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नवरात्री के पांचवें दिन करें माँ स्कंदमाता की पूजा - भक्तो को मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा सभी मनोकामनाएं और सुखों की प्राप्ति होती है।

 मां स्कंदमाता का स्वरुप की पूजा ,माता स्कंदमाता की पूजा विधि ,माता स्कंदमाता  का मंत्र  का जाप  ,माता स्कंदमाता   का भोग ,माता स्कंदमाता की प्रार्थना

नवरात्री के पांचवें दिन करें माँ स्कंदमाता की  पूजा 

प्रिय पाठक,

नमस्कार।  

मैं आचार्या सांत्वना दत्ता आज फिर से एक अच्छे विषय की जानकारी साझा करुँगी।

आज इस पोस्ट में आप जानेंगे :




मां स्कंदमाता का स्वरुप की पूजा 

( Maa Skandmata ka swaroop )


पंचमी तिथि ( 6 अप्रैल  - बुधवार ) - मां स्कंदमाता की पूजा

शारदीय  नवरात्री के पांचवें  दिन माता के नौ रूप में से एक रूप माता स्कंदमाता   की पूजा की जाती है।  कुमार कार्तिके को भगवान् स्कन्द के नाम से जानते है और भगवान् स्कंद की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा।  इस रूप में माता के चार भुजा है दो हाथो में कमल , एक हाथ से  भगवान् कार्तिके को पकड़ी है और एक हाथ आशीर्वाद स्वरुप है। माँ इस स्वरुप में सिंह पर सवार है। 

माता स्कंदमाता  की भक्ति से भक्तो को मोक्ष की प्राप्ति होती है और माता अपने भक्तो के सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है और भक्तों को सभी सुखों की प्राप्ति होती है।  


माता स्कंदमाता की पूजा विधि 

(Mata Skandmata  ki pooja vidhi )

नवरात्री  के पांचवें  दिन यानि 30 सितम्बर  को माता स्कंदमाता   की पूजा का विधान है इस दिन आप स्नान से निवृत होकर माता को सफ़ेद   पुष्प , दीप ,धुप ,लाल सिन्दूर अर्पित करें माँ को सफ़ेद रंग   का वस्त्र   पहनाये और माता को भोग अर्पित करें।  माता को भोग अर्पित करने के बाद माता के मंत्रो का जाप जरूर करें।  मंत्रो की संख्या कम से कम 11 व् 24 बार होना चाहिए। 

 माता  स्कंदमाता की पूजा में सफ़ेद फूल का ही प्रयोग करें और सफ़ेद  रंग का वस्त्र  अर्पित करना चाहिए। 

 

माता स्कंदमाता  का मंत्र  का जाप 

(Mata Skandmata ki Mantro ka jaap  )

माता स्कंदमाता का ये मंत्र  आप 108 बार या कम से कम 11 बार जाप जरूर करें 

                                                 ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

उसके बाद आप दुर्गा सप्तसती का या दुर्गा चालीसा या दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए।  पाठ पूरा होने के बाद मातारानी का आरती जरूर करें।  

माता स्कंदमाता   का भोग 

(Mata Skandmata  ki Bhog   )

माता स्कंदमाता  को क्या भोग लगाना चाहिए :- 

पंचमी तिथि :- केले  का भोग लगाने से निरोगी काया और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।


नवरात्री के पंचमी तिथि को कौन सा रंग का वस्त्र पहने? 

 (Navratri ke panchami tithi ko kaun sa rang ka vastra phene )

नवरात्री के नौ दिन किसी न किसी रंग से जुड़ा है और मातारानी के नवरात्री के समय माता के प्रिय रंग के कपड़े पहनते है। माता स्कंदमाता की पूजा पंचमी तिथि को होगी। 

 माता स्कंदमाता को सफ़ेद रंग प्रिये है अतः माता को सफ़ेद  रंग वस्त्र अर्पित करना चाहिए और आप भी सफ़ेद रंग के वस्त्र  पहनकर माता की पूजा आरधना करें।

ये एक माता स्कंदमाता  का स्त्रोत है पंचमी  तिथि  को  पूजा के  समय  जरूर पढ़े।  (mata Skandmata  stotra ) 

श्री नव दुर्गा स्रोत्र 

माता स्कंदमाता की प्रार्थना

(mata skandmata ki prarthana ) 


जै तेरी हो स्कंदमाता।  पांचवां नाम तुम्हारा आता। 

सब के मन की जानन हारी।  जग जननी सबकी महतारी। 

तेरी जोत जलाता रहूं मैं।  हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं। 

कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा। 

कहीं पहाड़ों पर है डेरा।  कई शहरों में तेरा बसेरा। 

हर मंदिर में तेरे नज़ारे।  गुण गए तेरे भक्त प्यारे। 

भक्ति अपनी मुझे दिला दो , शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।  

इंद्रा आदि देवता मिल सारे। करें पुकार तुम्हारे द्वारे। 

दुस्ट दैत्य जब चढ़ कर आये। तू ही खण्डा हाथ उठाये। 

दासों को सदा बचाने  आई। 'दास ' की आस पुजाने आयी। 

(source :- चमन की श्री दुर्गा स्तुति ) 

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उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।


धन्यवाद
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1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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