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दीपावली के दिन मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है भगवान विष्णु जी के साथ क्यों नहीं???

 प्रिय पाठक ,

नमस्कार ।



आज बहुत अच्छी जानकारी साझा करूंगी । हम सभी जानते है कि दिवाली में मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी का पूजन होता है और हम सब बहुत श्रद्धा और उत्साह से भी करते है ।

दिवाली के दिन सभी ओर दीया प्रज्वलित किया जाता है  घर का कोना कोना रोशनी से नहा रहा हो ऐसा प्रतीत होता है।  आज कल हम सभी अपने घर में रंग -बिरंगे इलेक्ट्रिक के बल्ब और दीया भी इस्तेमाल करते है।  

शाम होते ही शुभ मुहूर्त का इंतज़ार होने लगता है और पूजा की तैयारी शुरू हो जाता है और पूरी विधि विधान के साथ माता लक्ष्मी और गणपति की पूजा की जाती है।  
 

ये बात भी सभी जानते है कि भगवान विष्णु के साथ हमेशा मां लक्ष्मी की ही पूजा होती है परंतु दिवाली ने गणेश जी के साथ माता लक्ष्मी जी की पूजा हम सब कर रहे है थोड़ा आश्चर्य का विषय है


हम सब ये भी जानते है शास्त्र के अनुसार कोई भी पूजा हो या विधि हो कोई न कोई कहानी या कारण जरूर होता है ।

जैसा हम सब जानते है मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुआ था और उस समय सभी लोग , देवता गन माता लक्ष्मी की ही पूजा करते थे । सभी को धन चाहिए , संपन्नता चाहिए अतः सर्वत्र माता लक्ष्मी की ही पूजा शुरू हो गई अतः माता के मन में अभिमान ने दस्तक दे दी । ये बात भगवान विष्णु जी को अनुभव हो चुका था अतः उन्होंने माता लक्ष्मी से कहा कि कोई भी स्त्री तब तक अपूर्ण है जब तक वो मां के संज्ञा से सुशोभित नही होती ।

माता लक्ष्मी परेशान हो गई और अपने व्यथा उन्होंने मां पार्वती से कहा ।
माता पार्वती ने उनकी मनोभाव को बहुत अच्छे से समझा और अपने पुत्र गणेश जी मां लक्ष्मी को सौंपते हुए कहा कि आज से गणेश जी आपके दत्तक पुत्र हुए ।

मां लक्ष्मी ने गणेश जी को अपना दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार किया और गणेश जी को आशीर्वाद स्वरूप ये वरदान दिया कि जहां भी तुम्हारी पूजा मेरे साथ होगी उस घर में हमेशा मेरा निवास होगा ।

और तब से ये ये प्रथा चली आ रही है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी के साथ गणपति की पूजा का विधान है ।

भगवान विष्णु जी इस समय में क्षीर सागर में चीर निंद्रा में विराजमान रहते है और दिवाली के 11वें दिन जब विष्णु भगवान निंद्रा से जागते है तो उस दिन भी उत्सव से मनाया जाता है इस दिन को देव - दिवाली के नाम से जाना जाता है और इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा विष्णु भगवान के साथ ही होती है । फिर से घरों में दिवाली मनाई जाती है और दीपक प्रज्वलित किए जाता है ।


और दूसरा और अहम कारण ये भी है कि माता लक्ष्मी धन की देवी है और किसी भी मानुष के पास यदि सिर्फ धन हो तो उसका सदुपयोग ही कर पाए जरूरी नहीं अतः बुद्धि और विवेक के दाता गणपति बप्पा की पूजा दिवाली के दिन करने को कहा गया है ।

धन भी आए और उसके साथ बुद्धि दोनो के उपयोग से हम सब सुख और संपन्नता पूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते है ।





धन्यबाद। 
Happy Beginning...


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सबसे महत्वपूर्ण:-

1) रत्न के द्वारा उपाय
2) उपाय दान स्वरूप उन ग्रहों का जो आपके कुंडली के लये शुभ नही है।( *** कभी भी अच्छे ग्रह का दान नही करना चाहिए)
3) पूजा- पाठ  उन ग्रहों का जो आपके लिए अच्छे तो  परंतु आपके कुंडली मे कमजोर है ।
4) उपाय जो आपके जीवन में अनुकूल परिवर्तन लाये ।
5) कलर थेरपी, आचार- विचार या व्यवहार द्वारा, खान- पान द्वारा उपाय जाने ।

My Email is santwanadutta1974@gmail.com
















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