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विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) व्रत 26 फरवरी 10 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर

 विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) व्रत 26 फरवरी 10 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर

 27 फरवरी 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगी ।

प्रिय पाठक,

नमस्कार।  


मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

इस पोस्ट में आप जानेगे :- 

1) एकादशी तिथि है क्या ?( Ekadashi Tithi Kya hai ?) 
2) विजया एकादशी का क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
3) एकादशी की पूजा कैसे की जाती  है ? ( Ekadashi ki pooja kaise ki jati hai ) 
4 ) एकादशी व्रत के दिन व्रत करने वालो को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए ? Vrat Me Kya 
khana ChahiyeAur Kya Nahi )

1)एकादशी तिथि है क्या ?

हमारे हिन्दू धर्म मे एकादशी तिथि( Ekadashi tithi ) का बहुत महत्व है हर महीने दो एकादशी आती है एक शुक्ल
 पक्ष की और दूसरी कृष्ण पक्ष की और पंचांग के अनुसार ग्यारवीं तिथि को ही एकादशी तिथि भी कहते है ।
फाल्गुन (phalgun) माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi)कहते है । 
इस दिन भगवान विष्णु जी का आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती हैऔर व्यक्ति सब सुख भोग कर  
मोक्ष को प्राप्त करता है ।

2) विजया एकादशी क्यों इतना महत्वपूर्ण है? (Vijayaa Ekadashi kyu mahatvpurn  hain  .)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम और उनकी सेना ने विजया एकादशी का व्रत किया और लंकापति 
रावण का वध कर उनपर विजय प्राप्ति किया था ।अतः इस एकादशी को विजय दिलाने वाला व्रत माना जाता है 
  • आप कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकल सकते है। 
  • और कितना भी शक्तिशाली शत्रु हो आप उनपर विजय प्राप्त कर सकते है ।

3 ) एकादशी की पूजा कैसे की जाती  है ? ( Ekadashi ki pooja kaise ki jati hai ?

1) एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठे और  स्नान आदि क्रिया से निवृत्त होकर तैयार हो जाये ।
2) पीले वस्त्र धारण करें और पीला चंदन अपने मस्तिष्क पर जरूर लगाएं ।
3) विष्णु भगवान के सामने पीला फूल, पीला फल , धूप और तुलसी अर्पित करें ।
4) शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करें ।
5) अगर संभव हो तो इस दिन व्रत जरूर करें और यदि पूर्ण व्रत न रख पाए तो एक समय उपवास कीजिये और 
    शाम को सात्विक भोजन ही ग्रहण करें ।
6) विष्णुसहस्रनाम का पाठ अति- उत्तम होता है और जितना हो सके नारायण के मंत्रो का जाप करें ।
7) आरती जरूर करें बिना आरती किये पूजा पूर्ण नही होती है ।
8) भोग में मेवा, पीला फल या ऋतु फल और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं ।
9) तुलसी के पत्ते  भोग में जरूर होना चाहिए अन्यथा भोग पूर्ण नहीं होता है और मानते है कि तुलसी के बिना 
    भगवान विष्णु भोजन ग्रहण नही करते है ।
10) एकादशी के दीन चावल खाना वर्जित है ।


4 ) एकादशी व्रत के दिन व्रत करने वालो को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?


1)एकादशी के दिन  भोजन पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिये ।
2)भोजन में आप फल ,मेवा, आलू, साबूदाना, शकरकंद  सेंधा नमक,काली मिर्च  ,अदरक और दूध से बनी भोजन
का प्रयोग कर सकते है ।
3)एकादशी के एक दिन पहेले से  तामसिक भोजन से बचें भोजन में मांस-मदिरा , प्याज़ - लहसुन ,मसूर की दाल का 
सेवन नही करना चाहिए ।


उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
Happy Beginning...


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सबसे महत्वपूर्ण:-

1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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