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दही हांड़ी क्यों लोकप्रिय है? कान्हा जी से इसका क्या सम्बंद है ?प्रेम से बोलो :- कृष्ण कन्हैया लाल की । ज्योतिषे उपाय जरूर करें।

 दही हांड़ी क्यों लोकप्रिय है? कान्हा जी से इसका क्या सम्बंद है ?

प्रिय पाठक

नमस्कार ।


आज फिर से एक बहुत ही मनोरम कथा का वर्णन करूंगी । सब से प्रचलित शब्द है कृष्णाष्टमी में दही हांडी ।

ये दही हांडी से जायदा माखन की हांडी हुआ करती थी ।

प्रचलित कथा के अनुसार कान्हा जी को माखन बहुत पसंद था । हमेशा यशोदा मां माखन निकाल कर रखती थी और कान्हा जी चुरा कर खा लेते थे । यशोदा मां को पूरा विश्वास था कि कान्हा उनका माखन नहीं खाता है ।

एक बार मां यशोदा ने रस्सी की मदद से माखन की मटकी को ऊपर की तरफ लटका दिया और उन्हें पूरा यकीन था कि इतना ऊपर माखन की मटकी को लगाया है कि कोई कभी भी वहा तक नहीं पहुंच सकता है ।

परंतु हमारे कान्हा जी को कोई रोक सकता है । कान्हा जी अपने बहुत से मित्र के साथ एक पिरामिड तैयार किए जिसमे नीचे जायदा लोग होते है जैसे जैसे ऊपर जाते है बच्चो की संख्या कम होते जाती है । कान्हा जी सबसे ऊपर चढ़ गया और मटकी से माखन लेकर खाने लगे ।

मैया यशोदा सब देख रही थी उनको पता चल गया को उनका माखन खाने वाला कोई नहीं उनका ही लाडला है और इस वक्त ही मां यशोदा ने कान्हा जी को माखन चोर कहा था ।

और कान्हा जी के इस घटना के बाद से दही हांडी का उत्सव महोत्सव के रूप में मनाते है ।

दही हांडी को बहुत ही सुंदर रूप से सजाया जाता है और फिर बहुत ऊपर रस्सी की मदद से बंधा जाता है और फिर बच्चे हो या बड़े पिरामिड बनाकर उस दही हांडी को तोड़ते है ।

सभी जगह हमारे देश में चाहे वो मंदिर हो या कोई भी सोसायटी हो सब जगह दही हांडी बड़े उत्साह से मनाया जाता है और जो सबसे ऊपर चढ़ कर हांडी को तोड़ता है उसे गोविदा कहा जाता है ।

सब तरफ सिर्फ आनंद ही आनंद ।

कान्हा जी जब भी माखन खाते थे तो माखन को नीचे भी गिराते थे ताकि उनके सभी मित्र भी माखन का आनंद ले सके और सबका पेट फिर भर जाए । दोस्ती निभाना तो कोई इनसे सीखे ।

कान्हा जी जब भी माखन खाए तो माता यशोदा उनको पकड़ लेती थी और फिर शुरू होता था मां बेटे की कहानियां । बहुत ही सुंदर शब्दों में लिखा है सूरदास जी ने

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो,

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुवन मोहिं पठायो ।
चार पहर बंसीबट भटक्यो, साँझ परे घर आयो ॥
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ।

मैं बालक बहिंयन को छोटो, छींको किहि बिधि पायो ।
ग्वाल बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो ॥
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ।

तू जननी मन की अति भोरी, इनके कहे पतिआयो ।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो ॥
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ।

यह लै अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो ।
'सूरदास' तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो ॥
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ।


और फिर सूरदास कहते है कि इतना सुनते ही माता यशोदा ने कान्हा जी को अपने गले से लगा लिया, अपने ह्रदय से लगा लिया ।

अब आप ही बताए कि कान्हा जी से जीत सका है कोई और यशोदा मां तो बिल्कुल भी नहीं ।

आज सब तरफ चाहे घर हो या मंदिर सब तरफ कान्हा जी के कीर्तन भजन होगा । उनके मंत्रों के उच्चारण से सभी दिशा गूंज उठेगा । आज सब तरफ फिर से एक ही शब्द होंगे कृष्ण कन्हैया लाल की ।

एक बहुत ही अच्छा भजन है मेरे साथ गाए और कान्हा की भक्ति में खो जाए ।

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ।
हाथी घोड़ा पालकी ,कृष्ण कन्हैया लाल की ।
आनंद उमंग भयो, जय कन्हैया लाल की ।

ब्रज में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की ।
हाथी घोड़ा पालकी ,कृष्ण कन्हैया लाल की ।
आनंद उमंग भयो, जय कन्हैया लाल की ।

कोटि ब्रामंड के, अधिपति लाल की । नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ।।
हाथी घोड़ा पालकी ,कृष्ण कन्हैया लाल की ।
आनंद उमंग भयो, जय कन्हैया लाल की ।.


गौ चरने आए , जय हो पशुपाल की ।
नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ।।
आनंद उमंग भयो, जय कन्हैया लाल की ।


ज्योतिषे उपाय जरूर करें:-

आज कृष्णाष्टमी के दिन किये गए उपाय अतयंत लाभकारी होते है। 

चन्द्रमा यदि कमजोर है :-

जिस भी जातक का चन्द्रमा कमजोर है या कुंडली में ख़राब है आप आज जन्माष्टमी की व्रत और पूजा जरूर करें।  
लडडू गोपाल को पंचामृत से स्नान करिये और पंचामृत ग्रहण जरूर करें।  

संतति प्राप्ति हेतु करिणाष्टमी का व्रत जरूर करें :-

जो महिला अभी तक संतति का सुख प्राप्त नहीं कर पायी है वो कृष्णाष्टमी का व्रत और पूजन जरुर करें और कान्हा जी को माखन और मिश्री का भोग जरूर लगाया और कान्हा जी से संतति प्राप्ति का आशीर्वाद जरूर ले। 




उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
Happy Beginning...


आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है


सबसे महत्वपूर्ण:-

1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

My Email is santwanadutta1974@gmail.com















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