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क्या कृष्ण सुनते है कितना अद्भुद प्रश्न है ?

 क्या कृष्ण सुनते है कितना अद्भुद प्रश्न है ?

प्रिय पाठक ,

नमस्कार।



आज ऐसे अनुभव की बात करुँगी जो जीवन को बदलने की क्षमता रखते है।

अजीब से अनुभूति और अहसास था मेरे मन में ।

गर्मी का मौसम था मैं द्वारका से दो घंटे की दूरी पर जामनगर में रहती हूं। छुट्टीयों का समय था और मेरी फैमिली और फैमिली फ्रेंड ने ये निर्णय लिया की द्वारका के पास एक समंदर का किनारा शिवराजपुर बीच है वहां जायेगें, मस्ती करेंगें और फिर द्वारकाधीश के दर्शन करके घर आ जायेगें ।

ऐसा इसलिए निर्णय लिया गया क्योंकि गर्मी का दिन था और दिन जैसे जैसे चढ़ता जाता है गर्मी बढ़ती जाती है और छोटे बच्चे थे हमारे फॅमिली में अतः और सुबह सुबह स्नान करने का एक काम और हो जाता अतः हमने निर्णय लिया की कल 5 बजे सुबह निकालना है ऐसा प्लान करके सोए परंतु नींद ही नहीं टूटी । सुबह 5 बजे तो सो कर उठे और निकलते निकलते सुबह 6 बजकर 15 मिनट हो गया ।

बहुत मस्ती की हमने रास्ता में और करीब 8 बजकर 45 मिनट तक हम सब शिवराजपुर बिच पर पहुंच गए । विशालकाय समंदर के मनोरम दृश्यों का आनंद लिया । समंदर की लहरे खिलखिला रही थी बलखा थी।
बच्चो ने भी खूब आनंद लिया ।
रविवार का दिन था तो भीड़ भी अच्छी थी । चारो तरफ आनंद ही आनंद ।

मन कही घबरा रहा था । कोरोना में 2 साल बीत गए थे । कान्हा जी का दर्शन नहीं हो पाया था।
दिमाग में ये भी बहुत तेज गति से चल रहा था कि द्वारकाधीश के दर्शन का समय 12 बजे तक ही है । कहां से सुना मालूम नही परंतु यही समय गूंज रहा था ।

ऐसा अनुभव मैंने अपने जीवन में कभी नहीं किया था बस एक सवाल कान्हा से मैने पूछा यहां आकर भी आपको देख न पाऊंगी । आपको निहार न पाऊंगी ।

बच्चों को मानते , नहाते 11 बजकर 15 मिनट हो गए थे और घड़ी की सुई तेज गति से बढ़ती जा रही थी ।
शिवराजपुर बीच से द्वारका की दूरी 20 मिनट का था ।

हम सभी एक ही गाड़ी में थे । सब शांत थे । दिमाग में एक सवाल की दर्शन हो पाएगा या नहीं ।
मैने कान्हा से कहा "जहां हो वही रुकना, कान्हा जी मैं आपके दर्शन के लिए आ रही हूं " हिलना नही !!
और पूरा रास्ता कृष्ण कृष्ण करते रही ।

द्वारका में गाड़ी को बहुत आगे तक भाई साहिब ले जाने में सक्षम हुए । मेरी सखी का साथ था मुझे।
सब लोग ऐसा लग रहा था दौड़ रहे है । गर्मी भी काफी थी । फर्श गरम थे ।
चप्पल जूते बाहर ही निकले और अंदर की तरफ तेज गति से चल पड़े । वहां भीड़ कम नहीं थी । लाइन में लोग लगे हुए थे धीरे धीरे लाइन बढ़ रही थी ।
मन बैचैन था तभी एक बात मेरे दिमाग में कौंधाकान्हा को रोकने का एक ही तरीका है राधा का नाम ।
बस किया था मैंने राधे कृष्ण का जाप करना शुरू कर दिया ।

लोग मुझे देख रहे है पर मैं जानती थी कि कान्हा को रोकने का और कोई रास्ता नहीं है सिर्फ राधे कृष्ण।
सिक्योरिटी (Security )चेकिंग में भी राधे कृष्ण का जाप चलता रहा।

फिर क्या था कान्हा वही खड़े थे । दर्शन दिया हम सभी को । आंसुओं ने आखों का साथ छोड़ दिया था।
हमने उनका जयकारा किया और उनका लाख लाख धन्यवाद किया फिर हमने प्रसाद लिया ।

इस घटना के मुझे ये अहसास हुआ और तभी मैंने पूछा की क्या कान्हा सुनते है ?
जवाब था मेरे पास ।
लोगों से सुना था कि यदि आप सच्ची भक्ति भावना से भगवान को याद करते हो ,या उनसे कुछ मांगते हो तो वो जरूर देते है ।
मैने भी सच्ची भक्ति से उनके ही दर्शन की इच्छा किया था और उन्होंने मुझे दिया ।

कान्हा की महिमा की क्या बात करूं सिर्फ उनके नाम का उच्चारण मात्र से एक अलौकिक शक्ति का आभास होता है ।
कृष्ण शब्द में सारा संसार समाहित है ।

बोलते रहे राधे कृष्ण ,राधे कृष्ण


यदि आपने भी ऐसा अनुभव किया है ऐसा तो जरूर शेयर करें ।

उम्मीद है आपको अच्छी लगी होगी। 

धन्यवाद
Happy Beginning...
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