वट सावित्री व्रत 2024 की पूजा ( Vat Savitri Pooja Vidhi ) कैसे करें ?
व्रत के दिन क्या खाये और कब खाये ??
प्रिये पाठक,
नमस्कार।

है ?
आज फिर से अच्छी बात साझा करूँगी। आज बात होगी वट सावित्री व्रत
(Vat Savitri 2024) की। आज बात करूँगी उस पूजा और व्रत क
जिनकी मनायता है कि सुहागिन महिला अपने अखंड सौभाग्य के
लिए करती है।
अपने पति की लम्बी आयु के लिए तथा सौभाग्य प्राप्ति के लिए ये व्रत
सुहागिन महिलाएं करती है। ये व्रत का महत्व वैसे है जैसे
करवाचौथ के व्रत का। आज के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार
करती है सजती सवरती है और बहुत ही खूबसूरत लगती है
क्युंकि उनका श्रृंगार वैसा ही होता जैसे दुल्हन की तरह
सजती और संवारती है।
वट सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ का क्या महत्व है ? Importance of Vat Savitri Pooja
इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है क्युंकि वट के वृक्ष को लम्बी आयु
का प्रतिक माना गया है। एक वट वृक्ष
का जीवन 100 से 500 साल तक माना गया है।
वट वृक्ष महत्वपूर्ण और पूजन्ये है क्युंकि मान्यता है इस वृक्ष
मे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास है।
वट सावित्री पूजा( में किसकी पूजा की जाती है और क्यों ?
एक पौराणिक मनायता व् कथा अनुसार वट वृक्ष मे माँ सावित्री का भी
निवास था । वट सावित्री व्रत का नाम
सत्यवान और सावित्री के कारण ही पड़ा है। पौराणिक कथा के
अनुसार पतिव्रता सावित्री अपने पति के
प्राणों की रक्षा कैसे की और किस तरह उन्होंने यमराज को
विवश किया और अपनी पति को जीवित किया।
2024 में वट सावित्री व्रत कब है ? Subh Muhrut (Vat Savitri Vrat 2024)
जयेष्ट मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि और पूर्णिमा तिथि को वट
सावित्री का व्रत और पूजन की जाती है।
पंचांग के अनुसार जेष्ठ मास की अमावस्या तिथि 5 जून को 7 बजकर 54 शुरू
हो रही है और 6 जून शाम 6 बजकर 7 मिनट तक होगा
अतः उदया तिथि में अमावस्या आ रहा है
इसलिए ये व्रत इस बार ये व्रत 6 जून गुरूवार को मनाई जायेगी।
पूजा पाठ शुभ योग में करना चाहिए जो कि प्रातः
11 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
वट सावित्री का व्रत पूर्णिमा तिथि को
भी मनाई जाती है जो 21 जून 2024 को है।
वट सावित्री व्रत 2024 की पूजा ( Pooja Vidhi ) कैसे करें ?
प्रथम प्रातः स्नान से निवृत होकर आप साड़ी पहने समान्यतः
महिलाएं लाल, हरा, पीला, गुलाबी और
भी शुभ रंग है वो साड़ी पहनती है और अपना श्रृंगार करती है।
थाल मे भोग प्रसाद, कच्चा सुत ( सफेद कच्चा धागा) ,गुड़ चना,
अक्षत( चावल के दाने जो टूटा नहीं हो)
(फल, फूल, हल्दी, कुंकुम् घी का दीया, पान और सुपाड़ी ,
जल से भरा कलश रख ले।
मंदिर या जहाँ बरगद (वट वृक्ष) का पेड़ है वहां जाये और सबसे
पहले बरगद के पेड़ पर जल चढाये और
ये सामाग्री पेड़ के नीचे समर्पित करें जैसे चना, गुड़, फूल,
अक्षत, हल्दी और कुंकुम्।
फिर जल डालते हुए और वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए
वट वृक्ष मे कच्चा सूत लपेटना चाहिए। ( ये रक्षा सूत्र है )
आपको 7 बार वट वृक्ष के परिक्रमा करनी चाहिए।
फिर वट सावित्री के कथा का सुने या पढ़े।
फिर अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें।
वट सावित्री के दिन महिलाएं क्या नहीं करना चाहिए ?
आपको इस दिन काला, नीला और सफेद वस्त्र और चूड़ियाँ धारण नहीं
करना चाहिए। किसी के साथ अपशब्द का प्रयोग न करें।
कम से कम अपने पति के साथ वाद विवाद से बचें।
सात्विक भोजन ग्रहण करें।
व्रत के दिन क्या खाये और कब खाये ??
सात्विक भोजन ग्रहण करें।
व्रत के दिन क्या खाये और कब खाये ??
पूजा के बाद आप भोजन ग्रहण कर सकते है। भोजन मे आप जो भोग
लगाते है वही ग्रहण करें जैसे आम, चना- पूरी ,खरबूजा,
पुआ खा सकते है।
उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद
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