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विदेश सेटलमेंट और विदेश यात्रा के योग आपके कुंडली में क्या है या नहीं ??

 प्रिय पाठक,

नमस्कार।


आज फिर से एक अच्छे विषय के बारे में बात करूंगी । आज विदेश यात्रा और विदेश सेटलमेंट की बात करूंगी ।

  • कुछ लोग विदेश में सेटल करना चाहते है।
  • बहुत लोग है जो विदेशों में घूमना चाहते है दुनिया देखना चाहते है ।
  • कुछ लोग पढ़ाई के लिए विदेश जाते है और वहां ही सेटल कर जाते है।
आपको पता है पहले विदेश जाना अच्छा योग नही माना जाता था जब ज्योतिष लिखी गई थी तब विदेश जाना यानी अपने घर परिवार को छोड़ कर जाने वाली बात होती थी और एक तरह की सजा होती थी।

परंतु आज की तो बात ही अलग है आज विदेश जाने का मतलब ही बदल गया है । विदेश जाने का मतलब है
धन कमाना , अच्छी लाइफ स्टाइल पाना ।
और आज हम सब मानते भी है कि हवाईजाहज के कारण और इंटरनेट कर कारण ये दूरी कम हो गयी है।  

परंतु क्या जो भी विदेश जाता है वो सब बहुत अच्छे से ही रहते है या बहुत पैसा कमाते है , नही बिलकुल नहीं ।

आए जानते है कि विदेश यदि आप जाना चाहते है तो कौन सा योग आपके कुंडली में होना चाहिए ।

सबसे पहले आप अपना जन्म कुंडली बना ले या आपके पास है तो खोल ले ।
यदि नही है तो नीचे लिंक पर क्लिक करके अपनी कुंडली बना ले ।

सबसे पहले विदेश जाना का भाव जो है न वो 12वां भाव होता है ।
पहला भाव :- लग्न
दूसरा कुटुम्ब :- परिवार
चौथा भाव :- मातृ भूमि
नवम भाव :-लंबी दूरी के यात्रा का
छठा भाव और दशम भाव :- कर्म या नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते है।


अब यदि 12 भाव का स्वामी का संबंध इन भाव से हो जाए ।इन भाव बैठे स्वामी से हो जाए तो विदेश यात्रा और सेटलमेंट का योग बनता है ।


लग्नेश मतलब लग्न का स्वामी यदि 12वां भाव में चला जाय तो विदेश सेटलमेंट का योग बनता है।
लगन का स्वामी कौन है आप , यदि आप ही विदेश वाले भाव में बैठ गए तो निश्चित रूप से आप विदेश में सेटल करेंगें ।

दूसरे भाव का स्वामी होकर यदि 12वां भाव में जाने से भी विदेश सेटलमेंट का योग बनता है ।
इसका अर्थ क्या हुआ दूसरा भाव हमारे कुटुंब परिवार का है और
दूसरे भाव का स्वामी होकर विदेश भाव में चले गए तो क्या हुआ की आपके कुंडली में अपने कुटुंब परिवार से दूर रहने का योग बन गया । दूर आप कैसे रहेंगे जब आप खुद 12भाव यानी विदेश में रहेंगे ।

चतुर्थ भाव का स्वामी यदि 12भाव में चला जाय तो विदेश सेटलमेंट का योग बनता है क्युकिं चतुर्थ भाव क्या है हमारी मातृभूमि और वो स्वामी विदेश भाव में जाकर बैठ गया अतः जातक विदेश में निवास करेंगे ।

पंचम भाव शिक्षा का भाव है और उसके स्वामी का किसी भी प्रकार से राशि परिवर्तन 12भाव से हो जाए तो विदेश सेटलमेंट होता है ।

आज कल बच्चे शिक्षा के लिए विदेश जाते है और उच्च शिक्षा लेकर या तो लौट कर वापस आ जाते है या फिर विदेश में सेटल कर जाते है ।


अष्टम भाव का स्वामी यदि 12भाव में बैठ जाए तो भी विदेश सेटलमेंट होता है ।

नवम भाव का स्वामी के साथ यदि किसी भी प्रकार का संबंध 12भाव का विदेश यात्रा को बतलाता है ।
चाहे वो संबंध
  • युति का हो
  • दृष्टि का हो
  • राशि परिवर्तन का हो
  • या फिर 9भाव का स्वामी 12भाव में
  • या फिर 12भाव का स्वामी 9भाव में बैठा हो ।
तो आप विदेश यात्रा करने जरूर जायेंगें।  

शुक्र देव यदि 12वां भाव में है तो विदेश सेटलमेंट का योग बनता है । शुक्र देव का 12 वां भाव काल पुरुष की कुंडली में उच्च के होते है। यदि शुक्र देव आपकी कुंडली में 12 वां भाव में है तो आपका विदेश सेटलमेंट योग पक्का है।

केतु /राहु यदि चतुर्थ भाव में होने से भी विदेश सेटलमेंट का योग बनता है ।
क्योंकि राहु और केतु विच्छेद आत्मक ग्रह है यदि मातृभूमि वाले भाव में रहेंगे तो आपको आपके मातृभूमि से दूर करेंगें ।

राहु का 12भाव से यदि गोचर में किसी भी प्रकार से 12भाव से संबंध बने तो विदेश सेटलमेंट का योग बनता है ।

छठा भाव में यदि लग्नेश आ जाये तो भी वो विदेश में नौकरी के योग निर्माण करता है। 

दशम भाव का स्वामी यदि  12 भाव में चला जाय तब भी नौकरी के लिए विदेश योग का निर्माण होगा।  

इस प्रकार विदेश जाने के योग कुंडली में देखे जाते है ।

नोट:- विदेश का मतलब ये नही है कि लंदन और अमेरिका आप जा सकते ऐसा नहीं है ।विदेश का मतलब हर समय ये नही होता है ।

आप अपने जन्म स्थान से दूर जाकर अपनी शिक्षा ले सकते है आज कल हम अपने बच्चे को एक राज्य से दूसरे राज्य भेज ही रहे है ।
आप अपनी जीविका के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य जा सकते है ।

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी। 

धन्यवाद
Happy Beginning...
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My Email is santwanadutta1974@gmail.com






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