GOOGLE ANALYTICS TAG

अंनत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन का मुहूर्त ।

 

प्रिय पाठक,
नमस्कार।




आज फिर से एक बहुत अच्छे विषय की चर्चा करूंगी ।
आज बात करूंगी हमारे गणपति बप्पा की । इस दिन गणपति बप्पा के विसर्जन का दिन आ जाता है ।


गणपति बप्पा को बहुत प्यार और भक्ति से जो दस दिन पहले ले आये थे उनकी विदाई का ,उनके विसर्जन का समय आ गया ।

पूरे देश में धूम धाम से गाजे बाजे के साथ गणपति के विसर्जन की प्रथा है जो हर साल काफी उत्साह से किया जाता है ।

हां पर सच ये जब हम गणपति बप्पा हमारे घर पधारते है तब घर में सुबह शाम इनकी आरती - दीया- भोग सब हम करते है और चारो तरफ खुशी का माहौल बन जाता है ।कैसे समय बीत जाता है पता ही नही चलता ।

इस बार भद्र मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है । इस दिन गणपति बप्पा के विसर्जन का भी विधान है ।

गणपति विसर्जन का मुहूर्त  ( Ganpati Visharjan muhurat 2022  ) 

 
इस बार अनंत चतुर्दशी 8 सितंबर 2022 रात 9 बजे के बाद से शुरू हो रहा है और 9 सितंबर 2022 को शाम 6 बजे तक है । चुकिं उदया काल 9 तारीख का है अतः 9तारीख को भी गणपति बप्पा का विसर्जन और अनंत भवन की पूजा की जाएगी ।


अंनत भगवान और कोई नही भगवान विष्णु ही है इस वक्त भगवान विष्णु शेष नाग की सय्या पर विराजमान है ।
इस दिन अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत धागा जिसमे की चौदह गाठों लगाए जाते है उनको अपने हाथो में बांधने की परंपरा है ।

इस व्रत और पूजा को विधि विधान से करने पर सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जातक धन्य धन से जीवन व्यतीत करता है ।

अनंत चतुर्दशी पूजा विधि :-


  • सुबह स्नान क्रिया से निवृत होकर आप एक चौकी पर पिला वस्त्र बिछा ले ।
  • उसके बाद आप विष्णु भगवान के प्रतिमा को स्थापित करें ।।
  • फिर धागा या मौली को हल्दी के पानी डालकर भिगो लें। ये अनंत सूत्र कहलाता है। इस धागे मे आपको 14 गांठे बंधना है और पुरुष को दाहिना हाथ और स्त्री अपने बाएं हाथ बंधना है ।
  • इस सूत्र को विष्णु भगवन का नाम लेकर बंधे क्युकिं ये एक रक्षा सूत्र है।  
  • उसके बाद आप विष्णु भगवान की पूजा और भोग , आरती करें ।
  • अंनतचतुर्दशी को आपको विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें ।


अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi Vrat Katha )व्रत कथा


इस व्रत की महत्ता आज से नहीं महाभारत काल से है जब दुर्योधन और सकुनी के साजिश के कारण पांडवों को चौदह वर्ष का वनवास जाना पड़ा और बहुत कष्ट से जीवन जीने के लिए बाध्य हुए ।


एक बार श्रीकृष्ण जब उनसे मिलने वन में गए तब युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से अपने इस कष्ट से निकलने का मार्ग पूछा तो श्री कृष्ण ने कहा कि तुम अनंत भगवान का अनंत चतुर्दशी के दिन विधि विधान से 14 साल पूजा करो तो तुम्हारे कष्ट तो मिटेंगे ही साथ साथ तुमको अपना खोया हुआ राज पाठ भी प्राप्त होगा ।

एक पौराणिक कथा के अनुसार सुमंत नाम का एक मुनि थे जिनका विवाह महर्षि भृगु की पुत्र दीक्षा से हुआ था और उनकी अत्यंत गुनी और सुन्दर पुत्री जिसका नाम सुशीला थी।  

असमय सुशीला के माँ (दीक्षा) के   निधन के कारण मुनि सुमंत ने दूसरा विवाह कर लिया था जिसका नाम कर्कशा था।  वो सुशीला को बिलकुल  पसंद नहीं करती थी।  

जब सुशीला बड़ी हुई तो उसका विवाह कौण्डिन्य नामक ऋषि से हुआ है।  कौण्डिन्य ऋषि धन -धान्य  से परिपूर्ण थे।  विवाह के बाद जब वो अपनी पत्नी सुशीला को लेकर जा रहे थे तो रस्ते में उन्होंने विश्राम लेने का निर्णय किया क्युकिं दिन ढालने लगा था।  

सुशीला ने देखा की कुछ स्त्रियां नदी किनारे किसी देवता का पूजा कर रही है अतः वह गयी और उत्सुकता बस पूछा कि आप किस देवता का पूजा कर रहे है तो उन्होंने कहा कि  वो लोग अनंत भगवान् की  पूजा क़र रहे है तथा उन्होंने अनंत भगवन की पूजा और महत्ता के बारे में भी बताया। 

सब जानने के बाद सुशीला  ने भी अनंत धागा अपने हाथो में बांध लिया।  और ख़ुशी ख़ुशी अपने पति के पास आयी।  

कौण्डिन्य मुनि को लगा कि वो किसी प्रकार से उनके ऊपर तंत्र -मंत्र कर रही है अतः उन्होंने तुरंत  अनंत धागा को तोड़ दिया और आग में जला दिया। 

धीरे धीरे कौण्डिन्य ऋषि गरीब होते चले गए  , नाना प्रकार के कष्ट प्राप्त होने लगा और दुःखी रहने लगे तब उन्होंने अपनी पत्नी सुशीला से पूछा कि क्यों हमें ये दुःख प्राप्त हो रहा है तब सुशीला ने कहा कि आप ने अनंत भगवान् का  अपमान किया था उस अनंत धागे को तोड़ कर और जला कर इसलिए हमें ये दुःख और कष्ट उठाने पड़ रहे है।  

ऋषि कौण्डिन्य को अपनी गलती का अहसास हुआ और वो अनंत सूत्र को ढूंढने के लिए उसी जंगल में गया परन्तु उसको अनत सूत्र वहां  नहीं  और ढूंढ़ते - ढूंढ़ते ऋषि कौण्डिन्य जमीन पर गिर गए।  

उसके पश्याताप को देख भगवन विष्णु ने उनको दर्शन दिया और कहा की 14 वर्षो तक अनंत चतुर्दशी के दिन  व्रत और पूजा  विधि विधान से करने से सभी  कष्टों से छुटकारा मिलेगा। इस तरह से ऋषि और सुशीला अनंत चतुर्दशी का व्रत पूजन किया और धीर धीर वो दोनों सुखी पूर्वक जीवन यापन करना लगें।  

इस कथा को सुनाने के बाद श्री कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने 14 साल इस अंत चतुर्दशी का व्रत किया और अंततः उन्होंने आप राज पाठ प्राप्त किया ।

अतः कल अनंत  भगवान्  की पूजा जरूर करें और रक्षा सूत्र जरूर बंधे।  

गणपति बाप्पा का विसर्जन खूब धूम धाम से करें। 


गणपति बाप्पा मौरिया। मंगल मूर्ति मौरिया। 


धन्यवाद
Happy Beginning...


आपलोग अपने किसी भी ज्योतिषये समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है


सबसे महत्वपूर्ण:-

1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।




































































एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