प्रिय पाठकों
नमस्कार ।शादी हमारे जीवन कि एक ऐसी विधा है कि देर - सवेर शादी सब को करना है और यदि जीवन साथी अच्छा मिले तो आपको दुनिया का सारा सुख यहाँ ही प्राप्त हो जायेगा और यदि जीवन साथी से नहीं बनी तो क्या कहना , नरक ढूंढने की आवश्यकता नहीं।
कौन नहीं चाहता की उसका जीवन साथी अच्छा हो। कौन अपना जीवन खुशी से जीवन व्यतीत नहीं करना चाहता।
चलिए पहले ये जान लेते है कि
विवाह के कारक ग्रह तीन है :-
1 ) शुक्र :_ लड़के के लिए शुक्र विवाह एवम् पत्नी का कारक है ।
2 ) देव गुरु बृहस्पति : लड़की के लिए विवाह वा पति का कारक ग्रह है ।
3 ) मंगल देव की भूमिका भी बहुत महत्पूर्ण है अतः शादी के समय मांगलिक योग व् दोष जरूर देखना चाहिए।
शुक्र को वैवाहिक जीवन के लिए मुख्य ग्रह माना गया है। शुक्र को भोग -विलाश का कारक माना गया है। शुक्र को सैय्या सुख का कारक माना गया है।
देव गुरु बृहस्पति वैवाहिक जीवन में खुशहाली का कारक माने जाते है। देव गुरु यदि कुंडली में अच्छे है तो विवाह तो चलेगा परन्तु शुक्र ख़राब है तो जो पति -पत्नी में आकर्षण है न वो कम हो जाता है।
मंगल दोष है तो जो व्यक्ति मांगलिक है वो अपने जीवन साथी को दबाने की कोशिश करता है और वैवाहिक सुख में कमी आती है अतः मंगल को भी देख लीजिये।
अतः मंगल , गुरु और शुक्र दोनों यदि अच्छे हो तो व्यक्ति के जीवन में वैवाहिक सुख उत्तम रहता है।
वैवाहिक जीवन
खुशहाल बनाने के लिए सामान्य उपाय क्या करें ?
- पत्नी को पति के बायें तरफ सोना चाहिए।
- सोने के लिए एक ही गद्दे का प्रयोग करें।
- रंग बहुत महत्वपूर्ण होते है अतः बैडरूम का रंग गुलाबी , क्रीम , सफ़ेद और हलके हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए
- सोते समय पूर्व या दक्षिण दिशा के तरफ सर रखना चाहिए .
- अपने बैडरूम में देवी देवताओ का चित्र न लगाए
- किचन में जूठे बर्तन न रखे। सोने से पहले या तो धो ले या फिर बाहर बालकनी में निकाल कर रख दें। घर में टुटा हुआ कांच या आईना न रखे।
- सोने के कमरे में इलेक्ट्रॉनिक न रखे और सोने के कमरे में कम से कम इलेक्ट्रॉनिक सामान रखें।
- घर में टुटा हुआ कांच या आईना न रखे।
- सप्ताह में एक दिन मंदिर पति -पत्नी साथ जरूर जाये।
- शुक्रवार को खीर या सफ़ेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए और साथ ग्रहण करना चाहिए।
- हीरा धारण नहीं करना चाहिए।
- सूर्य को हल्दी मिलकर जल जड़ाये गायत्री मंत्र का जाप करें .
- बृहस्पतिवार को केले का जड़ में पूजन करें .
- शनि वार को हनुमान जी का दर्शन करें . शनि वार को ही सुन्दर कांड का पाठ करें।
वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने लिए ज्योतिष योग क्या है ?
