प्रिय पाठक,
नमस्कार ।आज फिर से मैं श्री कृष्ण की बात करूंगी । आज बात इस भगवान की करूंगी जिन्होंने मानव जाति के कल्याण के लिए , जीवन शैली सीखने और प्रेम की भाषा का पाठ पढ़ाने के लिए , धरती पर मानुष योनि में जन्म लिया और सम्पूर्ण जीवन धर्म की स्थापना हेतु बहुत से इल्जाम अपने सर पर लिया ।
आज बहुत ही सुंदर चित्रण करूंगी आज उस दृश्य की बात करूंगी जब श्री कृष्ण गोकुल को छोड़ मथुरा चलने को तैयार हुए ।
कितना आसान था लोगों के लिए ये कहना की कान्हा जी कितनी आसानी से गोकुल वासी को छोड़कर मथुरा चल दिए ।
परंतु किसी ने कान्हा की तकलीफ महसूस की । सबने यही कहा की निष्ठुर कान्हा ।
सब आज भी ये कहते है कि कान्हा जी मां यशोदा से फिर कभी नही मिले , कभी मिलने नही आए ।
आप ही बताए क्यों नहीं मिले माता यशोदा से । वो तो पल में , एक क्षण में यहां से वहां जा सकते है । फिर ऐसा क्यों और क्या हुआ की कान्हा जी मां यशोदा से मिलने गोकुल कभी नही गए ।
कान्हा जो सबको मानता था और मां यशोदा से अत्यधिक प्रेम भी करता था फिर क्यों नहीं मिला मां यशोदा से ।
मेरी समझ बस इतनी है कि कान्हा जी जितना भी दिन गोकुल में रहे , सारी लीलाएं की वो समय था जो कभी वापस नहीं आता है ।
क्योंकि के समय ही है जो कभी लौट कर नहीं आता । इसलिए कान्हा भी कभी लौट कर उस समय में नहीं आए ।
इसलिए जब कान्हा जी अपने कर्तव्य को निभाने और अपने जन्म को ,अपने अवतार को निभाने निकले तो वो इस समय से निकले गए और फिर कभी भी लौट कर नहीं आए ।
क्योंकि ईश्वर खुद अपने बनाए हुए नियम का उलंघन नहीं करते है ।
कान्हा जी का गोकुल से कण कण से संबंध था । कान्हा जी अपनी जान से प्यारी मां यशोदा और बाबा नंद को छोड़े जा रहें थे क्योंकि उनको पता था वो इनको हमेशा के लिए छोड़ रहे है ।
मां यशोदा के आलौकिक ममता , इतना प्रेम ,इतना स्नेह जो अपने कान्हा की सारी गलतियां ना सिर्फ माफ़ करती थी बल्कि उनको अपने आंचल और स्नेह की छाया भी देती थी ।
उनको छोड़ कर जाना उनकी अंतरआत्म को रुला रहा होगा ।
गोकुल की वो सारी महिलाएं जो कान्हा जी से प्रेम तो करती थी पर उनके माखन चोरी और शरारत से भी बहुत परेशान थी परंतु अपने नटखट नंदलाल के मुख दर्शन से सब भूल भी जाती थी । उनको कैसे कान्हा जी भूल जाते उनको देख कान्हा का मन अंदर से व्याकुल हो रहा होगा ।
गोकुल के कान्हा जी के बालक साथी और वो गाये और ग्वाले साथी जिनके साथ कान्हा जी सुबह से शाम तक रहते थे व्यतीत करते थे आज उन सब को छोड़ जाना है आह !! कितनी पीड़ा ।
फिर बारी आई गोपियों और जिनसे अथाह प्रेम करते थे हम सभी की राधा रानी ।
गोकुल की गोपियां जो उनकी सखी थी और राधा रानी उनका प्रेम , उनके साथ हंसना, खेलना , रास लीला रचाना क्या कान्हा जी के लिए भूलकर जाना और छोड़ना आसान था शायद कभी भी नही ।
कितनी पीड़ा का अनुभव कर रहे होंगे कान्हा जी । जो ये भी जानते थे कि वो इस पल में कभी नही लौट कर आयेंगे ।
अपनी प्रिया राधा रानी को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उनको अपने अवतार को सार्थक करना था ।
फिर भी कान्हा जी मुस्कराते हुए गोकुल को छोड़ दिए । चाहे वो गोकुल वासी हो या कन्हाजी सबके किए एक सा अनुभव रहा होगा ।
गोकुल वासी के लिए भी कान्हा जी का जाना कष्ट दायक रहा होगा और कान्हा जी के असहनीय रहा होगा ।
ये ईश्वर ही कर सकते है । कान्हा जी ने अपने लिए सिर्फ दुःख , तकलीफ और इल्जाम ही लिख रखा था ।
कान्हा जी सब आपने ही लिखा है , सब आपकी ही मर्जी से हुआ है और होता रहेगा परंतु एक बात है कि आपके दर्द में दर्द अनुभव होता है । आपकी तकलीफ में हमारा मन भी रोता है ।
हर जगह आप ही है , आपकी मर्जी से तो पत्ता भी नही हिलता । जब सब आप है तो आप की भक्ति ही आसान मार्ग है जीवन में आगे बढ़ते जाने का ।
इसलिए कान्हा की भक्ति करते जाओ और नाम जपते जाओ और कहते जाओ
राधे कृष्ण,राधे कृष्ण, राधे कृष्ण।
धन्यबाद।
Happy Beginning...
आपलोग अपने किसी भी ज्योतिशे समस्या के समाधान के लिए मुझे संपर्क कर सकते है।
सबसे महत्वपूर्ण:-
1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।
My Email is santwanadutta1974@gmail.com

0 टिप्पणियाँ