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पितृ दोष क्या है? पितृ दोष के क्या लक्षण होता है? पितृ दोष का बचने के उपाय क्या है ? कुंडली में कौन से ग्रह स्थिति पितृ दोष का निर्माण करती है ?

पितृ दोष क्या है? पितृ दोष के क्या  लक्षण होता  है? पितृ दोष का बचने के उपाय क्या  है ? कुंडली में कौन से ग्रह स्थिति पितृ दोष का निर्माण करती है ? 

प्रिय पाठक,

नमस्कार । 

मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।



आज में पितृ दोष की चर्चा करुँगी आज आप इस पोस्ट में जानेंगे

1) पितृ दोष किस कारण से बनता है?( Pitra Dosh kis karn se banta hai ? ) 
2) क्या - क्या पितृ दोष के लक्षण होता  है? ( Kya -Kya Pitra dosh ke lakshan hai ?)
3) क्या- क्या छोटे-छोटे उपाय कर पितृ दोष से बचा जा सकता है ?( Kya -Kya chote upay ker Pitra Dosh se bacha ja sakta  hai ?)
4) ज्योतिष में ग्रहो की स्थति को  पितृ दोष कहा जाता है या पितृ दोष बनता  है ? (Pitra Dosh kaha jata hai or Pitra Dosh kya hai?)

 पितृ दोष किस कारण से बनता है?

  •  घर परिवार में जातक के सगे संबंधी की अकाल मृत्यु होना।
  •  पूर्व  में जातक के परिवार  में मृत व्यक्ति के आत्मा की शांति के लिए विधि विधान से पूजा अर्चना नहीं    किया जाना। 
  •  जातक के पूर्वजों के पास पैसा अनैतिक कार्यों से आना एवं और अनैतिक कार्यों व असामाजिक तत्वों व कार्यों में उपयोग करना से भी पितृ दोष का निर्माण होता हैं।
  •  पुरूष चरित्र से भ्रष्ट होकर अपनी पत्नी या घर की महिला के साथ अत्याचार करें या  शारारिक प्रताड़ित करे और इनको मृत्यु के तरफ ढकेल दे तो स्त्री जाति के अपमान स्वरूप पितृ दोष का निर्माण होता है।
  •  जातक के माता एवं पिता जन्म पत्रिका में पितृ दोष हो या काल सर्प दोष हो तो भी जन्म पत्रिका में पितृ दोष आता है ।



क्या क्या लक्षण होंगे पितृ दोष यदि है?

  • घर में सुख नहीं रहता।  घर में चार लोग यदि मिल के बैठ तो उनके बीच हमेशा लड़ाई- झगड़ा होता है ।
  • पैसा टिकता नहीं है हमेशा पैसे की तकलीफ लगी रहती है  मुश्किल से गुजरा करना पड़ता है । संपत्ति को बढ़ने नही देता
  •  शादी नहीं होती और यदि होती है तो टिकती नहीं है।
  • संतान प्राप्ति में बाधा होता है , संतान सुख होने नहीं देगा और वंश वृद्धि में बाधक होते है
  • जीव- जंतु  टिकते नहीं और पेड़ - पौधे भी हमेशा सुख जाते है ।

पितृ दोष को दूर करने के उपाय क्या है ? 

  • अमावस्या के दिन अपने घर में बनने वाले भोजन से एक भाग गाय के लिए , एक भाग कुत्ते के लिए , एक भाग कौआ के लिए और अतिथि या जरूरत मंद को जरूर  खिलाये।
  • पितृ पक्ष में या श्राद्ध पक्ष या हर अमावस्या  को आटा का  दीया बनाकर उसमें शुद्ध घी डाल कर  दीया शिव मंदिर में जलाना चाहिए एवं महादेव से अपने कष्ट काटने की प्रार्थना करनी चाहिए।
  • पितृ पक्ष व श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों के निधन की तिथि पर योग्य ब्राह्मण द्वारा पूजन करिए तथा ब्राह्मणों को भोजन करके तृप्त करें और उचित दान दे।
  • हर शनिवार या कम से कम अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक प्रज्वलित करें ।
  • गरीबों  और जरूरमंद कन्या का विवाह करवा सकते है या उनकी मदद कर सकते है इससे भी लाभ प्राप्त होता है।

 ज्योतिष में ग्रहो की स्थति को  पितृ दोष कहा जाता है या पितृ दोष बनता  है ?

