प्रिय पाठक
नमस्कार ।आज इस पोस्ट में हम सब जानेंगे कि कल नवरात्रि के पावन पर्व के शुभ मुहूर्त , कलश स्थापना , दुर्गा सप्तसती का पाठ , राशि अनुसार उपाय के बारे में जानेगें।
30 मार्च से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2025 ) प्रारंभ होने जा रहा है और मातारानी फिर से हम भक्तों को आशीर्वाद देने आ रही है ।
नवरात्रि हमारे देश में धूम धाम से मनाई जाता है । सभी तरफ महोत्सव का माहौल होता है । नवरात्रि में माता के नौ स्वरूपों को पूजा होती है । सम्पूर्ण देश में बड़े बड़े पंडाल बनाए जाते है क्या शहर क्या गांव सभी जगह बहुत अच्छे से पंडाल को सजाया जाता है , मेला लगाया जाता है , घट स्थापना , पूजा , भोग और ढोल नगाड़े बजते है और मातारानी के जयकारा से वातावरण गूंज उठता है ।
और घरों में प्रथम दिन से ही घट स्थापना किया जाता है और पूरे नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूप की पूजा होती है ।
मां को नौ दिन नौ तरह के अलग अलग भोग लगाया जाते है और उनकी पूजा , भक्ति और आराधना की जाती है ।
चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रही है ? Chaitra Navratri kab hai 2025)
चैत्र नवरात्री सामन्यतः मार्च - अप्रैल महीनों में मनायी जाती है इस बार चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होकर 7 अप्रैल तक रहेगा।( Chaitra navratri 2025 )
नवरात्रि साल में वैसे तो चार बार होती है परन्तु चैत्र नवरात्री और शारदीय नवरात्रि महत्वपूर्ण होता है। नवरात्री के इन दिनों में माँ दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है और भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ दुर्गा की पूजा -आराधना -उपवास करते है और माता के कृपा प्राप्त करते है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है ?
( Kalash sthapana ka subh muhurat )
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त :- कलश की स्थापना चैत्र मास की प्रतिपदा व् प्रथम तिथि को की जाती है। इस बार कलश स्थापना का शुभ समय 30 मार्च 2025 शनिवार को 6.13 सुबह से 10.22 मिनट सुबह तक रहेंगे।
इसके अलावा कलश स्थापना को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर के बाद से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट में भी कर सकते है।
प्रतिपदा तिथि 29 मार्च 2025 को शाम 4 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 30 अप्रैल 2025 को सुबह 12 बजकर 49 मिनट पर खत्म होगी परन्तु माता रानी की पूजा 30 मार्च से ही प्रारंभ उदया तिथि में ही होगी।
मान्यता है कि दुर्गा पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ सर्वोत्तम फल दायक होता है ।
दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा के शक्ति रूप के अवतार , असुरों का संहार , और भक्तों की मनोकामना पूरी करने एवम् उसके उधार की गाथा है ।
दुर्गा सप्तशती यदि आप चाहे तो एक बार में पाठ कर सकते है वैसे दुर्गा सप्तशती को 13 अध्याय में बांटा गया है अतः नौ तीन में भी आप अपने अध्याय को सम्पूर्ण कर सकते है ।
यदि आप दुर्गा सप्तशती का पाठ न कर सके तो आप दुर्गा चालीसा वा राम चरित मानस का भी पाठ कर सकता है ।
दुर्गा पूजा के समय आप पूरा नौ दिन आप चाहे तो आप दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते है । दुर्गा चालीसा का पाठ भी उतना ही महत्पूर्ण , लाभदायक , सर्व सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए कर सकते है ।
नियम दुर्गा सप्तशती के पाठ के समय जो आप पालन करते है वो दुर्गा चालीसा में भी करना होगा ।
बहुत घरों में नवरात्रि के समय राम चरित्र मानस की पाठ का करते है मान्यता है कि भगवान राम जी ने नवरात्र में देवी की आराधना कर शक्ति प्राप्त की और विजया दशमी के दिन रावण का दहन किया था ।
पाठ आप चाहे दुर्गा सप्तशती का करें, दुर्गा चालीस का करें या फिर राम चरित्र का करें पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ करें ।
पूजा के समय माता रानी को फल फूल ,भोग , आरती जरूर करें और पूजा एक बाद एकग्यारी जरूर करें एक छोटी सी हवन विधि ।
राशि अनुसार उपाय आपको बताया जा रहा है आप पूरे नौ दिन तक कर सकते है तो अति उत्तम फल की प्राप्त होगी ।
मेष राशि शुभ फल प्राप्त करने के लिए रोज यदि आप माता रानी के समक्ष लाल फूल , लाला कपड़ा और हलुआ जरूर चढ़ाएं।
वृषभ राशि :-
रोज मातारानी के समक्ष सफेद पुष्प , सफेद मिठाई और दो केले जरूर चढ़ाए ।
मिथुन राशि :-
कर्क राशि :-
कर्क राशि वाले मखाने , सफेद कपड़ा और सफेद फूल जरूर माता के मंदिर में चढ़ाए ।
सिंह राशि :-
सिंह राशि वाले अपनी मनोकामना पूरी के लिए एक अनार और लाल पुष्प माता के मंदिर में
जरूर चढ़ाए ।
कन्या राशि :-
तुला राशि :-
वृश्चिक राशि :-
धनु राशि :-
मकर राशि :-
कुंभ राशि :-
मीन राशि :-
धन्यवाद
Happy Beginning...
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सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

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