सूर्य + बुध = बुधादित्य योग :- क्या आपके कुंडली में राजयोग बन रहा है ?
प्रिय पाठक ,
नमस्कार।
आज में फिर एक अच्छे विषय में चर्चा करूंगी।
सबसे पहले ये जानेंगे की सूर्य +बुध =बुधादित्य राजयोग यदि आपकी कुंडली में बनता है तो उसके फायदा क्या है ये जानने के लिए सबसे पहले
सूर्य किसका कारक हैं ये जानते है :-
- सूर्य को आत्मा का कारक कहा गया है यानी आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना प्रचुर मात्रा में होती है ।
- सूर्य मान सम्मान और लोकप्रियता का कारक है ।
- सूर्य सरकार का कारक है । मतलब यदि ये योग बन रहे है तो आपको सरकार में उच्च पद की प्राप्ति का योग बनता है ।
बुध किसका कारक हैं ये जानते है :-
- बुध बुद्धि और विवेक का कारक है ।
- बुध वाणी का कारक है ।
- बुध चतुर्यता का कारक है ।
कुंडली में सूर्य और बुध की युति हो तो बुदादित्य राजयोग का निर्माण होता है । युति का मतलब दोनो का एक साथ किसी भाव में बैठना या होना । सूर्य से सबसे निकटतम ग्रह बुध ग्रह ही है।
प्रायः कुंडली में बुध या तो सूर्य के साथ रहते है या फिर सूर्य से एक घर आगे या फिर सूर्य से एक घर पीछे रहते हैं । प्रायः बहुत लोगो की कुंडली में सूर्य और बुध एक ही भाव में आपको देखने को मिलेंगे ।
तो क्या सूर्य के साथ युति होने पर ही राजयोग का निर्माण हो जायेगा ??
जी नही क्योंकि यदि राजयोग सबके कुंडली में बनाने लगे तो फिर बात ही क्या !
कुंडली में बुधादित्य राजयोग कैसे बनता है ??
- सूर्य और बुध कुंडली का कारक ग्रह होना चाहिए ।
- बुध सूर्य से अस्त नही होने चाहिए ।
- बुध और सूर्य की डिग्री अच्छी होनी चाहिए । यदि सूर्य 0-1-2 डिग्री या 28-29-30 डिग्री का हो लाभ प्राप्त नहीं होता है।
- 6,8,12 भाव में इस योग का निर्माण नहीं होता है ।
- सूर्य नीच के ( तुला राशि ) और बुध नीच के ( मीन राशि ) के नहीं होने चाहिए।
- किसी भी प्रकार का ग्रहण योग का निर्माण नहीं होने चाहिए।
लग्न व प्रथम भाव : -
- जातक के लगन या प्रथम भाव में बुधादित्य योग बन रहा हो तो जातक में आत्मविश्वास से ओतप्रोत ,जातक बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होता है ।
- जातक को मान सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होता है ।
- सूर्य लगन में होने से जातक बड़ा दिल वाला और साहसी होता है ।
- ये योग होने से जातक का दैनिक रोजगार उत्तम और निर्णय लेने की क्षमता उत्तम होती है ।
- वैवाहिक सुख उत्तम होता है अपने जीवन के हर निर्णय बहुत ही सोच समझकर लेने की आदत होती है ।
- पार्टनरशिप बिजनेस भी इनके लिए अच्छा रहेगा और ये तरक्की करेंगें ।
दुतिये भाव :-
जातक के दूसरे भाव में बुधादित्य राजयोग बन रहा हो तो :-
- कुटुंब परिवार में आपका मान सम्मान बड़ेगा । आपका अलग ही रूतबा रहेगा ।
- आपकी वाणी ओजपूर्ण और मीठी रहेगी ।
- सूर्य इस भाव में होने से सरकारी नौकरी लगने के योग बन जाते है और साथ ही साथ बुध देव की उपस्थिति से आप बैंकिंग जॉब में कंपीट कर सकते है ।
- धन धान्य से आप परिपूर्ण रहेगें । धन की कोई कमी नहीं रहेगी आपके जीवन में ।
- सप्तम दृस्टि अष्टम भाव में होने से सभी प्रकार के प्रॉब्लम हो, समस्या को बहुत आसानी से पार कर लेते है या फिर रास्ता निकाल लेते है।
- उनको वसीयत मिलने की सम्भावना होती है और ये कहें छुपा धन मिलने की सम्भावन होती है।
- किसी भी प्रकार की गुप्त विद्या या नौकरी हो , या रिसर्च के क्षेत्र में अच्छा करते है।
तृतीये भाव :-
तृतीये भाव में बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने पर :-
- जातक अपने पराक्रम से अपने भाग्य का निर्माता होता है।
