देव गुरु बृहस्पति का गोचर 13 अप्रैल से शनि की कुम्भ से अपने ही राशि - मीन राशि में गोचर - सात (7) कौन -कौन सी भाग्यशाली राशि जिसको मिलेगा गुरु का साथ और चमकेगी किस्मत : - उपाय सहित
( Guru Ka Gochar 2022) Mesh Rashi se Meen Rashi pr Kya Prabhav Rahega )
प्रिय पाठक
नमस्कार।
शास्त्रों के अनुसार यदि सार्वजिक ग्रहो का फल यदि करना हो या जानना हो तो वो चंद्र राशि से की जाती है अतः गुरु का गोचर आप अपनी चन्द्र राशि से ही देखें ।
अपनी चंद्र राशि जानने और गुरु की स्थति जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :
ऑनलाइन कुंडली बनती कैसे है? राशि कितने और कौन कौन से है ? 9 ग्रहों को क्या- क्या राशि दी गयी है ?
**** आप अपनी जन्म कुंडली में गुरु के उपस्थिति किस भाव में है जरूर देख ले यदि वो 6-8-12 भाव में न हो और जहाँ 10 नंबर लिखा हो वहां न हो 10 राशि में गुरु नीच के होते है। अगर ऐसा है तो देव गुरु बृहस्पति कभी भी अच्छे फल नहीं देंगे।
और आपको उपाय करने ही होंगे अच्छे फल की प्राप्ति के लिए।
नोट : -यदि आपकी कुंडली में की स्थति अच्छी है तो आपको अच्छे व् सम फल प्राप्त होगें।
कारक और अकारक कुंडली अनुसार जानने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें :-
आज इस पोस्ट में हम लोग देव गुरु बृहस्पति के गोचर की बात करेंगे।
आज हम बात करेंगे की ग्रहो में सबसे शुभ ग्रह की जो लगभग 13 महीनो तक आपके लिए लाभ कारी रहेंगे।
13 अप्रैल को कुंभ राशि से मीन राशि में गोचर करेंगे।
सबसे पहले हम ये जानेंगे की देव गुरु बृहस्पति का कारकत्व क्या है ?
- देव गुरु बृहस्पति जो है :- ज्ञान के कारक है। धार्मिक प्रवृति के कारक है।
- देव गुरु बृहस्पति धन के कारक है।
- लड़की के लिए पति और सन्तान के कारक है।
- लड़कियों के लिए विवाह के कारक है।
आज इस पोस्ट में आप जानेंगे की मेष से लेकर मीन तक देव गुरु बृहस्पति का क्या फल आपको प्राप्त होगा और जिस राशि या लगन के लिए थोड़ी यदि समस्या हो तो उपायों की भी चर्चा करेंगे।
चलिए राशि अनुसार इनके प्रभाव की चर्चा करते है : -
मेष राशि : -
मेष राशि के जातक के लिए गुरु का गोचर मीन राशि में बारवें भाव होगा परन्तु देव गुरु बृहस्पति अपनी ही राशि में रहेंगे।
मेष राशि के लिए देव गुरु बृहस्पति भाग्य भाव के स्वामी भी है और कुंडली के लिए कारक ग्रह है जैसा की आप सब जानते है की कारक ग्रह अच्छे फल देते है अपने उपस्थिति के अनुसार।
मीन राशि व् स्वराशि के होने से मेष राशि के जातक के लिए देव गुरु अच्छे रहेंगे और मेष राशि के जातक के बारवें भाव में होने से जातक के लिए अच्छे फल देंगे परन्तु थोड़ी परेशानी भी रहेंगी।
- आपके के ख़र्चे तो होने परन्तु अच्छे कामो में होगें इन्वेस्टमेंट कर सकते है।
- स्थान्तरण के योग रहेगा।
- आप विदेश से जुड़े काम करते है तो आपको लाभ होगा।
- विदेश सेटलमेंट या विदेश जाना पढ़ाई के लिए जाना चाह रहें है तो सही समय है ।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि- चतुर्थ भाव पर होने से :-
- भूमि-भावन- वाहन के इन्वेस्टमेंट से बचें।
- माता से अच्छे सम्बंद बनाये रखें और उनका ख्याल रखें।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृष्टि- छटे भाव पर होने से :-
- आप लोन व् कर्ज लेने से बचें।
- आपने कार्य क्षेत्र पर सजक रहें।
- आपने खान पान ध्यान रखें और योग -आसान कीजिये।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृस्टि -अष्टम भाव पर होने से :
- थोड़े कार्य में रूकावट रहेंगी
- कार्यो को लेकर चिंता रहेंगी।
