प्रिय पाठक
नमस्कार।
मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।
इस पोस्ट में आप जानेंगे :-
1)ग्रह और परिवार संबंध प्रत्येक ग्रह का परिवार के किसी न किसी सदस्य से बतलाया गया है। यदि आपके पिता के बारे में फलादेश करना है तो कुंडली में सूर्य की स्थिति को जानना आवश्यक है।
2 )ग्रह और प्रकृति :-( Garh aur Prakrti) तीन तरह की प्रकृति ग्रहो की होती है - पित्त, कफ और वायु। इनको त्रिदोष कहा जाता है। हर ग्रह में एक या एक से अधिक दोष होते है और जातक में उस ग्रह प्रभाव से वो प्रकृति पायी जाती है। मान लीजिये जातक की कुंडली में चन्द्रमा प्रभावी है तो जातक कफ से प्रभावित होगा।
2 )ग्रह और स्वभाव ( Garh aur Swbhav ) प्रत्येक ग्रह का स्वाभाव होता है और कुंडली में ग्रहों के स्थति के अनुसार ही जातक में वो स्वाभाव पाया जाता है। यदि जन्म कुंडली में लग्न में मंगल हो थो जातक स्वाभाव से उग्र होगा और यदि शुक्र हो तो जातक मृदु भाषी होगा।
4) शुभ ग्रह /पाप ग्रह / क्रूर ग्रह( Shub Garh, Paap Garh ,aur Krur Garh हम जानते है कि कुंडली में नौ ग्रह की चर्चा है उनमे से कुछ गृह शुभ , कुछ अशुभ और कुछ को पापी ग्रह कहा गया है। शुभ ग्रह अच्छे स्थान पैर हो थो शुभ फल देते है और अशुभ ग्रह ख़राब। अतः कुंडली में ग्रहो की प्रवृति को जानना बहुत जरुरी होता है।
2 )ग्रह और अवस्था ( Garh aur Avastha ) प्रत्येक ग्रह की अवस्था जैसे तरुण ( नवयुवक) , कुमार (जवान ) , युवा , प्रौढ़ और वृद्ध होती है जैसे
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
सबसे महत्वपूर्ण:- ज्योतिष सीखना के लिए इन पोस्ट को भी पढ़े और आसानी से ज्योतिष को समझे। ऑनलाइन कुंडली बनती कैसे है? राशि कितने और कौन कौन से है ? 9 ग्रहों को क्या- क्या राशि दी गयी है ? |

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