- जातक धार्मिक प्रवृति का होता है और धर्म से जुड़े यात्रा करने में रूचि रखते है।
- जातक का अपने छोटे भाई बहन का साथ प्राप्त होता है और ये कहेंगे की आप अपने छोटे -भाई के लिए भाग्यशाली होते है।
चतुर्थ भाव :-
चतुर्थ भाव में बुधादित्य राजयोग बनना श्रेस्कर होता है :-
- जातक को सभी प्रकार का भौतिक सुखो की प्राप्ति होती है । भूमि -भवन -वाहन का सुख प्राप्त होगा।
- माता का सुख और स्वास्थ दोनों की प्राप्त होगी।
- जातक बिजनेस के क्षेत्र में सफल होगा। अपनी बुद्धिमता और चातुर्यता के बल पर जातक नौकरी करता हो य व्यपार दोनों में है सफल होगा।
- कर्म क्षेत्र में मान -सम्मान की प्राप्ति होगी। जातक उच्च पद को प्राप्त करेंगे।
पंचम भाव :-
पंचम भाव में बुधादित्य राजयोग का निर्माण हुआ तो
- जातक शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा मुकाम हासिल करेंगे।
- जातक को आकस्मिक धन की प्राप्ति होती रहेगी। जातक को शेयर ट्रेडिंग , जुआ , सत्ता और लोटरी से धन प्राप्त होने के योग होते है।
- सरकारी नौकरी लगने के योग होते है उच्च पद प्राप्त करता है।
- एक से अधिक आय के स्रोत्र होता है मतलब आपके इनकम का साधन सिर्फ नौकरी व् व्यवसय ही नहीं होगा अन्य क्षेत्र से भी धन की प्राप्ति होगी।
- आपका सामाजिक दायरा बड़ा होगा और आपको आपके बड़े भाई बहन का सहयोग हमेशा प्राप्त होगा।
छठा भाव:-
छठा भाव में राजयोग का निर्माण नहीं होता है।
सप्तम भाव :-
सप्तम भाव में ये बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने से
- जातक के मान -सम्मान में वृद्धि होगा। जातक की पद प्रतिष्ठा को प्राप्त करता है।
- जातक बुद्धिमता के बल पर अपने दैनिक रोजकार में अच्छे मुकाम प्राप्त करता है।
- वैवाहिक सुख उत्तम होता है। जातक अपने जीवन साथी का आदर करता है।
- जातक का स्वास्थ उत्तम होता है।
अष्टम भाव :-
अष्टम भाव में राज योग का निर्माण नहीं होता है।
नवम भाव :-
नवम भाव में बुधादित्य राजयोग का बनाना अति उत्तम योग होता है:-
- भाग्य का साथ मिलना क्या होता है आप इस जातक से पूछिए। भाग्य का साथ पूर्ण रूप से मिलता है।
- जातक जो भी परिश्रम करता है उसका उसको फल प्राप्त होता है।
- जातक यदि अपने पिता से जुड़े व्यापार को करें तो जीवन में नयी मुकाम हासिल करेंगे।
- पिता के सम्बन्ध और स्वास्थ दोनों ही अच्छे होंगें।
- धर्म -कर्म में आपकी रूचि हमेशा बनी रहेंगी और धार्मिक प्रवृति जातक में होगी।
दशम भाव :-
दशम भाव में बुधादित्य राजयोग का होने बहुत अच्छा योग होता है।
- जातक अपने बिजनेस में उच्चतम मुकाम हासिल करेंगें। आपके द्वारा लिया गया निर्णय आपको आगे बढने में मदद करेंगा।
- भौतिक सुखो की प्राप्ति होगी और आपके पास भूमि -भवन - वाहन का सुख प्राप्त होगा।
- आपको जनता का साथ प्राप्त होगा।
- माता और पिता का सुख प्राप्त रहेगा।
- सरकारी नौकरी की प्राप्ति होगी और सरकारी नौकरी में उच्च पद प्राप्त करेगा।
एकादश भाव :-
एकादश भाव में बुधादित्य राजयोग बनाने से :-
- आपके पास एक से अधिक आय के स्त्रोत प्राप्त होंगें। कहने का मतलब ये है कि आपके पास नौकरी और व्यवसाय के अलावा आय के अलग स्त्रोत होंगें।
- सामाजिक दायरा आपका बड़ा होगा। आपके मित्र और बड़े -भाई बहन का साथ आपको प्राप्त होगा।
- शिक्षा के क्षेत्र में आप अच्छा मुकाम हासिल होगा । आपको आकस्मिक धन लाभ के योग बनेगें। आपको शेयर ट्रेडिंग , जुआ ,सट्टा और लोटरी से भी धन प्राप्त हो सकता है।
- आप यदि क्रिएटिव फील्ड में है तो आप अपना नाम रोशन करेंगे।
द्वादश भाव :-
द्वादश भाव में राजयोग का निर्माण नहीं होता है।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है
My Email is santwanadutta1974@gmail.com
0 टिप्पणियाँ