यदि आपके जन्म कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पिले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
वृषभ राशि :-
वृषभ के जातक की कुंडली में देव गुरु बृहस्पति अकारक ग्रह है और एकादश भाव में होंगे।
कोई भी ग्रह यदि अपनी राशि व् स्वराशि में हो या उच्च के हो तो उस भाव का फल अच्छा देते है।
देव गुरु बृहस्पति वृषभ राशि के लिए एकादश भाव से जुड़े अच्छे फल देंगे।
- इच्छापूर्ति होगी यदि आपके मन के मुताबिक कार्य जो काफी दिनों से आप करना चाहते हैं।
- सामाजिक दायरा बढ़ेगा।
- बड़े भाई बहन का साथ व् सहयोग प्राप्त होगा।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि -पराक्रम भाव पर होने से :
- आपके पराक्रम भाव में गुरु अपनी उच्च राशि को देखेंगे इसलिए आपको मेहनत का फल प्राप्त होगा
- छोटी- मोटी यात्रा करनी पड़ सकती है।
- छोटे भाई-बहन से अच्छे सम्बन्ध रहेंगे।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृष्टि- पंचम भाव पर होने से :
- संतान से सम्बन्धी चिंता रहेगा।
- जुआ -सट्टा - शेयर ट्रेडिंग से बचें ।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृष्टि -सप्तम भाव पर होने से
- वृषभ का जातक का विवाह का योग बनेगा।
- पाटनर्शिप करने से बचे।
उपाय : -
1) गुरुवार को व्रत करें। पीले पुष्प और मिठाई चढ़ाये।2) केले का दान , चना दाल का दान , बेसन का दान कर सकते है हर गुरूवार को।
3) मंदिर व् गाय की सेवा करें। गुरूवार को गाय को चना और गुड़ खिलाये।
***** आपको पीली वास्तु का दान करना है। इस्तेमाल नहीं करना है।
मिथुन राशि : -
मिथुन राशि के जातक के लिए गुरु योग कारक ग्रह होता है और सप्तम और दशम भाव के स्वामी होते है।
मिथुन राशि के लिए गुरु का गोचर अति उत्तम फल देते हुए नजर आएंगे. गुरु कर्म भाव में होने से हंस महापुरुष योग का निर्माण करते है अतः
- जातक नौकरी करता हो या व्यवसाय दोनों में ही अच्छे लाभ प्राप्त करेंगे।
- मान -सामान बढ़ेगा।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि - दूसरे भाव पर होने से :
- कर्म के फलस्वरूप धन का आगमन होगा।
- कुटुंब परिवार में मान- सामान बढ़ेगा।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - चतुर्थ भाव पर होने से : -
- भौतिक सुखों में वृद्धि के योग है यदि आप बहुत दिनों से अपना घर लेने और बनाने का सोच रहें है तो जरूर प्रयास कीजिये।
- माता का सुख उत्तम रहेगा।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृस्टि -छठे भाव पर होने से : -
- यदि आप किसी भी प्रकार से रोगो से परेशान है तो आपको छुटकारा मिलेगी।
- ऋण - और शत्रु से परेशान है तो आपको राहत मिलेंगे।
- यदि आप किसी प्रतियोगिता परीक्षा दे रहे है तो उसमे सफल प्राप्त करने की संभावना है।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पीले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
कर्क राशि :-
कर्क राशि के जातक के लिए गुरु कारक ग्रह होते है अतः उत्तम फल देते हुए नजर आएंगे।
गुरु उनकी राशि में छठे भाव के साथ भाग्य स्थान का मालिक है।
- भाग्य स्थान में होने पर जातक को भाग्य का पूर्ण रूप से साथ मिलेगा।
- धार्मिक प्रवृति बढ़ेगी मतलब घर में आप धार्मिक अनुष्ठान कर सकते है या यात्रा कर सकते है।
- पिता के साथ अच्छे सम्बन्ध रहेंगे।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि -लग्न पर होने से : -
- आपके आचार विचार और व्यवहार उत्तम कोटि का रहेगा।
- आपका स्वस्थ अच्छा रहेगा।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - पराक्रम भाव पर होने से : -
- आपको आपके मेहनत के अनुरूप फल की प्राप्ति होगी।
