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शादी व् विवाह से जुड़े कुछ रोचक जानकारी की बात करेंगे :-शादी किस दिशा में होगी ?शादी कितनी दूरी पर होगी ?जीवन साथी कैसा होगा ?शादी या विवाह आपकी कब होगी ?

विवाह के पहले कुंडली मिलान क्यों आवश्यक है? कुंडली मिलान में क्या ज्योतिष सलाह की आवश्यकता है ?


प्रिय पाठक ,

नमस्कार।

आज मैं बहुत ही अच्छे विषय बारे में बात करें। आज इस पोस्ट में बहुत ही सामान्य सवाल माता -पिता द्वारा पूछे गए है।

आज कल के युग में चाहे बेटी की शादी हो या बेटा का। माता -पिता के लिए दोनों की ही शादी बहुत जिम्मेदारी वाली होती है।

शादी के उम्र बच्चों की होते ही माता -पिता के मन में बहुत सारे सवाल उठने लगता है जैसे :-

  • बेटी के लिया अच्छा दामाद होना चाहिए ।
  • अच्छा कमाता हो।
  • दिखने में कैसा है।
  • घर परिवार अच्छा हो।
  • शादी दूर होगी या नजदीक में।
  • किस दिशा में शादी होगी।
  • लड़का का आचार , विचार और स्वाभाव कैसा होगा।
  • वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा। आदि आदि
  • बेटे के लिए बहु अच्छी मिलनी चाहिए
  • लड़की का स्वाभाव ,विचार कैसा है ?
  • इनका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ?

माता - पिता के इन सवालो का ज़बाब के लिए मेरी राय है आप विवाह के समय अपने बच्चें की कुंडली जरूर मिलाये और साथ ही साथ ज्योतिषये सलाह भी जरूर लें।

विवाह के समय व् पूर्व कुंडली मिलान करना क्यों आवश्यक है?

Vivah ke samay ya purv Kundali Milan Kyu jaruri ya avashyak hai ?

जैसा कि हमने शुरू से देखा है कि पंडितजी से लड़के और लड़की की जन्म पत्रिका लेते है और पंचाग में देखकर लड़के और लड़की का कुंडली मिलते है और कहते है लड़के और लड़की का 36 में से 36 गुण मिल रहा है या फिर 18 गुण मिल रहा है या 20 गुण मिल रहा है और 18 गुण या उससे अधिक गुण मिलते है तो शादी के लिए हाँ कह दिया जाता है।

शादी के लिए जो कुंडली मिलान होता है इसको अष्टकूट मिलान  है। 
 जानना जरुरी की अष्टकूट  मिलान होता क्या है 
और क्यों शादी करने से पहले कुंडली मिलान करना जरुरी है ?

अष्टकूट कुंडली मिलान या मेलापक मिलान में  8 बातो को ध्यान में रख कर कुंडली मिलान किया जाता है। 
कुंडली में इन सब तथ्यों को अंक प्राप्त  इनकी  जीवन में प्रधानता  के अनुरूप दिया गया है। 
 
कुंडली मिलान में ध्यान देने योग बातें :-

1) वर्ण  :-
वर्ण से आप लड़के और लड़की का स्वभाव और रंग जाना जाता है यदि इनमे समनायता है तो कार्यक्षमता अच्छी रहेगी और दोनो एक दूसरे के साथ अच्छे से रहेंगे।

2 ) वैश्य :-
वैश्य का संबंध व्यक्तित्व से होता है और एक दूसरे से आकर्षण को बताता है । अंक पूरे रहेंगे वैवाहिक सुख उत्तम रहेगा 

३) तारा :- 
तारा का संबंध भाग्य से है जितना अंक मिलेंगे उतना ही दोनो के भाग्य में विवाह के बाद वृद्धि होगी ।

4  ) योनि:-
योनि मिलान में संभोग से , शारीरिक संतुष्टि से होता है देखा जाता है । विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण योनि के कारण ही होता है ।
 
5 ) ग्रह मैत्री :- 
ग्रह मैत्री का संबंध स्वभाव से होता है यदि दोनो लड़का और लड़की का राशि स्वामी एक है या दोनो ग्रहों में मैत्री है या सम है तो उनके बीच का संबंध अच्छा रहेगा और जीवन सुखमय होगा ।

6  ) गण मैत्री :-
गण मैत्री क्या है :- तीन गण होते है।  देवता गण , मनुष्य गण और राक्षस गण।  व्यक्ति के स्वाभाविक गुण को बतलाता है जैसे लड़का और लड़की दोनो को ही एक ही चीज पसंद है या दोनो का स्वभाव एक ही है जैसे दोनो ही मजाकिया है या दोनो ही शांत स्वभाव के है या दोनो को जल्दी गुस्सा आता है यदि दोनो के गुण अधिक मात्रा में मिलते है तो दोनो एक दूसरे को समझेंगे और वैवाहिक जीवन बहुत सरलता से बीतेगा।