वैवाहिक जीवन के बारे में जानने के लिए सबसे पहले सप्तम भाव को ही देखा जाता है और सप्तमेश की स्थिति देखी जाती। है। सप्तमेश का मतलब सप्तम भाव के स्वामी से है ।
शादी होती और अपने जीवन साथी के साथ बहुत खुश रहते है:-
कुंडली में ये तीनो ग्रहों ( मंगल ,गुरु और शुक्र)की शुभ स्थिति में होना अत्यंत जरूरी है यदि इनकी स्थिति अच्छी हो जैसे
- अच्छे भाव में हो ।
- अस्त न हो ।
- नीच के न हो ।
- 6 -8 -12 भाव में न हो तो दोनो ही ग्रह अच्छे है और आपका वैवाहिक जीवन उत्तम होगा ।
सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सप्तम भाव को देखना जरुरी है:-
- सप्तम भाव में शुभ ग्रह हो जैसे शुक्र , गुरु ,बुध और चंद्रमा । यदि आपके सप्तम भाव में शुभ ग्रह हो तो आप वैवाहिक जीवन सुखमय होगा ।
- सप्तम भाव में शुभ ग्रहों की दृस्टि जैसे शुक्र , गुरु ,बुध और चंद्रमा हो तो आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।
- सप्तम भाव में कोई पंच महापुरुष राजयोग का निर्माण हो रहा हो जैसे रुचक महापुरुष , मालव्य महापुरुष योग , हंस महापुरुष योग भद्र महापुरुष योग और सस महापुरुष योग तो वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
- कुंडली का कारक ग्रह सुखी वैवाहिक जीवन बनने में मदद करते है।
सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सप्तमेश को देखना जरुरी है:-
ऊपर की कुंडली में सप्तमेश ( सप्तम भाव का स्वामी ग्रह ) शुक्र हुआ क्युकि सप्तम भाव में 7 नंबर लिखा है और 7 नंबर तुला राशि हुई और तुला राशि का स्वामी शुक्र हुआ।
- सप्तमेश का उच्च होकर बैठा हो तो आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।
- सप्तमेश का सप्तम भाव में होने से वैवाहिक सुख उत्तम होता है ।
- सप्तमेश अच्छे भाव में हो तो आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।
- सप्तमेश अच्छे और शुभ ग्रह के युति और दृष्टि हो तो आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।
नवमांश को भी देखना होता है। नवमांश को वैवाहिक जीवन के सुख के लिए देखा जाता है ।
नवमांश में लगन , लग्नेश , सप्तम भाव और सप्तमेश चारों की स्थिति शुभ हो तो आपका वैवाहिक जीवन उत्तम होता है ।
शादी तो हो जाती है परंतु अपने वैवाहिक जीवन में खुश नहीं होते ?
शादी होने के बाद से वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम या समस्या होती है यदि सप्तम
- सप्तम भाव पर किसी भी प्रकार के क्रूर या पापा ग्रह की स्थिति ,दृष्टि और युति न हो तो आप वैवाहिक जीवन सुखमय होगा ।
- सप्तम भाव पर नीच के ग्रह की दृष्टि और युति भी न हो तो आप वैवाहिक जीवन सुखमय होगा ।
- सप्तम भाव में कोई दोष नहीं बनना चाहिए जैसे विष योग , अंगारक योग और गुरु चांडाल योग का निर्माण हो तो भी वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम होता है ।
शादी होने के बाद से वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम या समस्या होती है यदि सप्तमेश
- ग्रह अस्त हो तो वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम या समस्या होती है।
- मांगलिक हो तो वैवाहिक जीवन में परेशानी होती है।
- नीच राशि में सप्तमेश हो तो वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम या समस्या होती है।
- 6 -8 -12 में हो में होतो वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम या समस्या होती है।
- सप्तम भाव में नीच का ग्रह , क्रूर और पापी ग्रह की स्थिति हो , दृष्टि हो या युति हो तो भी वैवाहिक जीवन में प्रॉबलम होता है ।
- सप्तम भाव में 6 -8 -12 के स्वामी न हो तब भी वैवाहिक सुख उत्तम होता है ।
खुशहाल वैवाहिक जीवन बनाने के लिए ज्योतिषये उपाय क्या करें ?
- मंगल दोष है या मांगलिक दोष होता है तो पति -पत्नी में जो भी मांगलिक है वो शनिवार को हनुमान जी के मंदिर जाये और अपने घर सूंदर कांड का पाठ जरूर करें।
- सूर्य को जल जरूर चढ़ाये और गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें क्युकिं यदि सूर्य क्रूर गृह है और यदि सूर्य हो या सूर्य देव की दृस्टि हो तो ये उपाय उत्तम उपाय में से एक है।
- गुरु यदि ख़राब हो तो गुरु वार की पूजा और केले के पड़े में जल जरूर चढ़ाये और गुरु का मंत्र का जाप करें।
- शुक्र यदि ख़राब हो पति / पत्नी की कुंडली में उनको हर शुक्रवार को सफ़ेद मिठाई या खीर मंदिर में जरूर चढ़ाये और प्रसाद स्वरुप दोनों ग्रहण करें
- और सबसे सटीक उपाय में यदि घर में बात -बात पर कलह /झगड़े होते है तो शिव भगवान् की पूजा और आरधना जरूर करें और शिव लिंग पर जल जरूर चढ़ाये।
- हर अमावस्या या पूर्णिमा को गरीबों को अन्न जरूर खिलाये।
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है
My Email is santwanadutta1974@gmail.com
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