- छोटी -मोटी यात्रा के योग है और उसके फलस्वरूप लाभ प्राप्त होगा।
- छोटे भाई-बहन से अच्छे सम्बंद रहेगा।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृस्टि - पंचम भाव पर होने से : -
- आपको आकस्मिक धन लाभ हो सकता है।
- छात्रों के लिए बहुत अच्छा समय। उच्च शिक्षा के एडमिशन के लिए यदि कोशिश कर रहे है तो सफल होंगे।
- संतान पक्ष से संतोष जनक स्थति रहेगी।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पिले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
सिंह राशि : -
सिंह राशि के जातक के लिए गुरु कारक ग्रह है परन्तु जातक के कुंडली में अष्टम भाव में रहेंगे।
अष्टम भाव में स्वराशि का होने से अष्टम भाव से जुड़े परेशानी से आपको मुक्ति मिलेंगे
आप किसी रिसर्च वर्क से जुड़ सकते है और आपको आपके ससुराल में मान सामान भी प्राप्त होगा।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि - बारवां भाव पर होने से : -
- आपका खर्चा बढ़ा रहेगा आपको अपने खर्च को नियंत्रित करना है।
- आपके विदेश जाने के या सेटलमेंट के योग बनेगे।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - धन भाव पर होने से : -
- खर्च बढ़ेगा अतः धन संचय में परेशानी होगी।
- अपने कुटुंब परिवार में मतभेद हो सकते है अपने संबंध को संभाले।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृस्टि - चतुर्थ भाव पर होने से : -
- माता का स्वास्थ का धयान रखिये
- और अभी प्रॉपर्टीज में इन्वेस्टमेंट नहीं करें।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पीले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
कन्या राशि : -
कन्या राशि के जातक के लिए गुरु अति योग कारक ग्रह है और वो सप्तम भाव में रहेंगे
- जातक के विवाह का योग बने हुए है जो जातक विवाह के इच्छुक है या योग्य है।
- आपका वैवाहिक सुख अच्छा रहेंगे।
- पाटनर्शिप से जुड़े काम अच्छे रहेंगे
- और दैनिक रोजकार भी अच्छा रहेगा।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि-आय व् एकादश स्थान पर होने से : -
- एक से अधिक आय के स्त्रोत बनेंगे
- इच्छापूर्ति का योग रहेगा यदि आप बहुत दिनों से कुछ लेने की सोच रहें थे आप ले सकते है। कोई अटका काम पूरा हो सकता है।
- सामाजिक दायरा बढ़ेगा। मित्रो का सहयोग मिलेगा
- बड़े भाई-बहन से रिश्ते अच्छे रहेंगे।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - लगन भाव पर होने से : -
- आपका आचार -विचार-व्यवहार उत्तम कोटि का रहेगा।
- आपका स्वास्थ उत्तम रहेगा।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - पराक्रम भाव पर होने से : -
- आपको आपके मेहनत अनुरूप फल की प्राप्ति होगी।
- छोटी -मोटी व्यापारिक यात्रा रहेंगी
- छोटे भाई -बहन से सम्बन्ध अच्छे रहेंगे।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पीले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
तुला राशि :-
तुला राशि के जातक के लिए गुरु अकारक ग्रह है और पराक्रम भाव और छठे भाव के स्वामी है और गुरु छठे भाव में होंगे।
- जातक को रोग -ऋण- शत्रु से मुक्ति मिलेंगे
- छात्र जो प्रतियोगिता परीक्षा दे रहे उनको सफलता मिलने का योग है।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि- कर्म भाव पर होने से
- नौकरी व् व्यवसाय में परेशानी का सामना करना पड़ है।
- यदि इस समय आप नौकरी बदलना चाहते है तो रुक जाये।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - बारवां भाव पर होने से:-
- विदेश यात्रा व् सेटलमेंट के योग बना कर देगा।