 7 ) भकूट:-
भकूट दोष  कुंडली में होना पर दोनो लड़का और लड़की अपने को बदकिस्मत (unlucky )समझने लगते है जैसे 
आपको शादी होते ही स्वास्थ से संबंधित परेशानी रहेगी।
नौकरी या व्यवसाय से संबंधित परेशानी होगी ।

परेशानी जायदा हो तो रिश्ते संभालना मुश्किल हो जाता है ।

भकूट दोष होना अच्छा नहीं माना जाता ।  

8 )नाड़ी :-
नाड़ी दोष का संबंध संतान उत्पत्ति से है । नाड़ी लड़का और लड़की की मिलनी नहीं  चाहिए । 
नाड़ी मिलने से संतान प्राप्ति में बाधा होता है और स्वास्थ खराब होने की भी संभावना होती है । 


इन सब बातों को कुंडली मिलान में देखा जाता है सबसे जाएदा महत्वपूर्ण होता है। 
  • भकूट दोष 
  • नाड़ी दोष 
यदि कुंडली में ये दोष नहीं है तो सीधा पूरे प्वाइंट प्राप्त हो गए और यदि ये दोष है तो शून्य (०) अंक प्राप्त होगें। 

*****विवाह मिलाप या अष्टकूट कुंडली मिलान कैसा किया जाता है वो मैं आपको अगले पोस्ट में बताऊंगी।

कुंडली मिलान में मंगल दोष या मांगलिक योग देखा जाता है। मंगल दोष को जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें ।

 इस बात का विशेष ध्यान देना  कि यदि ये तीनो में से कोई भी  दोष कुंडली मिलान में प्राप्त होते है तो शादी के लिए आगे नहीं बढ़ना चाहिए।  

कुंडली मिलान में क्या ज्योतिष सलाह की आवश्यकता है ?

कुंडली मिलान करते समय एक ज्योतिष आपको और भी महत्वपूर्ण बातों को बताते है:

1 ) विवाह के कारक ग्रह : -( Vivah ke kaarak garh )

जैसा की हम जानते है कि लड़की के कुंडली में विवाह का कारक बृहस्पति होते है और लड़के के कुंडली में शुक्र देव कारक होते है।

  • यदि लड़की की कुंडली में देव गुरु अस्त है , उनकी उपस्थिति अच्छे भाव में नहीं है यानि पीड़ित है या उनमें डिग्री नहीं है तो वैवाहिक जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • ठीक उसी प्रकार यदि लड़के के कुंडली में शुक्र अस्त हो , पीड़ित हो, डिग्री कम हो या मृत हो वैवाहिक सुख प्राप्त नहीं होता है।
इसलिए कुंडली मिलान के समय यह देखना जरुरी होता है कि लड़की की कुंडली गुरु बृहस्पतिअच्छे हो और लड़के के कुंडली में शुक्र।
कम से कम लड़का का शुक्र ख़राब है तो लड़की का गुरु अच्छा होना चाहिए।
यदि लड़की का गुरु ख़राब है तो लड़के का शुक्र अच्छा होना चाहिए। तभी शादी के लिया आगे बढ़े।

सप्तम और सप्तमेश : -

सप्तम भाव में ग्रह और सप्तमेश यानी सप्तम भाव का स्वामी ।

  • यदि ये आपके कुंडली में अच्छे है स्वराशि के है उच्च के है या नवमांश में अच्छी स्थिति में है तो आपका वैवाहिक जीवन उत्तम होगा ।
  • आपके और आपके जीवन साथी के बीच साझेदारी अच्छी होगी या आप बेस्ट कपल (Best Couple )होंगे।

एक से अधिक विवाह का योग( Ek se adhik vivah ke yog )

एक ज्योतिष बताएगा की आपकी कुंडली में एक से अधिक विवाह के योग है या नहीं । मान लीजिए

लड़का या लड़की की कुंडली में एक से अधिक विवाह का योग है तो क्या होगा ?
  • या तो लड़का या लड़की के बीच में तलाक या डाइवोर्स होगा।
  • या लड़का या लड़की अलग हो जायेगे एक दूसरे के साथ नही रहेंगे ।
यदि ये बात आपको पहले मालूम हो जाए तो आप ज्योतिष उपाय कर लेंगे या फिर आप शादी के लिए माना कर दीजिएगा ।

