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श्री कृष्ण ने कालिया नाग को क्यों क्षमा किया ???

 प्रिय पाठक ,

नमस्कार ।



आज बहुत अच्छा चरित्र का वर्णन आपके समक्ष करूंगी ।

आज बात होगी श्री कृष्ण के इस रूप का जिसमे उन्होंने जगत के लोगो को करुणा और क्षमा का पाठ पढ़ाया

काल्या नाग की कथा सब जानते है जिन्होंने भी श्री कृष्ण की कथा को सुना है और पढ़ा है । श्री कृष्ण ने कहा था करुणा और क्षमा ही जीवन के सबसे बड़े मूल्य है ।

जानते है लोग एक समय कालिया नाग अपने पूरे परिवार के साथ यमुना नदी में रहने आ गया और पूरी नदी के पानी को विषैला बना दिया था और जो भी व्यक्ति उस जल को ग्रहण करता वो मर जाता था । सभी तरफ हा हा कार मच गया था।

ये खबर श्री कृष्ण तक पहुंची और वो सीधे यमुना नदी के तट पर आ गए और यमुना नदी में प्रवेश कर गए ।

यशोदा मां को ये ज्ञात हुआ कि श्री कृष्ण यमुना नदी तक पहुंच गए है तो वो भी बहुत व्याकुल हो गई और दौड़ कर यमुना नदी के किनारे पहुंच गई । बहुत से लोग वहां इकट्ठा हो गए बलराम भैया भी अपने दोस्तों के साथ आ गए ।

यमुना नदी के समीप कदंब वृक्ष पर श्री कृष्ण चढ़े और नदी में छलांग लगा दी । नदी में प्रवेश करते ही श्री कृष्ण ने देखा एक विशालकाय नाग अपने परिवार के साथ वहां उपस्थित थे ।

कालिया नाग नागों का राजा था जैसे ही उन्होंने (काला नाग ) ने श्री कृष्ण को देखा सब मिलकर श्री कृष्ण के तरफ आक्रमण कर दिया , चारो तरफ से सांप उनको काटने के लिए बढ़े और जैसा सब जानते है कि श्री कृष्ण को उसके आक्रमण को कोई प्रभाव न पड़ा और जब श्री कृष्ण उछल कर कालिया नाग के सर पर पहुंच गए और उसको अपने पैरो से नीचे की ओर दबाने लगे जिसके विरुद्ध कला नाग ने अथक प्रयास किया परंतु श्री कृष्ण के शक्ति के सामने वो असमर्थ थे । बहुत प्रयास किया श्री कृष्ण के प्रभाव से निकलने के लिए परंतु सारी की सारी ताकत जैसे उसका साथ छोड़ चुकीं थीं उसको समझते देर न लगी की ये कोई साधारण बालक नही है , उसके प्राण जैसे ही निकलने वाले थे तब कालिया नाग की पत्नी और बच्चे श्री कृष्ण से कालिया नाग के प्राणों की भीख मांगने लगे , बार बार क्षमा याचना करने लगे ।

तो श्री कृष्ण उसको प्राण दान दिया और कहा कि वो अपने परिवार सहित समुंद्र में चला जाय ।

कालिया नाग ने श्री कृष्ण से अनुरोध किया कि समुंद्र में बहुत से जीव जैसे गिद्ध उसको और उसके परिवार को जीवित नहीं छोड़ेंगे और वे मुझे और मेरे परिवार को मार डालेंगें ।
तब श्री कृष्ण ने कहा कि उनके पैरों के निसान अभी जो उसके सर पर बना है वो निशान हमेशा उसके सर पर एक आशीर्वाद स्वरूप रहेगा और कोई भी जीव इसके निशान को देख उस पर आक्रमण नहीं करेगा ।

जब कालिया नाग जमुना नदी से बाहर अपना फन बाहर किया था अद्भुत दृश्य प्रकट था यमुना के लोग के सामने और मां यशोदा के समक्ष !!!

श्री कृष्ण कालिया नाग के फन पर खड़े होकर बांसुरी बजा रहे थे।

आह कितना सुंदर और अद्भुत दृश्य था , इतना विशाल काय सर्प और छोटा सा बालक उसके फन पर खड़ा बांसुरी बजाते हुए ।



उसके बाद कालिया नाग सांस में सांस लिया और यमुना नदी को छोड़ कर अपने परिवार सहित समंदर आ गया ।

यमुना नदी का पानी स्वच्छ हो गया और यमुना में रहने वाले जीवन आनंद पूर्वक रहने लगें ।

सब लोगों ने राहत महसूस की । कृष्ण वापस आ गए और सभी यमुना वासी खुशी खुशी रहें लगें ।

श्री कृष्ण के लिए कालिया नाग को मारना कोई बहुत बड़ी बात नहीं होती परंतु जब उसके परिवार और खुद कालिया नाग ने उनसे क्षमा प्रार्थना की तो उन्होंने न सिर्फ उसको क्षमा किया बल्कि उसको प्राण दान और सुरक्षा भी प्रदान किया ।

करुणामय श्री कृष्ण की हर प्राणी पर दया दृष्टि रहती है। काश ये महाभारत युद्ध होने से पहले महारथी को समझ में आ जाती।

पर ये सच है इंसान का अहम् उसका सबसे बड़ा शत्रु होता है।  अपने दयामय  स्वाभाव से बंधे श्री कृष्णा ने कितनी ही बार धृतराष्ट्र और दुर्योधन को समझाया परन्तु लोभ , मोह और  अहंकार उनकी सोचने और समझने की शक्ति हर ली थी और उन्होंने श्री कृष्णा की बातों को अनदेखा और अनसुना कर दिया।  

सब पर दिया और करुणा का भाव रखने बाले श्री कृष्णा के चरणों में मेरा शत शत नमन है।  

धन्यवाद
Happy Beginning...


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