- फिजूल के खर्चे करवाएगा। अपने खर्चे को नियंत्रित रखे।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृस्टि - धन भाव पर होने से:-
- अत्यधिक फ़िजूल के खर्चो के कारण धन संचय में परेशानी होगी।
- अपने कुटुंब परिवार संबंध अच्छे रखें ।
उपाय : -
1) गुरुवार को व्रत करें। पीले पुष्प और मिठाई चढ़ाये।2) केले का दान , चना दाल का दान , बेसन का दान कर सकते है हर गुरूवार को।
3) मंदिर व् गाय की सेवा करें। गुरूवार को गाय को चना और गुड़ खिलाये।
***** आपको पीली वास्तु का दान करना है। इस्तेमाल नहीं करना है।
वृश्चिक राशि :-
वृश्चिक राशि के जातक के लिया गुरु का गोचर उत्तम फल देने वाला होगा।
गुरु वृश्चिक राशि वाले के लिए कारक ग्रह है और धन भाव और पंचम भाव का स्वामी है।
पंचम भाव में गुरु की उपस्थिति से
- जातक को अचानक धन लाभ के योग है।
- संतान पक्ष से किसी भी प्रकार की चिंता दूर होगी।
- यदि आप स्टूडेंट है तो आपकी एडमिशन अच्छे जगह ले सकते है और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि - भाग्य भाव पर होने से:-
- भाग्य का साथ मिलेगा।
- धार्मिक अनुष्ठान आप करवा सकते है घर पर।
- पिता से अच्छे सम्बंद रहेंगे।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि - एकादश भाव पर होने से:-
- एक से अधिक आय के स्रोत होंगे।
- आपकी की कोई इच्छा या काम जो काफी दिनों से अटका हुआ था वो पूरा होगा।
- सामाजिक दायरा बढ़ेगा और मित्रों का साथ प्राप्त होगा।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृस्टि - लग्न पर होने से:-
- आपके आचार -विचार-वयवहार उत्तम कोटि के होंगे।
- आप स्वस्थ रहेंगे।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पीले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
धनु राशि :-
देव गुरु बृहस्पति का धनु राशि मे गोचर अत्यंत शुभ फल ही देंगे। धनु राशि गुरु की स्वराशि है और गुरु हंस महापुरुष योग का निर्माण करेंगे।
गुरु का गोचर धनु राशि मे चतुर्थ भाव में होगा । चतुर्थ भाव यानी सुख का भाव।
- भूमि -भवन-वाहन का सुख । आप यदि घर लेने की सोच रहे है या गाड़ी लेने चाहते है तो सही समय है आप अपना घर खरीद सकते है ।
- माता के स्वास्थ्य और संबंद अच्छे रहेंगे।
- जातक यदि राजनीति में है तो उनको जनता का साथ प्राप्त होगा ।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृस्टि - छठा भाव पर होने से: -
- आपको किसी भी प्रकार की कर्ज की स्थति से निकलते नजर आएंगे ।
- कोई भी स्वास्थ्य सम्बंधित परेशानी हो तो आपको आराम मिलेगा ।
- कॉम्पिटिशन परीक्षा में सफलता के योग है ।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृष्टि- कर्म भाव पर होने से:-
- जातक चाहे नौकरी करता हो या व्यवसाय करता हो लाभ के योग है ।
- जातक को मान सम्मान की प्राप्ति के योग बनेंगे ।
- नौकरी में प्रमोशन के योग होंगे।
देव गुरु बृहस्पति की नावं दृष्टि - बारवां भाव पर होने से
- खर्च तो रहेगा किन्तु ये खर्च आप अच्छे जगह पर होगा या कही इन्वेस्ट करेंगे।
- विदेश सेटलमेंट का योग बनता नजर आ रहा है।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
1) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पिले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
मकर राशि:-
गुरु मकर राशि के जातक के लिए अकारक ग्रह है अतः गुरु का प्रभाव कुछ इस प्रकार होगा।
गुरु मकर राशि के लिए पराक्रम भाव में होंगे जिससे
- मेहनत के अनुरूप लाभ प्राप्त नहीं होगा व्यर्थ की यात्राओं का योग रहेगा।
- छोटे भाई बहन से संबंध अच्छे रखिये।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृष्टि- सप्तम भाव पर होने से:-
