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देव उठनी एकादशी (DEV Uthani Ekadashi 2022) 4 November 2022 - कार्तिक मास शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है।

 


प्रिय पाठक,

नमस्कार।  

आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

आज इस पोस्ट में देव उठानी एकादशी की बात करूंगी ।





आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :-

1)  देव उठनी  एकादशी  कब है ?

  देव उठनी एकादशी का विशेष महत्त्व क्यों है ?

3)  देव उठनी एकादशी का पूजन कैसे करना चाहिए ?

4 )  देव उठनी एकादशी  का सामान्य  नियम क्या है?

5 ) एकदशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए ?

6 ) एकादशी के दिन क्या दान करना शुभ रहता है ?



 देव उठनी  एकादशी (Dev Uthani  Ekadashi 2022)  कब है ?

 देव उठनी एकादशी का शुभ मूहर्त 03 November गुरूवार शाम 7 . 30 से शुरू होगा जो 4 November शुक्रवार को शाम 6 बजे तक है।

चूकि उदया तिथि 4 November शुक्रवार को है अतः एकादशी तिथि का व्रत और पूजन 04 नवंबर को ही माना जायेगा ।

जब भी आप एकादशी करते है तो आपके एक दिन पहले से ही मान्य होता है । आपको एकादशी से पहले दिन से ही मांस मदिरा का सेवन न करें ।।  


नोट :  उदया  तिथि का अर्थ है जिस तिथि में सूर्य उदय होता हो।   



देव उठनी  एकादशी ( Dev Uthani Ekadashi 2022) Importance


देव उठनी एकादशी का बहुत महत्व है क्युकिं भगवान् विष्णु चातुर्मास के बाद ( चार मास ) के बाद चिर निंद्रा से जागते है और इस दिन से सभी शुभ कार्य व् मांगलिक कार्य जैसे शादी विवाह , मुंडन संस्कार आदि शुरू हो जाता है।
इस दिन तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है।  आज के दिन भगवन विष्णु के अवतार शालिग्राम  जी और  तुलसी माता का विवाह का प्रयोजन किया जाता है।  

एकादशी का व्रत और पूजा विधि ( Ekadashi Pooja Vidhi )

इस दिन विष्णु भगवान के शालिग्राम स्वरूप का विवाह माता तुलसी के साथ की जाती है । मान्यता है यदि पूजन विधि सम्पूर्ण रूप से करने पर वैवाहिक जीवन में सदा खुशाली बनी रहती है।


एकादशी तिथि है क्या ? ( Ekadashi Tithi )

हमारे हिन्दू धर्म मे एकादशी तिथि( Ekadashi tithi ) का बहुत महत्व है हर महीने दो एकादशी आती है एक शुक्ल  पक्ष की और दूसरी कृष्ण पक्ष की और पंचांग के अनुसार ग्यारवीं तिथि को ही एकादशी तिथि भी कहते है ।

एकादशी पूजा विधि ( Ekadashi pooja vidhi )

1) एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठे और  स्नान आदि क्रिया से निवृत्त होकर तैयार हो जाये ।
2) पीले वस्त्र धारण करें और पीला चंदन अपने मस्तिष्क पर जरूर लगाएं ।
3) विष्णु भगवान के सामने पीला फूल, पीला फल , धूप और तुलसी अर्पित करें ।
4) शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करें ।
5) अगर संभव हो तो इस दिन व्रत जरूर करें और यदि पूर्ण व्रत न रख पाए तो एक समय उपवास कीजिये और 
    शाम को सात्विक भोजन ही ग्रहण करें ।
6) विष्णुसहस्रनाम का पाठ अति- उत्तम होता है और जितना हो सके नारायण के मंत्रो का जाप करें ।
7) आरती जरूर करें बिना आरती किये पूजा पूर्ण नही होती है ।
8) भोग में मेवा, पीला फल या ऋतु फल और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं ।
9) तुलसी के पत्ते  भोग में जरूर होना चाहिए अन्यथा भोग पूर्ण नहीं होता है और मानते है कि तुलसी के बिना 
    भगवान विष्णु भोजन ग्रहण नही करते है ।
 

एकादशी व्रत के दिन क्या नहीं खाना चाहिए?(Ekadashi Tithi what food we should not Eat??)


1)एकादशी के दिन  भोजन पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिये ।
2)भोजन में आप फल ,मेवा, आलू, साबूदाना, शकरकंद  सेंधा नमक,काली मिर्च  ,अदरक और दूध से बनी भोजन का प्रयोग कर सकते है ।
3)एकादशी के एक दिन पहेले से  तामसिक भोजन से बचें भोजन में मांस-मदिरा , प्याज़ - लहसुन ,मसूर की दाल का सेवन नही करना चाहिए ।

एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है जो जातक व्रत नहीं करते है।

एकदशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए ?

  • एकादशी के दिन आपको मिथ्या या झूठ नहीं बोलना चाहिए। 
  • एकादशी के दिन आपको क्रोध , लोभ और धोखा देने की प्रवृति से बचना चाहिए। 
  • एकादशी के दिन आपको ब्रह्मचर्या का पालन करना चाहिए। 

एकादशी के दिन क्या दान करना शुभ रहता है ? ( Donate on Ekadashi )

एकादशी के दिन भगवन विष्णु की पूजा होती है और विष्णु भगवान  के पूजा में पिले फूल , फल , वस्त्र और अनाज का ही भोग लगता है  अतः 

एकादशी के दिन आपको पिले फूल और फल मंदिर में जरूर चढ़ाये।  

एकादशी के दिन पीला चावल और पीला चना की दाल का दान करें। 

एकादशी के दिन केला , गुड़ आप दान  कर सकते है या गौशाला में जाकर गाय को खिला सकते है।  

नोट :-  एकादशी के दिन किया का दान और पूजा  आपके जीवन में सभी प्रकार के कष्ट को दूर करेगा और आपके जीवन में समृद्धि लाएगा 



उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
Happy Beginning...


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2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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