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स ( Extra Marital Affairs )

यदि लड़के या लड़की की कुंडली में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स योग है तो शादी से पहले बाहर आना या निकालना आसान होगा नहीं तो जिंदगी भर आप या तो आपका वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण रहेगा या फिर आप अलग रहेंगे ।

महादशा और अंतर्दशा
लड़का और लड़की की महादशा-अंतर्दशा क्या चल रही है यदि ये भी पता कर ले तो अच्छा क्योंकि यदि उन दोनो के महादशा और अंतरदशा अच्छी रहेगी था वैवाहिक जीवन की शुरुवात अच्छी होगी और वैवाहिक सुख उत्तम होगा ।

अष्टम भाव और अष्टमेश

अष्टम भाव ससुराल का भाव है यदि ये भाव अच्छा रहेगा मतलब
  • शुभ ग्रहों की दृस्टि हो।
  • ग्रह अपने राशि में हो या स्वरशि के हो।
  • ग्रह विपरीत राजयोग में आ जाये।

तो लड़का या लड़की का ससुराल का साथ प्राप्त होगा । ससुराल में मान-सम्मान रहेगा। परिवार को ले कर चलेंगे। अतः विवाह से पूर्व कुंडली मिलान जरुरी है।  

अब हम सब शादी से जुड़े कुछ रोचक जानकारी की बात करेंगे :-

सबसे पहले आप लोग ये जाने कि कुंडली के कौन से भाव को सप्तम भाव कहते है :-
सप्तम भाव विवाह का भाव 

उसके बाद आप अपनी कुंडली निकले यदि आपके पास है और यदि नहीं है तो नीचे लिंक पर क्लिक कर अपनी कुंडली बना ले।

शादी किस दिशा में होगी ?
Shadi kis disha me hogi ?

ज्योतिष आपको आपके या आपके बच्चों की शादी किस दिशा में हो सकती है बता सकते है आपके जन्म स्थान से । चलिए जानते है :-

सप्तम भाव में स्थित राशि से विवाह का दिशा ज्ञात किया जाता है । सप्तम भाव में यदि

  • मेष (1), सिंह(5) और धनु(9) राशि हो और सूर्य और शुक्र ग्रह हो तो विवाह की दिशा पूर्व दिशा होगी
  • वृषभ (2), कन्या(6) और मकर(10) राशि हो और चंद्र और शनि ग्रह हो तो दक्षिण दिशा में विवाह होगा ।
  • मिथुन(3), तुला(7) और कुंभ(11) राशि हो और मंगल ,राहु/केतु ग्रह हो तो पश्चिम दिशा में विवाह होता है ।
  • कर्क(4) , वृश्चिक(8) और मीन(12) राशि हो और बुध और गुरु हो तो उत्तर दिशा में विवाह होता है ।
  • अब एक नियम है कि यदि कोई भी ग्रह सप्तम भाव में कोई ग्रह नहीं है तब  शुक्र कुंडली में जहां हो वह से सात घर गिनना है और सप्तम भाव में जो  राशि आएगी उस राशि के दिशा में शादी होगी ।
  • कुंडली का सबसे बलवान ग्रह की दिशा में भी शादी होती है । 

ससुराल कितनी दूरी पर होगी ?
Sasuraal kitni duri per hoga ?

ज्योतिष आपकी शादी आपके जन्म स्थान से कितनी दूरी पर होगा ये ज्ञात भी किया जा सकता है ।

चलिए इस रोचक विषय को भी जानते है :-

सप्तम भाव में कौन से राशि स्थित है उससे जन्म स्थान से विवाह कितनी दूरी में होगा जाना जा सकता है।

  • मेष ,कर्क, तुला और मकर राशि सप्तम भाव में हो तो आपका विवाह आपके जनस्थान से 200 किलोमीटर के अंदर होगा ।
  • वृषभ , सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि सप्तम भाव में हो तो 90 किलोमीटर के अंदर होगी ।
  • मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि सप्तम भाव में हुआ तो 80 से 100 किलोमीटर के अंदर होगी।
  • सप्तम भाव का स्वामी यानी सप्तमेश ( सप्तम भाव में जो राशि उसका स्वामी जैसे मान लीजिए सप्तम भाव में 1 नंबर लिखा है और एक नंबर मेष राशि हुई और उसका स्वामी जो है वो मंगल देव )सप्तम भाव और द्वादश भाव के बीच में हो तो जातक का विवाह विदेश में होगा या लड़का शादी करके लड़की को विदेश लेकर जायेगा ।

नोट : विदेश का मतलब सिर्फ यूरोप या अमेरिका नही होता । आप अपने कल्चर रीति रिवाज , भाषा से दूर जाए ये भी विदेश ही है आज भी बहुत लोग मिलेंगे जो आज भी ये बोलते है हम देश जा रहे है चाहे गर्मी की छुट्टी हो या किसी भी प्रकार का छुट्टी होने पर वो देश जाते है ।
जब ज्योतिष लिखी गई थी तब एक स्थान से दूसरे स्थान जाना विदेश जाने से कम नहीं था । परंतु आपकी कुंडली में विदेश जाना यूरोप और अमेरिका जाना लिखा है तो आप जरूर जायेंगें ।

जीवन साथी कैसा होगा ?
jeevan saathi kaisa hoga ?