- जातक के विवाह का योग बने हुए है जो जातक विवाह के इच्छुक है या योग्य है।
- वैवाहिक जीवन में परेशानी या वादविवाद का योग है।
- पार्टनरशिप करने से बचें।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृस्टि भाग्य भाव पर होने से:-
- आपको अपने पिता का धयान रखना है उनसे संबंध अच्छे रखे।
- घर में यदि कोई धार्मिक अनुष्ठान करवाते है तो अति उत्तम रहेगा
- भाग्य का साथ पाने के लिए गुरु के उपाय करें।
उपाय : -
1) गुरुवार को व्रत करें। पीले पुष्प और मिठाई चढ़ाये।2) केले का दान , चना दाल का दान , बेसन का दान कर सकते है हर गुरूवार को।
3) मंदिर व् गाय की सेवा करें। गुरूवार को गाय को चना और गुड़ खिलाये।
***** आपको पीली वास्तु का दान करना है। इस्तेमाल नहीं करना है।
कुम्भ राशि :-
कुम्भ राशि के जातक के लिया देव गुरु कारक ग्रह है क्युकिं गुरु धन भाव और आय भाव के स्वामी है।
और कुम्भ राशि के जातक के लिए देव गुरु धन भाव में रहेंगे जिससे
- आपका धन संजय होगा मतलब धन का आगमन होगा तभी तो धन संचय होगा।
- कुटुंब परिवार में आपका रुतवा बढ़ेगा।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृष्टि- छठा भाव पर होने से:-
- रोग -ऋण-रिपु से छुटकारा मिलेगा।
- छात्र यदि कॉम्पिटिशन दे रहे है तो सफलता का योग है।
- और नौकरी में भी आ रही परेशानी से मुक्ति मिलेगी
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृष्टि- से अष्टम भाव पर होने से:-
- टेंशन -डिप्रेशन और काम में आ रही किसी भी प्रकार की रूकावट ख़त्म होगी।
- गुप्त विद्या या रीसर्च से जुड़े काम केर सकते है।
- ससुराल से अच्छे सम्बन्ध रहेंगे।
देव गुरु बृहस्पति की नवम दृष्टि- कर्म भाव पर होने से :-
- कर्म क्षेत्र में आपको तरक्की मिलेगी
- नौकरी हो या व्यवसाय आपको सफलता प्राप्त होगा।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पिले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
मीन राशि :-
मीन राशि के लिए जातक के लग्न में गुरु रहेंगे और अपनी ही राशि में। हंस महापुरुष योग का निर्माण करेंगे। अत्यंत शुभ योग।
- जातक का आचार -विचार -वयवहार -स्वाभाव उत्तम कोटि का रहेगा।
- आप अपनी ज्ञान की आभा से लोगो को प्रभावित करेंगे।
- आपका स्वास्थ अच्छा रहेगा।
- आपको लोग अनुसरण करेंगे।
देव गुरु बृहस्पति की पंचम दृष्टि -पंचम भाव पर होने से:-
- आकस्मिक लाभ के योग बनते नजर आएंगे।
- छात्रों के लिए बहुत अच्छा समय। आप की पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी और आप यदि अच्छी जगह एडमिशन लेने चाहते है तो आपको मिल सकता है।
- संतान पक्ष से अच्छे समाचार प्राप्त होंगे।
देव गुरु बृहस्पति की सप्तम दृष्टि- सप्तम भावपर होने से:-
- विवाह का योग बनेगा। जो भी मीन राशि के जातक विवाह के योग्य है उनका विवाह का प्रबल योग बनेगा।
- वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
- आपका दैनिक रोजकार अच्छे रहेंगे। पार्टनरशिप आप कर सकते है।
देव गुरु बृहस्पति कीनवम दृष्टि-भाग्य भाव पर होने से:-
- आपको भाग्य का साथ मिलेगा।
- आपके पिता के साथ अच्छे सम्बंद रहेंगे।
- आपकी धार्मिक प्रवृति बढ़ेगी। घर में धार्मिक अनुष्ठान करवा सकते है।
यदि आपके कुंडली में गुरु अच्छे भाव में नहीं है तो ये उपाय करेंगे तो लाभ मिलेगा।
उपाय :-
) हर गुरूवार को मंदिर जाये और साथ ही पिले पुष्प और पीली मिठाई जरूर चढ़ाये।
2) ॐ नमो भगवते वसुदेवय नमः का जाप करें।
3) गाय की सेवा करनी चाहिए।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

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