प्रिय पाठक ,
नमस्कार।
आज फिर से एक बहुत ही अच्छे विषय के बारे में चर्चा करुँगी जो हमारे जीवन के लिए सबसे जरूरी है या फिर यू कहूँ कि उसके बिना जीवन की कल्पना व्यर्थ है।
जी मैं धन व् पैसा की बात कर रही हूँ मैं उस लक्ष्मी की , उस पैसे की बात कर रही हूँ जिसके बिना आप जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते है।
कुछ लोगों का कहना है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता बस इतना कहूँगी पैसे के बगैर भी कुछ नहीं होता है।
कौन नहीं चाहता है कि उसके पास बहुत धन हो जिससे वो अपने न सिर्फ जरूरत की वास्तु ख़रीदे वरन अच्छा जीवन जी सके। किसे नहीं चाहिए बंगला , गाड़ी और बहुत सारा धन जिससे वो अपने हर मनोकामना पूरी कर सके।
सब चाहते है पर बहुत सारा धन और पैसा भी भागयशाली लोगों को ही मिलता है। उनके कुंडली में ऐसे योग होते है जिससे उनको अथाह धन की प्राप्ति होती है।
चलिए जानते है कुछ योगो के बारे में जिसके नाम ही है महालक्ष्मी योग , धन वृद्धि योग , धन प्राप्ति योग
कुंडली में केंद्र को विष्णु भगवान् का स्वरुप मन गया है और त्रिकोण को माता लक्ष्मी का स्वरुप मन गया है और जब भी शुभ प्रभाव में केंद्र ( 1-4-7-10 ) और (1-5-9) का सबंध बने तो महालक्ष्मी योग का निर्णाम होता है।
पहले पंच महालक्ष्मी योग के निर्माण की शर्ते :-
1 ) भाग्येश केंद्र में विराजमान हो
2 ) अपने मित्र राशि , स्वराशि या उच्च का की राशि में हो।
3 ) अपने नीच राशि में न हो।
4 ) डिग्री अच्छी होनी चाहिए।
लग्नेश भी
5 ) 6 -8 -12 में न हो।
6 ) लग्नेश भी नीच का न हो और उसकी डिग्री भी अच्छी होनी चाहिए।
7 ) पापी और नीच के ग्रह की दृस्टि नहीं होना चाहिए।
8 ) महा दशा -अन्तर्दशा भी देखना है।
ऊपर की कुंडली में महालक्ष्मी योग का निर्माण हो रहे है। यहाँ पर भाग्येश( 9th House) गुरु केंद्र में विराजमान है और अपने मित्र राशि में है।
इस कुंडली में
- गुरु का मान 11 डिग्री के आस पास है और
- लग्न का मान 9 डिग्री है और
- लग्नेश की डिग्री 17 है और लग्नेश उत्तम स्थान पर है और अपने मित्र राशि में है।
- लग्नेश और भाग्येश दोनों पर पाप गृह की दृस्टि भी नहीं है।
अतः यहाँ महालक्मी योग का निर्माण हो रहा है और जब गुरु की महादशा और अन्तर्दशा का योग आएगा तो जातक को बहुत सारा धन प्राप्त होगा और जातक धनी होगा।
दूसरे पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण की शर्ते :-
1 ) यदि लग्नेश त्रिकोण में विराजमान हो और त्रिकोणेश लग्न में विराजमान हो।
2 ) धनेश आयेश में विराजमान हो जाये और आयेश धन भाव में विराजमान हो जाये।
3 ) ग्रह का मान अच्छा होना चाहिए।( 9 -21 डिग्री ).