आज मैं सप्तम भाव के बारे में बात करेंगे । चाहे लड़का हो या लड़की दोनों की ही कुंडली में सप्तम भाव उसके जीवन साथी का भाव होता है ।
सप्तम भाव में उपस्थित ग्रह से पता चलता है की जीवन साथी कैसा होगा ।

ज्योतिष में यदि आपके सप्तम भाव में एक से अधिक ग्रह है तो उसका प्रभाव अलग होता है ।
सप्तम भाव पर शुभ ग्रहों या पाप ग्रहों की दृष्टि, युति आदि का भी प्रभाव रहता है ।

परंतु ये विश्लेषण एक ग्रह पर आधारित है । चलिए जानते है : यदि सप्तम भाव में

सूर्य स्थित हो : -
यदि कुंडली में सूर्य स्थित होने से जातक का पति/पत्नी गौरा, कामी तथा क्रोधी स्वभाव का होगा ।

चंद्रमा स्थित हो :-
यदि कुंडली के सप्तम भाव में चंद्रमा स्थित हो तो जातक का पति/पति गुणी , दुर्बल , भोगी तथा रोगी होता है ।

बुध स्थित हो :-
यदि कुंडली में सप्तम भाव में बुध स्थित हो तो जातक का पति/पत्नी बुद्धिमान , गुणवान और होशियार होता है।

मंगल स्थित हो :-
यदि कुंडली के सप्तम भाव में मंगल स्थित हो तो जातक की पति/पत्नी स्वभाव से कठोर , आलसी और बोलने में चतुर होते है ।

गुरु स्थित हो :-
यदि कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो जातक की पति/पत्नी दीर्घायु, राजा सदृश , धनी और कामी होती है ।

शुक्र स्थित हो :-
यदि कुंडली के सप्तम भाव में शुक्र हो तो जातक की पति/पत्नी तेजवान , हसमुख , चतुर और धनवान होता है ।

शनि स्थित हो :-
यदि कुंडली के सप्तम भाव में शनि हो तो जातक की पति/पत्नी उम्र में बड़ा और चंचल और होता है ।

राहु/केतु स्थित हो :-
यदि कुंडली के सप्तम भाव में राहु/केतु हो तो जातक की पति/पत्नी मलिन बुद्धि वाला होता है ।

जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि एक से अधिक ग्रह और दृष्टि , ग्रहों का उच्च होने से गुण , स्वभाव के फल में परिर्वतन होता है ।

शादी या विवाह आपकी कब होगी ?
Shadi ya Vivah Kab hogi ?

जैसा हम अब तक जान चुके है कि शादी से जुड़ी सभी जानकारी के लिए सप्तम भाव को ही देखना है ।
ग्रहों की उपस्थिति सप्तम भाव से शादी की उम्र का पता लगाया जा सकता है ।

यदि सप्तम भाव बुध देव हो तो आपकी शादी 13 से 18 वर्ष में हो सकता है ।

सप्तम भाव मंगल देव हो तो आपकी शादी 18 वर्ष में अंदर हो सकता है परंतु यदि मंगल दोष बनता हो शादी में देरी होती है ।

यदि सप्तम भाव शुक्र देव हो तो आपकी शादी 25 वर्ष में हो सकता है ।

यदि सप्तम भाव चंद्र देव हो तो आपकी शादी 22वर्ष में हो सकता है ।

यदि सप्तम भाव गुरु देव हो तो आपकी शादी 27-28 वर्ष में हो सकता है ।

यदि सप्तम भाव शनि देव हो तो आपकी शादी में देरी होती है ।

आप की विवाह उम्र हो गयी है और गुरु का गोचर (transit ) आपके जन्म कुंडली से लग्न ,  तृतीये , पंचम , सप्तम नवम  एकादश में आता है तो उस वर्ष शादी का योग बनता है।  

नोट : शनि की दृस्टि सप्तम भाव पर नहीं होनी चाहिए।  

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद
Happy Beginning...
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