प्रिय पाठक ,
नमस्कार ।आज में आप लोगों से बहुत अद्भुत बातों से परिचित करवाऊंगी।
एक बहुत ही चीर प्रचित कथा के अनुसार भोलेबाबा ने गणपति बप्पा के सर को धड़ से अलग कर दिया था ।
जैसा आप सभी जानते होंगें कि मां पार्वती स्नान करने जा रहीं थी तो उन्होंने गणपति जी से कहा कि जब तक मेरा स्नान न हो जाए तो गणपति बप्पा किसी को भी अंदर न जाने दे ।
गणपति बप्पा मां के भक्त थे मां ने जो कह दिया वो ब्रह्म लकीर ।
इस दौरान भगवान जी किसी कार्य विशेष के कारण माता पार्वती से मिलने पहुंचे । उन्होंने एक बालक को कक्ष के बाहर खड़ा देखा और कहा कि इनको अंदर जाना है परंतु हमारे गणपति उनको अंदर जाने हो नही दिया और दिनों की बीच बात बढ़ती चली गई । गणपति अपने हट पर अड़े रहे ।
सबसे अद्भुत बात ये थी कि न बप्पा जानते थे कि ये भोलेबाबा ही उनके पिता है और न ही भोले बाबा जी जानते थे कि बप्पा उनके पुत्र है । इस बात पर भी एक कथा जुड़ी हुई है ।
बप्पा के जन्म कि कहानी भी अद्भुत है मां पार्वती के बार अपनी सखी जाया और विजया के साथ स्नान कर रही थी तब उनकी सखी ने कहा की सभी नंदीगण महादेव की ही आज्ञा मानते है आप क्यू नहीं ऐसी रचना करती है जो की सिर्फ आपकी आज्ञा माने । मां पार्वती को ये बात अच्छी लगी और मां पार्वती ने अपने मैल और उबटन से एक आकृति की रचना की और उसमे प्राण डाल दिए । उन्होंने उन्हें अपना पुत्र माना और उसका नाम विनायक रखा ।
दोनो के ( शिव भगवन और गणपति बाप्पा ) हट और जिद्द के कारण दोनो के बीच तकरार इतना बड़ गया था कि शिव भगवान क्रोधित हो गए और क्रोध के कारण उन्होंने बाल गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया ।
उनकी करुण आवाज सुनकर पार्वती मां बाहर आई और बप्पा को इस स्थिति में देख कर विलाप करने लगी ।
और तब भोले बाबा को ज्ञात हुआ की उन्होंने अपने पुत्र का ही सर अलग कर दिया ।
माता पार्वती के विलाप से सारे जगत हाहाकार मच गया और देवता और माता पार्वती के आग्रह पर भोले बाबा ने भगवान गणेश के धड़ को हाथी के सिर से जोड़ दिए और उनको जीवन दान दिया और तब से भगवान गणेश जिनका नाम विनायक था उनको गजानन के नाम से जाना जाता है ।
भोले बाबा द्वारा अपने पुत्र को मारना ये कोई तुरंत लिया गया निर्णय नहीं था । इस घटना के साथ भोले बाबा को प्राप्त श्राप था।
एक बार भोले बाबा के दो भक्त माली और सुमली के साथ सूर्य देव का युद्ध हुआ क्योंकि वो स्वर्ग लोक पर अपना अधिकार चाहते थे उसको रोकने के लिए सूर्य भगवान ने अपने तेज से हमला किया जिसके कारण माली सुमाली दोनो निस्तेज हो गए और अपनी सहायता के लिए भगवान शिव को पुकारने लगें ।
भगवान शिव अपने भक्त की मदद के लिए आए और देखा की माली सुमाली निस्तेज पड़े हुए है जो सूर्य देव के कारण हुआ है । भोले बाबा क्रोधित हो गए और उनका भी युद्ध सूर्य भगवान से होने लगा परंतु भोले बाबा के प्रभाव से सूर्य देव की शक्ति छिन हो गई और वो भी निस्तेज हो गए और सूर्य देव गिर गए ।
ये देख कश्यप ऋषि जो की सूर्य के पिता और ब्रह्मा के पौत्र है अपने पुत्र को देख कर विलाप करने लगें ।
चारों तरफ अंधकार छाने लगा और देवतों के बीच हाहाकर मच गया तब ऋषि कश्यप ने शिव भगवान को श्राप दिया कि तुमने मेरे पुत्र को निस्तेज किया है उसी प्रकार आप भी अपने पुत्र को अपने हाथो निस्तेज करेगें और उसका सर धड़ से अलग करेगें ।
चारों तरफ अंधकार छाने लगा और देवतों के बीच हाहाकर मच गया तब ऋषि कश्यप ने शिव भगवान को श्राप दिया कि तुमने मेरे पुत्र को निस्तेज किया है उसी प्रकार आप भी अपने पुत्र को अपने हाथो निस्तेज करेगें और उसका सर धड़ से अलग करेगें ।
इस तरह के वचन सुनकर शिव भगवान को क्रोध शांत हो गया और उन्होंने सूर्यदेव को जीवन दान दिया ।
इस तरह से भगवान शिव भी अपने को श्राप से मुक्त नहीं कर पाए और भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की उत्पति हुई ।
बोले गणपति बप्पा मोरिया । मंगल मूर्ति मोरया ।
धन्यवाद
Happy Beginning...
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1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

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