ऊपर की कुंडली में :-
- लग्नेश मंगल पंचम भाव में है जो कि त्रिकोण भाव है। त्रिकोणेश सूर्य लग्न में विराजमान है।
- धनेश शुक्र आय भाव में ( एकादश भाव ) में है और आयेश शनि धन भाव ( दूसरे भाव ) में है।
- दोनों ही ग्रहो की डिग्री अच्छी होनी चाहिए जैसे डिग्री (9 -21 ) के बीच हो तो अति उत्तम।
दोनों ही शर्ते यदि किसी की कुंडली में विराजमान हो तो उनकी कुंडली में पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण होः और जातक धनवान होगा।
तीसरा पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण की शर्ते :-
1 ) केंद्र के स्वामी त्रिकोण में आ जाय और त्रिकोण के स्वामी केंद्र में बैठ जाय।
2) उनको शुभ ग्रह दृस्टि दे रहे हो।
3 ) सूर्य से अस्त नहीं होना चाहिए।
4 ) नीच का नहीं होना चाहिए।
5 ) केंद्र के स्वामी शुभ ग्रह हो जैसे गुरु , शुक्र ,बुध ( बुध अकेला शुभ होता है और शुभ ग्रह के साथ शुभ होता है। ) और चन्द्रमा ( चन्द्रमा शुक्ल सप्तमी से कृष्णा पक्ष सप्तमी तक शुभ होता है। )
6 ) डिग्री अच्छी होनी चाहिए।
ऊपर की कुंडली :-
- कन्या लग्न की कुंडली में केंद्र के स्वामी होकर बुध त्रिकोण यानि पंचम भाव में है और सूर्य से अस्त नहीं है।
- और गुरु भी केंद्र के समय है और भाग्य भाव में है जिसको त्रिकोण कहते है और अच्छे डिग्री के है।
- गुरु और बुध दोनों ही शुभ है यहाँ इस कुंडली में।
- त्रिकोण भाव के स्वामी शनि लग्न यानि केंद्र में है।
- भाग्येश शुक्र त्रिकोण का स्वामी होकर केंद्र में है।
- शनि और शुक्र दोनों पर शुभ ग्रह की दृस्टि है। नवम से गुरु अपनी पंचम दृस्टि से देख रहे।
इस कुंडली में पांच महालक्ष्मी योग का निर्माण हो रहा है।
चौथा पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण की शर्ते :-
1 ) शनि देव यदि सस महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हो केंद्र में , जो कि वो तुला राशि व् मकर राशि या कुंभ राशि हो कर करेंगें
2 ) और राहु छठा भाव में विराजमान हो
तो पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण होता है। जातक के पैसा और धन गलत कार्यो से आता है। जितने भी प्रकार के गलत काम घूसखोरी ,चोरी , स्मगलर और गलत कार्यो से धन प्राप्त होता है।
ऊपर की कुंडली में :-
- शनि देव सस महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे है।
- और राहु छठा भाव में है अतः जातक को बहुत धन जीवन में प्राप्त होगा।
पाचवां पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण की शर्ते :-
पहला योग :-
1 ) धनेश (दूसरे भाव का स्वामी-2nd House ) लग्न (1st House ) में हो।
2 ) लग्नेश ( प्रथम भाव का स्वामी( 1st House ) ) आय भाव में (एकदश भाव -11th House ) हो।
3 ) एकदशेश ( एकादश भाव का स्वामी (11th House ) . पंचम भाव में (5th House ) हो।
4 ) पंचमेश (पंचम भाव का स्वामी -5th House ) नवम भाव में (9th House ) हो।
तो पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण होता है।
ऊपर की कुंडली में :-
- धनेश शुक्र (दूसरे भाव का स्वामी ) लग्न में है।
- लग्नेश बुध ( पहले भाव का स्वामी ) आय भाव में है।
- आयेश चन्द्रमा ( एकादश भाव का स्वामी )पंचम भाव में है।
- पंचमेश शनि नवम भाव में है।
अतः इस कुंडली में पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण हो रहे।
दूसरा योग :-
1 ) धनेश (दूसरे भाव का स्वामी-2nd House ) लग्न (1st House ) में हो।
2 ) लग्नेश ( प्रथम भाव का स्वामी( 1st House ) ) आय भाव में (एकदश भाव -11th House ) हो।
3 ) एकदशेश ( एकादश भाव का स्वामी (11th House ) . पंचम भाव में (5th House ) हो।
4 )नवमेश (नवम भाव का स्वामी ) नवम भाव में (9th House ) हो।
तो पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण होता है।
ऊपर की कुंडली में :-
- धनेश गुरु (दूसरे भाव का स्वामी ) लग्न में है।
- लग्नेश मंगल ( पहले भाव का स्वामी ) आय भाव में है।
- आयेश बुध ( एकादश भाव का स्वामी )पंचम भाव में है।
- नवमेश चन्द्रमा नवम भाव में ही है।
अतः इस कुंडली में पंच महालक्ष्मी योग का निर्माण हो रहे।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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