प्रिय पाठक
नमस्कार ।आज इस पोस्ट में फिर से कान्हा जी की ही महिमा की बात करुँगी।
हे कृष्णा :- आपको 56 भोग क्यों लगाते है ?
एक बहुत सुंदर कथा के अनुसार ब्रजवासी राजा इंद्र की पूजा करते थे ताकि इंद्र देव की कृपा बने रहे और बारिश समय पर हो ।
कान्हा जी ये सब देख रहे थे उन्होंने ब्रजवासी को कहा कि बारिश करना तो इंद्रदेव का काम है उसके लिए उनकी पूजा क्यों करें यदि करना है तो गोवर्धन पर्वत की करें जिनसे हमें फल सब्जी और हमारे गाय को भी भोजन प्राप्त होता है ।
सभी लोग कृष्ण के बात से सहमत हुए अतः सभी लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा की तैयारी शुरू करने में लग गए ।
फिर ये देख इंद्र देव नाराज हो गए और उन्होंने गोकुल में खूब बारिश शुरू कर दी और चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आने लगा ।
कान्हा जी ने गोकुलवासी को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपने कनिष्ठा अंगुली में उठा ली और 7 दिनों तक पूरे गोकुलवासी को गोवर्धन पर्वत के नीचे आसरा दिया। इस क्रम में कान्हा जी 7 दिनों तक भूखे रहे।
सभी गोकुल वासी जानते थे कि यशोदा माँ कान्हा जी को 8 पहर यानि 8 बार कान्हा जी को भोजन खिलाती थी अतः कान्हा जी ने 7 दिन भोजन नहीं किया अतः 8 *7 = 56 हुआ। अतः सभी गोकुल वासी ने कान्हा जी के 56 भोग यानि 56 तरह के भोजन बनाये और कान्हा जी को खिलाये। तभी से कान्हा जी को 56 तरह का भोग लगाने की प्रथा चली आ रही है।
56 भोग में आप क्या -क्या लगा सकते है ?
आज कल तो 56 भोग लगाना बहुत ही आसान हो गया है क्युकिं लोग 11 तरह के मिठाई , 11 तरह के फल , 11 तरह के सूखे मेवे , दूध , दही , राबड़ी , माखन और मिश्री और साथ पूरा भोजन का थाल जिसमे चावल , पूरी, लौकी की सब्जी , बैंगन की सब्जी , बेसन के पकोड़े , पापड़ , चटनी , मुरब्बा , मूंग की दाल , मालपुआ , खीर , खिचड़ी , दही कड़ी , हलवा , पंजीरी , छास , सलाद और पानी आदि को भोग में शामिल करते है।
और इस तरह से कान्हा जी के 56 भोग लगाने की प्रथा शुरू हुई और आज भी कान्हा जी को मदिरो में 56 भोग लगायी जाती है।
आज सब तरफ सिर्फ ख़ुशी का माहौल है सभी देशवासी कान्हा जी का जन्म दिन माना रहे है। लोग व्रत कर रहे है और रात्रि में कान्हा जी का जन्म लेने का इंतज़ार कर रहे है।
क्यों लिया श्री कृष्णा ने जन्म ?
आज कान्हा का जन्म हुआ था कान्हा जी इस धरती पर अवतरित हुए इस
- संसार में धर्म स्थापित करने के लिए।
- संसार में सत्य की स्थापना के लिए।
- संसार को प्रेम की परिभाषा समझने के लिए।
कितना आसान सा लगता है पर क्या हम कभी ये सोच पाते है कि कितने कठिन परिस्थिति में कान्हा जी का जन्म हुआ । जन्म लेते ही अपनी माँ से अलग हो गए। पूरी बारिश में यमुना पार कर बाबा वासुदेव ने यशोदा माँ को सौंप आये।
अपने लिए तो कान्हा ने सिर्फ कष्ट ही चुना है।
- बचपन में मामा कंस उन्हें शांति से जीने नहीं दिए हमेशा मृत्यु की बाधा पहुंचते रहें।
- फिर राधा रानी के वियोग का दुःख और फिर
- महाभारत युद्ध के बाद गांधारी का श्राप।
हम कहेंगें वो भगवान् है वो उन्होंने ने ही रचा है। सब उनकी ही माया थी।
सब सही है पर कभी कभी ये अहसास होता है कि कान्हा आप लोगो के लिए सोचते सोचते अपने साथ अन्याय कर लिया।
कान्हा अवतार है उनके शब्द हम सभी को पग पग ज्ञान , सत्य , धर्म के मार्ग पर ले जाने के लिए प्रेरित करते है।
उनकी भक्ति ही एक मार्ग है जो हमें सही और गलत , सत्य और असत्य और धर्म और अधर्म का भेद बतलाती है।
उनकी भक्ति और आराधन में ऐसी शक्ति है जो हमेशा ये अहसास दिलाते है कि "डर मत , कोई है जो हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा है। "
आज इस पवन महापर्व पर कृष्णा की भक्ति में रम जाये और कहते जाये राधे कृष्णा , राधे कृष्णा , राधे कृष्णा।
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

0 टिप्पणियाँ