथम भाव में चन्द्रमा हो जातक में स्त्री के समान सौम्य , शीतलता, माँ के समान दयालु और बहुत देखभाल करने वाला होगा ।
पंचम भाव को संतान का भाव कहा जाता है और यदि वह पर पुरूष ग्रह हो तो कहते है पुत्र की प्राप्ति होगी और यदि स्त्री ग्रह हो तो कन्या रत्न की प्राप्ति होगी ।
और पंचम भाव मे यदि बुध ग्रह हो , नपुंसक ग्रह माना जाता है तो संतान प्राप्ति संबंधित ज्यादा होगी या फिर संतान नहीं होगी ।
इस तरह से ग्रहों के लिंग को जानने से स्वभाव और बहुत सी बातों को जाना जा सकता है ।
ग्रहों के गुण
तीन प्रकार के गुणों की व्याख्या है:-
1) सत गुण:- सूर्य चंद्रमा, और देव गुरु वृहस्पति ।
2) रज गुण:- बुध और शुक्र ग्रह
3) तामस और तमो गुण:- मंगल , शनि, राहुऔर केतु।
ग्रह और स्वाद
प्रत्येक ग्रह के भिन्न भिन्न स्वाद प्रिय है कहने का मतलब है कि ग्रहो की उपस्थिति से जातक को किस तरह का भोजन पसंद है पता चलता है।
जैसा कि हम जानते है कि दूसरा भाव से भोजन भी देखा जाता है और यदि दूसरे भाव मे चंद्रमा है तो हम कह सकते है कि जातक को खाने में नमकीन पसंद है ।
| ग्रह | स्वाद |
1 | सूर्य | कड़वा |
2 | चंद्रमा | नमकीन |
3 | मंगल | तीखा |
4 | बुध | मिश्रित( खट्टा, मीठा, नमकीन) |
5 | गुरु | मीठा |
6 | शुक्र | खट्टा |
7 | शनि | कड़वा |
8 | राहु | तीखा |
9 | केतु | फीका |
ग्रह और कद
ग्रहो के अनुसार जातक का कद होता है ।प्रथम भाव में जो ग्रह होते उनको देख कर जातक के कद का पता चलता है।
| ग्रह | स्वाद |
1 | सूर्य | समान्य |
2 | चंद्रमा | लम्बा |
3 | मंगल | छोटा |
4 | बुध | सामान्य |
5 | गुरु | मध्यम |
6 | शुक्र | मध्यम |
7 | शनि | बहुत लंबा |
8 | राहु | मध्यम |
9 | केतु | छोटा कद |
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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