पितृ दोष होता क्या है कुंडली में सूर्य +राहु ( इस योग को ग्रहण योग भी कहते है) खास कर नवम भाव में हो तो पितृ दोष बन जाता है और   शनि +राहु  यदि साथ में है तो तुरंत प्रभाव से कह दिया जाता हैं कि कुंडली में पितृ दोष है।

क्या कुंडली में दोनों ही ग्रहों की एक साथ उपस्थिति होने मात्र से इस दोष का निर्माण होता है ऐसा नहीं है ।

देखिये यदि कुंडली में


  • सुर्य व शनि आपकी कुंडली के कारक ग्रह हो या सम ग्रह हो कर उच्च के हो तो और
  • राहु की स्थिति भी अच्छी हो ( जैसे राहु अपने मित्र कारक राशि मे हो  और उसके मित्र का प्लेसमेंट अच्छा हो या राहु देव उच्च के हो )

तो क्या योग बनेंगे ? जी नहीं। परंतु आजकल दोनों को युति देखते ही पितृ दोष बोल दिया जाता है और हजारों की पूजा का प्रयोजन बात दिया जाता है ।

सूर्य को क्रूर ग्रह माना जाता है  और शनि जो है ना उनको पापी ग्रह की संज्ञा दिया गया है उनको दुःख एवं पीड़ा तथा विच्छेदात्मक ग्रह माना गया है और

राहु को भी पापी तथा विच्छेदात्मक ग्रह माना गया है और राहु की प्रवृत्ति होती है कि वो जिस ग्रह कर साथ होता है उसके जैसा ही व्यवहार करता है ।

अतः जिस भी कुंडली में :- 

1)सूर्य व शनि कुंडली का अकारक ग्रह हो,
2)उनकी उपस्थिति 6,8,12 भाव मे हो या
3)सूर्य नीच के तुला राशि में और  व  शनि नीच के मेष राशि में  हो तो और
4)राहु भी शत्रु राशि का होकर तथा यदि नीच का हो तो 

यह दुर्योग का निर्माण होता हैं। और तब आपको उपाय करने की सलाह लेनी चहिये अन्यथा आपके  जो ग्रह ख़राब है या कमजोर है उसके उपाय की सलाह लेने चाहिए। 


ऊपर की कुंडली मेष लग्न की है और शनि मेष लग्न की कुंडली के लिए सम ग्रह में आते है परन्तु अष्टम में राहु और शनि दोनों ही अच्छे फल नहीं देते नजर आयेंगें।  यहाँ पर दोनों की युति कष्टकारी होती है। 


ऊपर की कुंडली में सूर्य और राहु एक साथ है वैसे भी सूर्य और राहु एक साथ होते है कुंडली में तो ग्रहण योग का निर्माण होता है जो कभी भी अच्छे फल नहीं देते है।  

परन्तु यदि नवम भाव में ये योग बन जाये तो इसको पितृ दोष कहा जाता है  और यदि किसी भी जातक के कुंडली में पितृ दोष बनता है तो उनके जीवन में परेशानी होती ही होती है।  

अब यदि ऊपर की कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो तो क्या करना है आपको चूकिं सूर्य देव पंचमेश है अतः और भाग्य स्थान पर होना अच्छा होगा व्यक्ति के लिए अतः सूर्य का उपाय कर सूर्य देव को मजबूत करेंगें 
  • सूर्य देव को अर्ध दे और गायत्री मंत्रो का जाप करें। 
  • सूर्य देव पिता का कारक है अतः पिता का आदर करें। 
  • सूर्य देव को बल देने के लिए रविवार को गाय को चारा खिलाये।  
  • अपने हाथ में ताम्बा धारण करें। 
राहु देव को शांत करना है उसके लिए आपको 
  • सरस्वती माता की पूजा करनी चाहिए। 
  • सयुंक्त परिवार में रहे। 
  • सर पर चोटी  रखें। 
  • जौ के दाने पक्षियों को या कबूतरों को खिलाये।  
  • घर में ख़राब इलेक्ट्रॉनिक सामान न रखे।  
  • घर के आस पास गंदा  पानी जमने न दे। 
  • राहु के वैदिक मंत्रो का जाप  "ॐ रां राहुवे नमः " 108 बार शाम के समय करें। 

नोट :- हाँ उपाय जरूर करें नहीं तो जीवन भर परेशानी लगी ही रहेगी।  

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद
Happy Beginning...
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